Home मनोरंजन Samantha Ruth Prabhu की गोद भराई में 94 कलाओं वाली खास परंपरा, आप जानते हैं इसका मतलब?

Samantha Ruth Prabhu की गोद भराई में 94 कलाओं वाली खास परंपरा, आप जानते हैं इसका मतलब?

by Preeti Pal 16 September 2026, 1:45 PM IST
16 September 2026, 1:45 PM IST
Samantha Ruth Prabhu की गोद भराई में दिखी 94 कलाओं वाली खास परंपरा, सिंपल लुक में भी छाईं एक्ट्रेस

Samantha Ruth Prabhu Godh Bharai: एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु की जिंदगी में इन दिनों खुशियों से भरी हुई है. फिल्ममेकर राज निदिमोरु के साथ अपने पहले बच्चे का स्वागत करने से पहले सामंथा ने कोयंबटूर में ईशा योग सेंटर के लिंगा भैरवी मंदिर में एक बहुत खास गोद भराई समारोह में हिस्सा लिया. इस समारोह में ग्लैमर से ज्यादा परंपरा, आध्यात्मिकता और मां बनने के खूबसूरत एहसास को महत्व दिया गया. सामंथा ने इस खास मौके की कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कीं. उनका लुक भी काफी सिंपल और एलिगेंट था. उन्होंने मस्टर्ड कलर का सलवार सूट पहना था. इसके साथ चोकर नेकलेस और मैचिंग ईयररिंग्स पहनकर एक्ट्रेस ने अपना लुक पूरा किया. चेहरे पर ड्यूई मेकअप, हल्के ब्लश्ड चीक्स और सॉफ्ट वेव्स ने उनके लुक को मिनिमल लेकिन बहुत खूबसूरत बना दिया.

सिर्फ रस्म नहीं था ये समारोह

सामंथा ने बताया कि वो हमेशा से भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करती रही हैं. उन्होंने माना कि हर रस्म का मतलब उन्हें हमेशा समझ नहीं आता, लेकिन मंत्रों की आवाज, एनर्जी और पीढ़ियों से चली आ रही प्राचीन परंपराओं में वो गहराई महसूस करती हैं. इस गोद भराई समारोह का आयोजन उनकी करीबी दोस्त शिल्पा रेड्डी ने किया था. शिल्पा इस दौरान ब्राइट पीली सिल्क साड़ी में नजर आईं. उन्होंने गोल्ड जूलरी और बालों में फूल सजाकर अपना ट्रेडिशनल लुक पूरा किया.

94 कलाओं वाली देवी

सामंथा की गोद भराई की सबसे खास बात थी इसका आध्यात्मिक स्वरूप. उन्होंने बताया कि समारोह में कला आवरण यानी श्री कल्पम नाम की एक खास रस्म हुई, जो श्रीविद्या परंपरा से जुड़ी है. सामंथा के मुताबिक ये रस्म देवी की 94 कलाओं को सम्मान देती है. इसमें होने वाली मां के सात चक्रों को पवित्र जल और मंत्रों के जरिए ऊर्जावान करने की प्रक्रिया शामिल होती है. इस पूरी रस्म का उद्देश्य मां और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए शुभता, सुरक्षा और आशीर्वाद की भावना पैदा करना है.

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देवी का रूप मानती है परंपरा

इस रस्म की सबसे भावुक करने वाली बात सामंथा को ये लगी कि इसमें होने वाली मां को खुद देवी के रूप में देखा जाता है. यानी वो सिर्फ बच्चे को जन्म देने वाली महिला नहीं, बल्कि सृष्टि की रचना करने वाली शक्ति का प्रतीक मानी जाती है. रस्म के बाद होने वाली मां को श्री चक्र यंत्र के पवित्र केंद्र में बैठाया जाता है. इसमें नौ आवरण होते हैं, जो आध्यात्मिक यात्रा के अलग-अलग चरणों का प्रतीक माने जाते हैं. इसके केंद्र में मौजूद बिंदू को सृष्टि के मूल स्रोत और देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद देवी खड्गमाला का पाठ किया जाता है, जिसमें अलग-अलग देवताओं और दिव्य शक्तियों के नामों का जाप होता है. सामंथा के अनुसार इस मंत्रोच्चार को मां और बच्चे के चारों ओर सुरक्षा का एक आध्यात्मिक घेरा बनाने से जोड़ा जाता है.

जन्म से पहले मां और बच्चे का रिश्ता

इस अनुभव ने सामंथा को भावनात्मक रूप से भी काफी प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि वो समारोह में इसके बारे में लगभग कुछ जाने बिना पहुंची थीं. अब वहां से खुद को बहुत धन्य और सुरक्षित महसूस करते हुए लौटीं हैं. वैसे, अब सामंथा की गोद भराई भी खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं.

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