UPI Payments Charge: आज के इस डिजिटल जमाने में भारत में यूपीआई पेमेंट ने एक क्रांति का काम किया है. अब अधिकतर लोग कैश का इस्तेमाल कम और ऑनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल अधिक करते हुए दिखते हैं.
हाल ही में सरकार के द्वारा संसद में एक रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसके आंकड़ों में बताया गया था कि इस साल जून तक 55.49 करोड़ से अधिक यूजर्स यूपीआई से जुड़ चुके हैं. संसद के लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के लिए करीब 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रहा.
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), जो एक इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है. यह भारत की तकनीक है. इसका इस्तेमाल अब केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों जैसे यूएई, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस, फ्रांस और भूटान आदि देशों में हो रहा है. मतलब कि भारत की इस तकनीक का दुनिया में डंका बज रहा है.
इस बीच, बीते दिनों एक खबर आई कि सरकार यूपीआई पेमेंट पर लोगों से शुल्क यानी कि चार्ज वसूल सकती है. लोग तरह-तरह की बातें करने लगे. कई लोग यह भी कहने लगे कि अगर सरकार यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लेगी तो वे फिर से नगद पेमेंट का ही इस्तेमाल करेंगे. हालांकि, यह खबर कितनी सच और कितनी अफवाह थी, इसकी साफ-साफ जानकारी सरकार ने दे दी है. जी हां, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए देश की संसद में यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगेगा या नहीं, इसको लेकर खास और बड़ी जानकारी दी है. आइए इसके बारे में जानते हैं लेकिन शुरुआत हम इस बात से करेंगे कि आखिरकार यूपीआई क्या है.

यूपीआई क्या है?
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है. यह RBI के रेगुलेशन में काम करने वाली संस्था है. UPI को IMPS इंफ्रास्ट्रक्चर पर बनाया गया है और यह आपको किन्हीं भी दो लोगों के बैंक अकाउंट के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक ऐसा सिस्टम है जो यूजर्स को एक UPI ऐप में कई बैंक और दूसरे मान्य अकाउंट्स (किसी भी भाग लेने वाले बैंक के) जोड़ने की सुविधा देता है. यह बैंकिंग के कई फीचर्स, आसानी से फंड ट्रांसफर और मर्चेंट पेमेंट जैसी सुविधाओं को एक ही जगह पर लाता है.
यूपीआई का पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को मुंबई में RBI के गवर्नर डॉ. रघुराम जी. राजन ने किया था. 2016 में एक मामूली शुरुआत से लेकर आज यूपीआई की अभूतपूर्व स्वीकृति और अपनाने की कहानी अपने पैमाने और प्रभाव के मामले में अद्वितीय है.
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ग्राहकों के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री रहेंगे- वित्त मंत्री
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार 10 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में यूपीआई पेमेंट को लेकर काफी अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ग्राहकों के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री रहेंगे. उन्होंने कहा कि “क्या ग्राहकों को कोई UPI चार्ज देना होगा? नहीं, ग्राहकों को UPI ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं देना होगा.”
कुछ लोगों को यह डर था कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लग सकते हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने साफ किया कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन – जिनमें सड़क किनारे सामान बेचने वालों के साथ होने वाले कम कीमत वाले ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं – फ्री ही रहेंगे. मतलब कि आम लोगों की जेब पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं आएगा.
सीतारमण ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ (The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026) पर हो रही चर्चा का जवाब दे रही थीं. राज्यसभा ने इस बिल को वॉइस वोट से लोकसभा को वापस भेज दिया, जिससे संसदीय प्रक्रिया पूरी हो गई. मंत्री ने कहा कि इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की धारा 10A में संशोधन करना है.
उन्होंने कहा कि यह संशोधन एक सक्षम बनाने वाला प्रावधान है और यह UPI यूजर्स पर कोई टैक्स या ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाता है. सीतारमण ने कहा कि यह बिल सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए उन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों को तय करने का अधिकार देता है, जिन्हें चार्ज से कानूनी सुरक्षा मिलती रहेगी.

