Home Latest News & Updates भतौड़िया मध्य विद्यालय में मासूमों की सेहत से खिलवाड़, ग्रामीणों ने शिक्षक को घेरा, बच्चे पी रहे दूषित पानी

भतौड़िया मध्य विद्यालय में मासूमों की सेहत से खिलवाड़, ग्रामीणों ने शिक्षक को घेरा, बच्चे पी रहे दूषित पानी

by Amarjeet Singh 23 August 2026, 6:38 PM IST (Updated 25 August 2026, 1:59 PM IST)
23 August 2026, 6:38 PM IST (Updated 25 August 2026, 1:59 PM IST)
भतौड़िया मध्य विद्यालय में मासूमों की सेहत से खिलवाड़, ग्रामीणों ने शिक्षक को घेरा, स्कूल में बच्चों को पिलाया जा रहा दूषित पानी

Middle School Bhatauria: भागलपुर के नाथनगर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय भतौड़िया में बच्चों को दूषित पानी पिलाए जाने का मामला सामने आया है. स्कूल की इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों ने हाथ में माइक लेकर स्कूल की एक-एक समस्या को कैमरे के सामने दिखाया और जिम्मेदारों से व्यवस्था सुधारने की मांग की. Gen अल्फा ने सबसे पहले स्कूल के बच्चों से बातचीत की. बच्चों ने स्कूल में मिलने वाले पानी और अन्य समस्याओं के बारे में अपनी बात रखी. इसके बाद ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में पानी की व्यवस्था का जायजा लिया. उनका आरोप था कि जिस पानी का इस्तेमाल बच्चे पीने के लिए कर रहे हैं, वह साफ नहीं है और इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा हो सकता है.

ग्रामीणों ने खोली बदहाली की पोल

मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब ग्रामीण एक बाल्टी में स्कूल में इस्तेमाल हो रहा पानी लेकर शिक्षक के सामने पहुंच गए. ग्रामीणों ने शिक्षक निशिकांत रजक से बार-बार आग्रह किया कि अगर यह पानी बच्चों के पीने योग्य है तो इसे कैमरे के सामने पीकर दिखाइए. ग्रामीणों का कहना था कि शिक्षक खुद इस पानी को पीने से बचते हैं, फिर बच्चों को यही पानी क्यों दिया जा रहा है. ग्रामीणों के आग्रह पर शिक्षक निशिकांत रजक ने पानी पीने के लिए हामी भरी. हालांकि ग्रामीणों ने इसे कैमरे के सामने की औपचारिकता बताते हुए सवाल उठाया कि अगर पानी वास्तव में पीने योग्य है तो शिक्षक सामान्य दिनों में इसे क्यों नहीं पीते.

मिड डे मील पर भी सवाल

ग्रामीणों ने स्कूल की अन्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए. उनका आरोप था कि स्कूल में शौचालय की स्थिति ठीक नहीं है और बच्चों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है. मिड-डे मील को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की. सबसे खास बात यह रही कि विरोध करने वाले कई ग्रामीण इसी स्कूल से पढ़कर निकले हैं. उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में उन्होंने शिक्षा हासिल की, वहां आज भी बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

विभाग को भेजेंगे शिकायतः प्राचार्य

ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से स्कूल का निरीक्षण कराकर साफ पेयजल, स्वच्छ शौचालय और गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है. अब सवाल यह है कि अगर स्कूल में उपलब्ध पानी बच्चों के लिए सुरक्षित है तो उसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं कराई जाती? और अगर पानी दूषित है तो बच्चों को उसे पीने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? मामले पर शिक्षक निशिकांत रजक ने कहा कि स्कूल में जगह का घोर अभाव है. वहीं प्राचार्य सुबोध पासवान ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों से विभाग को अवगत करवाएंगे.

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