Home Latest News & Updates चेहरा बदला, शहर बदला, बदल लिया नाम… पर 26 साल बाद दबोचा गया बिल्डर, इस प्लान से खुला राज

चेहरा बदला, शहर बदला, बदल लिया नाम… पर 26 साल बाद दबोचा गया बिल्डर, इस प्लान से खुला राज

by Sanjay Kumar Srivastava 17 August 2026, 5:41 PM IST (Updated 17 August 2026, 5:45 PM IST)
17 August 2026, 5:41 PM IST (Updated 17 August 2026, 5:45 PM IST)
चेहरा बदला, शहर बदला, बदल लिया नाम... पर 26 साल बाद इस तरह दबोचा गया बिल्डर, खुला अतीत का सबसे खौफनाक पन्ना

Kidnapping Case: पहचान बदलकर देहरादून में रह रहे बिल्डर को पुलिस ने 26 साल बाद दबोच लिया. उसे 1 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए अपहरण के 31 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सज़ा मिली थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे जनवरी 2000 में एक महीने के लिए अंतरिम जमानत दी थी. जेल से बाहर आते ही वह फरार हो गया और देहरादून में जाकर बस गया. इसके बाद वहीं रीयल इस्टेट का काम करने लगा. इधर पुलिस लगातार उसकी खोजबीन कर रही थी. सूचना पर पुलिस ने उसे 13 अगस्त की रात गिरफ्तार कर लिया.

अंतरिम जमानत के बाद हो गया था फरार

कैदी अमित यादव उत्तर प्रदेश के सैदपुर का रहने वाला है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यादव को 1999 में अपहरण और 1 करोड़ की फिरौती मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने जनवरी 2000 में उसे एक महीने के लिए अंतरिम ज़मानत दी थी. उन्होंने कहा कि ज़मानत की अवधि खत्म होने के बाद भी उसने सरेंडर नहीं किया और अगले 26 सालों तक फरार रहा. 2000 में उसकी गिरफ्तारी पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

ये था मामला

यह मामला सितंबर 1995 में ऋषि सेठी के अपहरण से जुड़ा है. 12 सितंबर 1995 की शाम करीब 7 बजे सेठी एम्स (AIIMS) के तत्कालीन डायरेक्टर के घर के पास अपनी कार में बैठे थे, तभी तीन-चार लोगों ने उन पर हमला किया. उनकी आंखों पर पट्टी बांधी और उनकी ही कार में उनका अपहरण कर लिया. अधिकारी ने बताया कि इसके बाद पीड़ित को एक अज्ञात जगह पर ले जाया गया और बंधक बनाकर रखा गया. अपहरणकर्ताओं ने सेठी के परिवार से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी.

मेरठ में ली थी फिरौती

मांग पर उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक होटल के कमरा नंबर 221 में 10 लाख रुपये रखे गए. 16 सितंबर 1995 को फिरौती की रकम लेने के बाद पुलिस ने यादव को मेरठ में पकड़ लिया. उसके पास से पूरे 10 लाख रुपये बरामद किए गए. अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने गाजियाबाद में उस घर को भी खोज निकाला, जहां सेठी को बंधक बनाकर रखा गया था. पीड़ित एक स्टोररूम के अंदर जंजीरों से बंधा हुआ मिला. उसे सुरक्षित बचा लिया गया. 25 अगस्त, 1999 को उसे दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा के साथ-साथ 2.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

इस प्लान से पुलिस हुई कामयाब

मामले में तब कामयाबी मिली जब क्राइम ब्रांच ने गंभीर अपराधों में शामिल भगोड़ों को पकड़ने के लिए एक खास ऑपरेशन शुरू किया. एक टीम को फरार दोषी के बारे में जानकारी मिली. टीम ने उसके ठिकाने के बारे में खुफिया जानकारी जुटानी शुरू कर दी. अधिकारी ने कहा कि टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन दशक से भी पुराने मामले में फरार अपराधी की पहचान करना था. न तो जेल अधिकारियों के पास और न ही दिल्ली पुलिस के पास यादव की कोई तस्वीर थी.

भेजा गया तिहाड़ जेल

शुरुआत में मामले से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ और रिकॉर्ड भी नहीं मिल पाए, जिसके बाद टीम ने क्राइम ब्रांच के क्राइम रिकॉर्ड ऑफिस और फिंगर प्रिंट ब्यूरो से मदद ली. लगातार कोशिशों के बाद, 1999 में सज़ा सुनाए जाने के समय यादव के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड मिल गए. ये रिकॉर्ड उम्रकैद की सज़ा पाए फरार अपराधी की पहचान करने में बहुत अहम साबित हुए. जानकारी के आधार पर टीम ने 13 अगस्त को देहरादून में छापा मारा और यादव को पकड़ लिया. यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.

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News Source: PTI

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