मर्चेंट चार्ज को लेकर वित्त मंत्री ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भविष्य में मर्चेंट चार्ज (MDR) सिर्फ कुछ खास तरह के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू हो सकते हैं. हालांकि, इसके लिए उन्होंने ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ का जिक्र किया. वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने जवाब में कहा कि जब संसद से बिल पास हो जाएगा, तो NPCI की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमिटी इस बात पर विचार करेगी और तय करेगी कि क्या कोई MDR लागू किया जाना चाहिए या नहीं; और अगर ऐसा होता है, तो उसका दायरा और ढांचा क्या होगा.
उन्होंने कहा कि इसलिए, अभी तक किसी भी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क को अंतिम रूप नहीं दिया गया है. सीतारमण ने कहा, “UPI अपनी शुरुआत से ही ग्राहकों के लिए मुफ्त रहा है, और हर भारतीय बिना कोई ट्रांजैक्शन चार्ज दिए तुरंत डिजिटल पेमेंट करना जारी रखेगा.” उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी सरकार की वित्तीय समावेश (financial inclusion) और UPI के समावेशी विकास (inclusive growth) के संकल्प के केंद्र में हैं.
वित्त मंत्री ने कहा, “व्यापारियों के ज्यादातर ट्रांजैक्शन, जिनमें आम और कम कीमत वाले ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं, मुफ्त बने रहेंगे. भविष्य में कोई भी MDR केवल एक तय सीमा से ज्यादा कीमत वाले व्यापारियों की लेनदेन की सीमित श्रेणी पर ही लागू होगा.” सीतारमण ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम भारत का है और अकेले जुलाई 2026 में देश ने 29.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए.
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मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की बात करें तो यह वह शुल्क है जो व्यापारी अपने यहां डिजिटल पेमेंट से मिलने वाले पैसों के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियों को देते हैं. मर्चेंट डिस्काउंट रेट आम लोगों व ग्राहकों पर नहीं बल्कि व्यापारियों या कारोबारियों पर लागू होता है.

इन देशों में डिजिटल ट्रांजैक्शन पर शुल्क
वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में यह भी बताया कि अमेरिका, जापान और चीन समेत कई देशों में डिजिटल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगता है. उन्होंने कहा, “SVANidhi मर्चेंट्स और रेहड़ी-पटरी वालों की ओर से किए जा रहे UPI ट्रांजैक्शन की वजह से ही UPI इतना बड़ा बन पाया है.” पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए सीतारमण ने कहा कि जब UPI को लॉन्च किया गया था, तब भारत के पूर्व वित्त मंत्री और उनके सहयोगी इसका मजाक उड़ाते थे और इसे सफल बनाने की देश की क्षमता पर सवाल उठाते थे. उन्होंने कहा, “आज यूपीआई 11 देशों में उपलब्ध है.”
भ्रम न फैलाने की अपील
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास पर भी निशाना साधा. ब्रिटास ने दावा किया था कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में UPI पेमेंट पर फीस लेने का फैसला किया है और मंत्री का जवाब सुने बिना ही सदन से बाहर चले गए थे.
सीतारमण ने कहा, “अगर जॉन ब्रिटास एक लाइन सुनना चाहते हैं, तो कृपया यहां रुक सकते हैं. यह कम्युनिस्टों का आम तरीका है – बिना किसी तथ्य के सब पर बरस पड़ना, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और फिर ‘मुझे बोलने का अधिकार है’ जैसी बातें करना… लेकिन जब उन्हें हर बात का सिलसिलेवार जवाब दिया जाता है, तो उनमें हिम्मत नहीं होती. कायर हैं ये लोग!”
मंत्री सीतारमण ने कहा, “इस देश में कम्युनिस्ट पूरी तरह से कायर हैं; उस सदस्य (जॉन ब्रिटास) ने यह साबित कर दिया है. वे तथ्यों का सामना नहीं कर सकते, लेकिन वे बस अड़ंगा लगाते रहेंगे और शोर-शराबा करते रहेंगे.” उन्होंने विपक्ष के सदस्यों से इस मुद्दे पर भ्रम न फैलाने की अपील भी की.

