Home मनोरंजन नहीं रहे गांवों की कहानियों को पर्दे पर अमर करने वाले Bharathiraja, 84 साल की उम्र में हुआ निधन

नहीं रहे गांवों की कहानियों को पर्दे पर अमर करने वाले Bharathiraja, 84 साल की उम्र में हुआ निधन

by Preeti Pal 10 June 2026, 10:18 AM IST (Updated 10 June 2026, 11:45 AM IST)
10 June 2026, 10:18 AM IST (Updated 10 June 2026, 11:45 AM IST)
नहीं रहे गांवों की कहानियों को पर्दे पर अमर करने वाले Bharathiraja, 84 साल की उम्र में हुआ 6 बार नेशनल अवॉर्ड विनर का निधन

Bharathiraja: साउथ इंडियन सिनेमा के इतिहास में एक युग का अंत हो गया है. तमिल फिल्मों के फेमस डायरेक्टर और 6 बार नेशनल अवॉर्ड विनर भारतीराजा का 10 जून को चेन्नई में निधन हो गया. 84 साल के फिल्म मेकर लंबे टाइम से बीमार चल रहे थे. उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे क्रिएटर खो दिया है, जिसने गांव की मिट्टी की खुशबू को बड़े पर्दे तक पहुंचाकर फिल्म मेकिंग की परिभाषा बदल दी.

अपने दम पर बनाया नाम

17 जुलाई, 1941 को तमिलनाडु के थेनी अल्लीनगरम में पैदा हुए भारतीराजा का असली नाम चिन्नासामी पेरियामाया थेवर था. सिंपल फैमिली में पैदा हुए भारतीराजा का फिल्मी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन फिल्मों के लिए उनके जुनून ने उन्हें इस दुनिया तक पहुंचा ही दिया. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की. करियर की शुरुआत में उन्होंने कई फेमस फिल्म मेकर्स के साथ काम किया और कहानी कहने की आर्ट सीखी.

पहली फिल्म

साल 1977 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘16 वयथिनिले’ को डायरेक्ट किया. इस फिल्म ने तमिल सिनेमा की दिशा ही बदल दी. उस दौर में ज्यादातर फिल्में स्टूडियो के अंदर शूट होती थीं, लेकिन भारतीराजा गांवों की रीयल लोकेशन्स पर कैमरा लेकर पहुंच गए. उनकी इस पहल ने तमिल सिनेमा में नई तरह की फिल्मों का दौर शुरू कर दिया. वैसे, भारतीराजा ने सिर्फ लोकेशन ही नहीं बदली, बल्कि फिल्मों की प्रेजेंटेशन भी बदल दी. उन्होंने हीरो को सिंपल और रीयल दिखाया. हालांकि, उस टाइम हैवी मेकअप और ग्लैमर का ट्रेंड था. उन्होंने सांवले रंग की एक्ट्रेसेस को भी लीड रोल देकर उस सोच को चैलेंज किया, जिसमें सिर्फ गोरी एक्ट्रेसेस को ही लीड रोल के लिए सिलेक्ट किया जाता था.

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एंटरटेनमेंट और मैसेज साथ-साथ

पहली फिल्म की सक्सेस के बाद भारतीराजा ने अलग-अलग सब्जेक्ट्स पर काम किया. ‘किझाके पोगुम रेल’ ने उनकी पॉपुलैरिटी को और बढ़ाया. हालांकि, उस टाइम उन पर सिर्फ गांव की ऑडियन्स के लिए फिल्में बनाने का आरोप लगा तो उन्होंने ‘सिगप्पु रोजाक्कल’ जैसी मॉर्डन कहानी वाली फिल्म बनाई. इसके बाद ‘निझलगल’, ‘टिक टिक टिक’, ‘अलैगल ओइवथिल्लई’, ‘मन्न वासनई’ और ‘मुथल मरियाथई’ जैसी फिल्मों ने उन्हें साउथ के टॉप डायरेक्टर्स की लिस्ट में खड़ा कर दिया. साथ ही उनकी फिल्मों में एंटरटेनमेंट के साथ-साथ सोशल मैसेज भी होता था. ‘वेदम पुधिथु’ जैसी फिल्म ने जातिगत भेदभाव जैसे सेंसिटिव मुद्दे को उन्होंने मजबूती से उठाया. वहीं, ‘करुथम्मा’ और ‘किझक्कु चीमैयिले’ जैसी फिल्मों ने नई जेनेरेशन को भी इम्प्रेस किया.

6 नेशनल अवॉर्ड्स

करीब 40 फिल्मों को डायरेक्ट करने वाले भारतीराजा को तमिल सिनेमा में ‘इयक्कुनर इमायम’ यानी टॉप डायरेक्टर कहा जाता था. उनके खाते में 6 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 4 फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड और कई नेशनल लेवल के अवॉर्ड दर्ज हैं. साल 2004 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था. भारतीराजा नई टैलेंट्स को मौका दिया करते थे. उन्होंने कार्तिक, राधा, रेवती, राधिका और विजयशांति जैसे स्टार्स को लॉन्च किया.

इन फिल्मों में एक्टिंग भी की

बाद के सालों में भारतीराजा ने एक्टिंग भी की. उन्होंने ‘पांडियनाडु’, ‘थिरुचित्राम्बलम’ तथा ‘महाराजा’ जैसी फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया. पिछले कुछ टाइम से उनकी सेहत लगातार खराब चल रही थी. बेटे मनोज के निधन के बाद वो मेंटली और इमोशनली टूट गए थे. दिसंबर 2025 में उन्हें लंग इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के बावजूद उनकी हालत में पूरी तरह सुधार नहीं हो सका. आखिरकार 10 जून, 2026 को भारतीराजा ने अपनी आखिरी सांस ली. पिछले 5 दशकों तक भारतीराजा ने तमिल सिनेमा को नई सोच, नई भाषा और नई पहचान दी.

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News Source: PTI

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