Home Latest News & Updates राकेट की रफ्तार से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था, IMF ने 7 % GDP ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया

राकेट की रफ्तार से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था, IMF ने 7 % GDP ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया

by Neha Singh 13 October 2026, 10:07 AM IST
13 October 2026, 10:07 AM IST
India's Growth Rate

India’s Growth Rate: वर्ल्ड बैंक के बाद, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी भारत के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है. IMF ने अनुमान लगाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था FY27 और FY28 दोनों में 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. साथ ही IMF ने चेतावनी दी है कि एनर्जी और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के बीच ग्लोबल इकॉनमी कमजोर होती जा रही है.

7 प्रतिशत ग्रोथ रहने का अनुमान

IMF ने माना है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. IMF ने भारत की ग्रोथ के इस अनुमान का कारण उम्मीद से ज्यादा तेजी, मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर में अच्छी गतिविधि को बताया है. रिपोर्ट में FY27 और FY28 दोनों में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, एनर्जी शॉक का असर अलग-अलग देशों पर अलग-अलग तरह से पड़ रहा है, जो मिडिल ईस्ट में संघर्ष, कमोडिटी की कीमतों और टेक्नोलॉजी से जुड़े निवेश की मजबूती पर निर्भर करता है.

ग्लोबल महंगाई दर बढ़ने का अनुमान

IMF ने अपनी ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा, “ग्लोबल इकॉनमी मजबूत बनी हुई है, लेकिन यह अब कमजोर और असमान होती जा रही है.” रिपोर्ट में 2026 में ग्लोबल ग्रोथ 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. फंड का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल महंगाई दर बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो जाएगी, जिसका मुख्य कारण एनर्जी और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें होंगी. इसके बाद 2027 में यह घटकर 4.1 प्रतिशत हो जाएगी.

मिडिल ईस्ट युद्ध पर निर्भर करेगी महंगाई

IMF ने कहा कि ग्लोबल इकॉनमी बार-बार आए झटकों का सामना करने में सफल रही है. इसके पीछे लचीली एनर्जी सप्लाई, दूसरे देशों में बढ़ा हुआ प्रोडक्शन, इन्वेंट्री का इस्तेमाल और वैकल्पिक एनर्जी स्रोतों की ओर झुकाव जैसे कारण रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश ने भी आर्थिक गतिविधियों और इंटरनेशनल ट्रेड को सहारा दिया है, लेकिन फंड ने चेतावनी दी है कि अगर रुकावटें बनी रहती हैं, तो ये सहारे शायद काफी न हों. उसने कहा कि एनर्जी इन्वेंट्री में कमी, और ज़्यादा जियोपॉलिटिकल झटके और लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता भरोसे और आर्थिक गतिविधियों पर बुरा असर डाल सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है, “जोखिम नीचे की ओर झुके हुए हैं.” इसमें चेतावनी दी गई है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक गतिरोध या तनाव बढ़ने से एनर्जी और खाने-पीने की चीजों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, महंगाई का दबाव फिर से बढ़ सकता है और ग्रोथ कमजोर हो सकती है.

वैश्विक व्यापार धीमा होने का अनुमान

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2026 में वैश्विक व्यापार की मात्रा में बढ़ोतरी धीमी हो जाएगी और 2027 में स्थिर हो जाएगी. ऐसा टैरिफ, प्रोडक्शन चेन में बदलाव और टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापार में लगातार मजबूती के असर के कारण होगा. रिपोर्ट अर्थव्यवस्थाओं के लिए पॉलिसी बफर को फिर से बनाने और भविष्य के झटकों का सामना करने की अपनी क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता की ओर इशारा करती है, क्योंकि कर्ज लेने की ऊंची लागत और भारी सार्वजनिक कर्ज सरकारों के पास प्रतिक्रिया देने की गुंजाइश को सीमित करते हैं.

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News Source: ANI

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