विदेशों में यूपीआई के लिए एनआईपीएल का गठन
मिली जानकारी के अनुसार, भारत का मजबूत डिजिटल भुगतान तंत्र यूपीआई, विश्व स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. यूपीआई की स्थानीय सफलता के बाद, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने वर्ष 2020 में एनआईपीएल (एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड) नामक एक शाखा की स्थापना की ताकि भुगतान प्रणाली को देश से बाहर ले जाया जा सके. तब से, एनआईपीएल और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारत की सीमाओं से परे यूपीआई-आधारित लेनदेन का विस्तार करने के लिए 30 से अधिक देशों में वित्तीय संस्थाओं के साथ समझौते किए हैं.
फ्रांस, यूएई और श्रीलंका समेत कई देश यूपीआई से जुड़ गए हैं. फ्रांस में यूपीआई का प्रवेश महत्वपूर्ण है, जिससे इसे पहली बार यूरोप में अपनी पकड़ बनाने में मदद मिली. बीते कुछ साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स समूह में यूपीआई के विस्तार का समर्थन किया था, जिसमें तब छह नए सदस्य देश शामिल हो गए थे. अब इसका और भी देशों में विस्तार हो रहा है.
टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल- 2026
अभी, बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट के लिए यूजर्स से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं ले सकते हैं. इस बिल (‘टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026’) में सेंट्रल गवर्नमेंट को यह तय करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है कि नोटिफिकेशन के जरिए किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों या ट्रांजैक्शन को मुफ्त रखा जाए.
इस बिल के जरिए सरकार ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और “प्रोसेस सर्टेनिटी” (प्रक्रिया की निश्चितता) देकर विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करना आसान बनाना चाहती है. यह बिल 5 जून के उस ऑर्डिनेंस की जगह लेगा जिसमें G-Secs में निवेश से FPIs को होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स पर I-T छूट दी गई थी.

बिल में और क्या है खास?
इस बिल में फंड मैनेजरों के लिए भारत में शिफ्ट होना आसान बनाने का प्रस्ताव भी है. पॉलिसी में स्पष्टता लाकर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए, यह कानून उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली इनकम टैक्स छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए किसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर की सेवाएं लेती हैं.
बिल में बताए गए खास इलेक्ट्रॉनिक आइटम में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके मुख्य पार्ट्स और एक्सेसरीज शामिल हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों के लिए कंपोनेंट सप्लाई में मदद करने के लिए, बिल उन विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक 15 साल के लिए इनकम टैक्स छूट देने का प्रस्ताव करता है जो भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर को सप्लाई करने के लिए कस्टम्स वेयरहाउस में कंपोनेंट स्टोर करती हैं.
यह भारतीय डेटा सेंटरों का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए मंजूरी और नोटिफिकेशन की जरूरतों को भी खत्म करता है. इसमें यह प्रस्ताव भी है कि भारतीय डेटा सेंटर सिर्फ सीधी ओनरशिप के बजाय लीज पर चलाए जाने चाहिए.
वित्त मंत्री ने कहा कि इससे भारत में डेटा सेंटर सेवाओं का इस्तेमाल करके क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार में आसानी) को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इस संशोधन से भारतीय डेटा सेंटरों का एक बहुत बड़ा इकोसिस्टम बनने की भी संभावना है जो विदेशी कंपनियों को डेटा सेंटर सेवाएं देगा. सीतारमण ने कहा कि इस सुधार से भारत में AI डेटा सिटीज बन पाएंगी और उम्मीद है कि इससे भारत में AI डेटा सेंटरों में भारी निवेश आएगा.
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