Home Top News दमदार आवाज और अभिनय के बादशाह को अंतिम विदाई; नाना पाटेकर के निधन से सदमे में सिनेमा

दमदार आवाज और अभिनय के बादशाह को अंतिम विदाई; नाना पाटेकर के निधन से सदमे में सिनेमा

by Neha Singh 8 October 2026, 9:31 AM IST (Updated 8 October 2026, 9:59 AM IST)
8 October 2026, 9:31 AM IST (Updated 8 October 2026, 9:59 AM IST)
Nana Patekar Death

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर की दमदार आवाज, खास अंदाज और जबरदस्त एक्टिंग के बिना भारतीय सिनेमा कैसा होता?… हिंदी और मराठी सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में से एक दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया. वे 75 साल के थे और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई. खबरों के मुताबिक, पाटेकर अपने घर पर बेहोश पाए गए और उन्हें इलाज के लिए डोना पाउला के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया. सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन इलाज का उन पर कोई असर नहीं हुआ.

45 मिनट तक की गई जान बचाने की कोशिश

मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि गुरुवार सुबह 5:20 बजे अभिनेता नाना पाटेकर का उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण निधन हो गया. डॉ. सालकर के अनुसार, पाटेकर को उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट आया और वे बेहोश हो गए. एक मेडिकल टीम घर पहुंची और उन्हें CPR दिया गया. CPR के दौरान उनकी धड़कनें पूरी तरह बंद (एसिस्टोल) रहीं. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें होश में लाने के लिए 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. डॉक्टर के अनुसार, एक मेडिको-लीगल केस (MLC) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा.

Nana Patekar

रायगढ़ में हुआ जन्म

नाना पाटेकर को कभी भी किसी बड़े परिचय की जरूरत नहीं पड़ी. उनकी आवाज, हाव-भाव और संवाद की कुछ लाइनों में भी जबरदस्त गहराई लाने की क्षमता ने उन्हें कई पीढ़ियों के दर्शकों के बीच पहचान दिलाई. नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में विश्वनाथ पाटेकर के रूप में हुआ था. उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले मुंबई के सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट में पढ़ाई की थी.

एक्टिंग करियर

नाना पाटेकर ने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से बॉलीवुड में एक्टिंग की शुरुआत की और कई चुनौतीपूर्ण किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाई. उन्हें बड़ी सफलता उन फिल्मों से मिली जिनमें उन्हें अपनी एक्टिंग की रेंज दिखाने का मौका मिला, जिसने आगे चलकर उनके करियर को नई पहचान दी. ‘परिंदा’ में उनकी एक्टिंग के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जबकि ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. उन्हें ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूज़िकल’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों के लिए भी काफी तारीफ मिली. हालांकि पाटेकर सिर्फ गंभीर ड्रामा या दमदार किरदारों तक ही सीमित नहीं थे. वे कमर्शियल सिनेमा और कॉमेडी, दोनों में ही खुद को साबित किया.

‘वेलकम’ फिल्म में उदय शेट्टी के रोल ने उन्हें दर्शकों की एक नई पीढ़ी से परिचित कराया और यह किरदार उनके बाद के करियर के सबसे यादगार कॉमिक किरदारों में से एक बन गया. पाटेकर का काम सिर्फ एक्टिंग तक ही सीमित नहीं था. उन्होंने ‘प्रहार: द फैइनल अटैक’ फिल्म को डायरेक्ट किया और फिल्म बनाने व लिखने के काम से भी जुड़े रहे, जिससे सिनेमा के अलग-अलग पहलुओं में उनकी दिलचस्पी का पता चलता है. उनके करियर की खासियत यह थी कि वे बिना किसी एक खास इमेज में बंधे, मेनस्ट्रीम फिल्मों और दमदार एक्टिंग वाले प्रोजेक्ट्स के बीच आसानी से तालमेल बिठा लेते थे.

पद्म श्री से सम्मानित हैं नाना

सालों तक सिनेमा में अपने योगदान के लिए पाटेकर को कई बड़े सम्मान मिले. उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले, साथ ही महाराष्ट्र स्टेट फिल्म अवॉर्ड और दूसरे सम्मान भी मिले. 2013 में सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया. पाटेकर सामाजिक कार्यों और ग्रामीण महाराष्ट्र से अपने जुड़ाव के लिए भी जाने जाते थे. वे किसानों और मुश्किल हालात का सामना कर रहे लोगों की मदद करने के कामों में शामिल रहे, जिससे सिनेमा के अलावा उनकी पब्लिक लाइफ का एक और पहलू सामने आया.

