Rajesh Exports: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के ठिकानों पर तलाशी ली. कंपनी पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर मार्केट रेगुलेटर सेबी (Sebi) की जांच चल रही है. माना जा रहा है कि बेंगलुरु में हेडक्वार्टर वाली इस कंपनी के खिलाफ यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत की गई है.
कंपनी ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई आय
सूत्रों ने बताया कि बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली जा रही है. सेबी के एक अंतरिम आदेश के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने कथित तौर पर पांच वर्षों में अपनी कंसोलिडेटेड आय (कुल आय) को 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. कंपनी ने यह आय मुख्य रूप से अपनी विदेशी सब्सिडियरी, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित वैलकैम्बी एसए (Valcambi SA) से दिखाई, जबकि उस सब्सिडियरी के ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट में दिखाई गई रकम इससे बहुत कम थी.
शेयरों की खरीद-बिक्री पर रोक
रेगुलेटर ने कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता को अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स की सिक्योरिटीज (शेयर आदि) को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से खरीदने, बेचने या उनमें कोई भी लेन-देन करने से रोक दिया है. राजेश एक्सपोर्ट्स ने किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी से इनकार किया है. कंपनी का कहना है कि उसकी बताई गई आय सही थी और ऐसा लगता है कि मार्केट रेगुलेटर और कंपनी के बीच बातचीत में कोई कमी (कम्युनिकेशन गैप) रह गई थी.
बता दें कि बेंगलुरु स्थिति राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड एक लिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी है. यह गोल्ड रिफाइनरी और गोल्ड प्रोडक्ट्स बनाने का काम करती है. कंपनी अपने प्रोडक्ट्स दुनिया भर के अलग-अलग देशों में एक्सपोर्ट करती है. राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने भारत में अपने प्रोडक्ट्स होलसेल और रिटेल में और अपने खुद के रिटेल शोरूम के जरिए ‘SHUBH ज्वैलर्स’ ब्रांड नाम से भी बेचती है.
REL के निवेशक ने सेबी से की थी शिकायत
सेबी को 11 मार्च 2024 को ईमेल के माध्यम से एक शिकायत मिली, जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) के एक शेयरधारक ने आरईएल के बही-खातों/बैलेंस शीट में दो वर्षों से अधिक समय से बकाया व्यापार प्राप्त राशि के संबंध में संभावित वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया. ट्रेड रिसीवेबल्स की बात करें तो यह ऐसी राशि होती है, जो किसी बिजनेस में अपने कस्टमर को उधार पर बेचे गए सामानों या दी गईं सेवाओं के बदले मिलनी बाकी होती है. और भी आसान शब्दों में कहें तो यह किसी भी कंपनी के ग्राहक की ओर से बकाया लेनदारी होती है. वैसे इसको चुकता या पेमेंट करने की समय-सीमा 30 से 90 दिनों के बीच की होती है लेकिन शिकायकर्ता के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने करीब दो साल से अभी अधिक समय में अपने ट्रेड रिसीवेबल्स को क्लियर नहीं किया. शेयरधारक को इसपर संशय हुआ और फिर उन्होंने सेबी में शिकायत कर दी.
कंपनी वित्तीय आंकड़ों को साबित करने में नाकामः सेबी
सेबी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में आगे कहा कि FAR (Forensic Audit Report) से पता चलता है कि REL ट्रांजैंक्शन टेस्टिंग के जरिए अपने फाइनेंशियल आंकड़ों को साबित करने में सिस्टमैटिक रूप से नाकाम रही है. 7,021.36 करोड़ रुपये के चुने हुए सैंपल में से, REL ने सैंपल वैल्यू के बहुत कम 2.03% के लिए डॉक्यूमेंट्स का पूरा सेट दिया.
इसी तरह, कुल 12,217.15 करोड़ रुपये के सेल्स सैंपल्स की टेस्टिंग में, फॉरेंसिक ऑडिटर पूरे डॉक्यूमेंटेशन के साथ वैल्यू का सिर्फ 35.07% ही वेरिफाई कर सका. सेबी ने अपनी अंतरिम जांच आदेश में बताया है कि कंपनी की इस फर्जी लेन-देन में 11,487 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद शामिल थी.
कंपनी के शेयर के बारे में कुछ खास जानकारी
- कंपनी: पब्लिक लिमिटेड कंपनी
- रजिस्टर्ड ऑफिस: #4, बटाविया चैंबर्स, कुमारा कृपा रोड, कुमारा पार्क ईस्ट, बैंगलोर -560001
- स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग: 1995
- आईपीओ इश्यू साइज: 100 करोड़ रुपये
- कंपनी का मार्केट कैप: 2936.36 करोड़ रुपये (5 जून 2026)
- शेयर प्राइज: 99.45 रुपये
SEBI के रडार पर Rajesh Exports, ‘गोल्ड किंग’ पर ₹15.15 लाख करोड़ की हेराफेरी का आरोप
News Source: PTI
