Share Market Ranking: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने दुनिया के कई देशों के साथ-साथ भारत को भी प्रभावित किया है. बीते 28 फरवरी से जारी इस तनातनी में ईरान और अमेरिका अभी भी शांति प्रस्ताव को पूरा करते हुए नहीं दिख रहे हैं. एक ओर इनके अस्थायी सीजफायर को जारी रखने पर मंथन की बात कही जा रही है वहीं, दूसरी ओर ईरान और अमेरिका एक-दूसरे के खिलाफ हमले भी कर रहे हैं.
इन दोनों देशों के संघर्ष ने भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. महीनों से बाधित यह समुद्री रास्ता, दुनिया के लिए एनर्जी सप्लाई के लिए काफी खास है. इसके बंद हो जाने से भारत समेत विश्व के अन्य देशों में पहले की तरह तेल व गैस की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिसके कारण इनके दामों में कई बार बढ़ोतरी देखी जा चुकी है. जानकार बताते हैं कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच का यह संघर्ष खत्म नहीं होता है तो भारत में तेल और गैस की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी दिख सकती है.
वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने से दुनिया में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, रुपये में कमजोरी दिख रही है और अमेरिकी डॉलर की मांग तेज हो रही है. इस बीच भारतीय शेयर बाजार की स्थिति पहले के मुकाबले काफी बिगड़ती हुई दिख रही है. घरेलू बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार देखी जा रही है. इन सभी वजहों से भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ दुनिया के बाजारों के सामने कमजोर दिख रहा है. इस बीच एक रिपोर्ट ने इसकी चिंता को और अधिक बढ़ा दी है.
जी हां, ग्लोबल रैंकिंग के मामले में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत का शेयर बाजार खिसकर 7वें पायदान पर आ गया है. अभी दुनिया में सबसे मजबूत और शीर्ष पर अमेरिका का मार्केट है. अब आइए जानते हैं कि किन वजहों से 7वें स्थान पर खिसका भारतीय शेयर बाजार और इसके साथ ही जानेंगे कि कैसे तय होती है दुनिया में शेयर बाजारों की ग्लोबल रैंकिंग. इसकी शुरुआत हम आज बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की ओपनिंग और क्लोजिंग से करेंगे.

कैसा रहा आज शेयर बाजार का हाल?
मार्केट ओपनिंग
सबसे पहले बात हम मार्केट ओपनिंग की करेंगे. आज बुधवार को मार्केट खुलते ही सेंसेक्स में गिरावट दिखी. यह आज लाल निशान में 74,507.73 के लेवल पर खुला. मार्केट खुलने के बाद सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर 850.25 अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में 73,799.59 पर कारोबार करते हुए दिखा. इसमें 1.14 फीसदी की सुस्ती दिखी. सेंसेक्स के 30 शेयरों में केवल 3 शेयर ही हरे निशान में कारोबार करते हुए दिखे बाकी के 27 शेयरों में गिरावट देखी गई. बता दें कि शेयर बाजार में लाल निशान का मतलब गिरावट और हरे निशान का मतलब तेजी यानी उछाल होता है. मंगलवार को सेंसेक्स 74,649.84 पर बंद हुआ था.
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अब बात 50 शेयरों वाले निफ्टी की करते हैं. बुधवार को 50 शेयरों वाले निफ्टी में भी गिरावट दिखी. यह मार्केट ओपनिंग के दौरान लाल निशान में 23,415.95 के स्तर पर खुला, लेकिन जल्द ही 23,300 के नीचे आ गया. यह लाल निशान में 23,262.00 पर कारोबार करते हुए दिखा. इसमें 221.55 अंक यानी कि 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके कुल 50 शेयरों में से केवल 11 हरे निशान में कारोबार करते हुए दिखें. वहीं, 39 शेयरों में गिरावट देखी गई. मंगलवार को निफ्टी 23,483.55 पर बंद हुआ था.
मार्केट क्लोजिंग
अब बात मार्केट क्लोजिंग की करेंगे. सेंसेक्स 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ. यह मार्केट क्लोजिंग के दौरान 303.67 अंक लुढ़कर 74,346.17 के लेवल पर कारोबार करते हुए दिखा. इसके 30 शेयरों में से 12 हरे और 18 लाल निशान में बंद हुए. अब बात निफ्टी की करते हैं. मार्केट बंद के दौरान इसमें 0.33 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यह लाल निशान में 77.95 अंक गिरकर 23,405.60 पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ.
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दुनिया में 7वें स्थान पर भारतीय शेयर बाजार
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार अभी दुनिया में 7वें स्थान का शेयर बाजार है. हाल ही में आई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान के बाद अब साउथ कोरिया ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया है. ग्लोबल स्टॉक मार्केट कैपिटलाइजेशन रैंकिंग में भारत छठवें से सातवें स्थान पर खिसक गया है. इसे दक्षिण कोरिया पछाड़कर छठवां स्थान हासिल कर लिया है. कुछ दिन पहले ताइवान ने भी घरेलू शेयर बाजार को पीछे छोड़ा था.
रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून को साउथ कोरिया के स्टॉक मार्केट का मार्केट कैप 5.04 ट्रिलियन हो गया था. यहां के बाजार के मार्केट कैप में इस साल में करीब 80 फीसदी की बढ़त दिखी है. वहीं, 5.15 ट्रिलियन डॉलर के साथ ताइवान दुनिया में मार्केट कैप के हिसाब से पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार है. भारत की बात करें तो यह करीब 4.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ ग्लोबल स्टॉक मार्केट कैप रैंकिंग में 7वें स्थान पर है.
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बढ़ते कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने में सफल रही हैं. वहीं, दूसरी ओर ताइवान और साउथ कोरिया के स्टॉक मार्केट में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वाली कंपनियों के शेयरों में आए तेज उछाल ने इन देशों के मार्केट को मजबूत किया है.
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किन वजहों से 7वें स्थान पर भारतीय शेयर बाजार?
भारतीय शेयर बाजार को सबसे अधिक झटके पश्चिम एशिया में जारी ईरान और अमेरिकी संघर्ष से लगे. इसकी वजह से दुनिया के कई देशों के साथ भारत के लिए भी काफी अहम स्ट्रे़ट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया. इससे देश में तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा प्रभाव पड़ा और देश की तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा. भारत में महंगाई बढ़ गई. इस वजह से मार्केट में और खासकर के तेल कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. भारतीय बाजार में एक-एक दिन में 1000 से अधिक अंकों तक की गिरावट देखी गई.
इस साल में भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली भी की है. उन्होंने कई बार रिकॉर्ड स्तर पर घरेलू शेयर मार्केट से अपने शेयर बेचकर पैसे निकाले. इससे भी देश के मार्केट को काफी नुकसान हुआ. इसकी वजह भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल के बढ़ते दाम, अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग और भारतीय रुपये की होती कमजोरी है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने बाजार को और अधिक झटका दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल में अभी तक विदेशी निवेशकों द्वारा करीब 22 से 24 अरब डॉलर तक के निवेश निकाले जा चुके हैं. विदेशी निवेशक इन पैसों को निकालकर अमेरिकी मार्केट, डॉलर और विदेशों में एआई के शेयरों में लगा रहे हैं. कारण यह है कि भारत में एआई का मार्केट अभी उतना न बड़ा है और न ही मजबूत है.
स्टॉक मार्केट के 30 शेयरों वाले इंडेक्स सेंसेक्स की बात करें तो इस साल में अभी तक इसमें 11 फीसदी से अधिक तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. वहीं, निफ्टी में 14 फीसदी से अधिक की सुस्ती आई है. इस वजह से बाजार में शेयरों के वैल्यूएशन हाई हुए, कंपनियों की कमाई में सुस्ती दिखी और बाकी की बची हुई कसर विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को कमजोर कर पूरी कर दी.
कैसे तय होती है दुनिया में शेयर बाजारों की रैंकिंग?
बता दें कि दुनिया में शेयर बाजारों की ग्लोबल रैंकिंग मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) के आधार पर तय होती है. मार्केट कैप की बात करें तो किसी कंपनी के एक शेयर के मौजूदा भाव को जब हम उसके कुल शेयरों की संख्या से गुणा करते हैं तो जो रिजल्ट आता है वह मार्केट कैप कहलाता है. वहीं, जब हम किसी देश के शेयर बाजार में लिस्टेट सभी कंपनियों के मार्केट कैप को एक साथ जोड़ते हैं तो उस देश के शेयर बाजार का कुल वैल्यू या मार्केट कैप तय होता है. इस मार्केट कैप के आधार पर ही दुनिया में शेयर बाजारों की ग्लोबल रैंकिंग जारी की जाती है. किसी भी देश के स्टॉक मार्केट का मार्केट कैप जितना अधिक होगा उसकी ग्लोबल रेटिंग या रैंकिंग उतनी ही अच्छी होगी.
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दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजार
दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजारों में सबसे ऊपर अमेरिका का मार्केट है. इसका मार्केट कैप 79.47 ट्रिलियन डॉलर है. दूसरे स्थान पर चीन का बाजार है. इसका मार्केट कैप 15.09 ट्रिलियन डॉलर है. जापान का शेयर बाजार टॉप 10 में से तीसरे स्थान पर आता है. इसका मार्केट कैप करीब 8.63 ट्रिलियन डॉलर का है. चौथे स्थान पर हांगकांग का मार्केट है. इसका मार्केट कैप 7.24 ट्रिलियन डॉलर है. पांचवें स्थान पर ताइवान है और इसका मार्केट कैप 5.15 ट्रिलियन डॉलर है.
छठे स्थान पर साउथ कोरिया है. इसका मार्केट कैप 5.04 ट्रिलियन डॉलर है. सातवें स्थान पर भारत है और इसका मार्केट कैप 4.84 ट्रिलियन डॉलर का है. आठवें स्थान पर कनाडा का मार्केट है और इसका मार्केट कैप 4.53 ट्रिलियन डॉलर का है. नौवें स्थान पर यूनाइडेट किंगडम (ब्रिटेन) है. इसका मार्केट कैप 3.94 ट्रिलियन डॉलर है. वहीं, दसवें स्थान पर फ्रांस का स्टॉक मार्केट है और इसका मार्केट कैप 3.45 ट्रिलियन डॉलर है.
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