निजी जिंदगी में संघर्ष

स्क्रीन से हटकर, पाटेकर की निजी जिंदगी में भी कई संघर्ष थे. उन्होंने 1978 में नीलकांती पाटेकर से शादी की. उनके दो बेटे थे – दुर्वासा और मल्हार. उनके बड़े बेटे दुर्वासा की कम उम्र में ही बीमारी के कारण मौत हो गई. बाद में, निजी मतभेदों के कारण नाना और नीलकांती कई सालों तक अलग-अलग रहे, हालांकि कानूनी तौर पर वे शादीशुदा ही रहे.

याद रहेंगे नाना

एक एक्टर के तौर पर उनके काम ने ही सबसे गहरी छाप छोड़ी. चाहे वे गुस्सैल हीरो का रोल निभा रहे हों, खतरनाक विलेन का, पुलिस अफसर का या किसी कॉमिक किरदार का – पाटेकर अपनी मौजूदगी का एहसास कराने में माहिर थे. वे इंडस्ट्री के ग्लैमर पर निर्भर नहीं रहते थे. उनकी एक्टिंग अक्सर आवाज, बॉडी लैंग्वेज और खामोशी पर आधारित होती थी जो किसी सीन का मूड बदल सकती थी. उनके जाने के बाद भी उनका काम पीढ़ियों और अलग-अलग तरह की फिल्मों में हमेशा याद किया जाएगा.

भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है जिसकी जगह कोई और नहीं ले सकता. नाना पाटेकर भले ही कई तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हों, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि वे एक जबरदस्त कलाकार थे, जिन्होंने अपने हर किरदार में अपनी आवाज, मिजाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी.

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त किया. एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि पाटेकर ने हर भूमिका में विविधता और रचनात्मकता का समावेश किया और उन्हें उनके स्पष्ट और बेबाक विचारों के लिए भी सराहा जाता था. मोदी ने कहा, “बहुत कम अभिनेताओं में वह गहराई, अलग पहचान और खास मौजूदगी थी जो श्री नाना पाटेकर जी में थी. उन्होंने हर भूमिका में अद्भुत विविधता और रचनात्मकता दिखाई और हमें ऐसे किरदार दिए जिन्हें पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा. उन्हें उनके स्पष्ट और बेबाक विचारों के लिए भी पसंद किया जाता था. वे अपनी बात कहने में कभी नहीं हिचकिचाते थे.” प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदी और मराठी सिनेमा में पाटेकर का योगदान बहुत बड़ा था. उनके निधन से एक बड़ी कमी पैदा हुई है. उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ओम शांति.”

सीएम योगी ने नाना के योगदान को याद किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिग्गज अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया और भारतीय सिनेमा तथा सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को याद किया. एक्स पर एक पोस्ट में, योगी आदित्यनाथ ने पाटेकर के निधन को कला की दुनिया के लिए “अपूरणीय क्षति” बताया और सिनेमा तथा समाज में उनके योगदान की सराहना की. योगी ने कहा, “प्रसिद्ध अभिनेता, सशक्त थिएटर कलाकार और संवेदनशील समाज-सेवी, पद्म श्री नाना पाटेकर जी का निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.” उन्होंने कहा कि पाटेकर ने अपनी अभिनय कला से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की. भगवान श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें.”

मन दुख से भरा हुआ है- सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर लिखा, “दिग्गज अभिनेता और मेरे करीबी दोस्त नाना पाटेकर का अचानक और असमय जाना दिल को गहरा सदमा देने वाला है. मन दुख से भरा हुआ है. नाना जितने शानदार पर्दे पर थे, उतने ही शानदार वे असल जिंदगी में भी थे. उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा को एक पूरा दौर दिया. इनमें भी, एक देशभक्त के तौर पर उनकी छवि दर्शकों के दिलों में गहराई तक उतर गई. ‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘नटसम्राट’ तक, अपने सफर में उन्होंने अभिनय का शानदार और बेमिसाल ताना-बाना बुना. इसलिए एक अभिनेता के तौर पर उनका जाना एक बहुत बड़ी क्षति है. किसानों की मदद करना हो या सूखे के समय मदद का हाथ बढ़ाना, नाना हमेशा सबसे आगे रहते थे. इस साल भी, जब हम सूखे का सामना कर रहे हैं, नाना कभी पीछे नहीं हटते, लेकिन वे हमें छोड़ गए. मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. हम उनके परिवार और प्रशंसकों के दुख में शामिल हैं. ओम शांति.”

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, गोवा में दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत

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