Home इतिहास Satyajit Ray Death Anniversary : ‘पाथेर पांचाली’ से सिनेमा जगत पर चलाया अपना जादू, कौन हैं ये बंगाली बाबू?

Satyajit Ray Death Anniversary : ‘पाथेर पांचाली’ से सिनेमा जगत पर चलाया अपना जादू, कौन हैं ये बंगाली बाबू?

by Live Times 23 April 2024, 9:39 AM IST (Updated 14 August 2025, 4:43 PM IST)
23 April 2024, 9:39 AM IST (Updated 14 August 2025, 4:43 PM IST)
Satyajit Ray Death Anniversary

Satyajit Ray Death Anniversary : 23 अप्रैल को भारतीय फिल्म निर्देशक सत्यजित रे की पुण्यतिथि है, इस मौके पर उनकी बहतरीन किताबों के बारे में जान लेते है.

23 April, 2023

Satyajit Ray Death Anniversary : सत्यजीत रे, ये नाम से आप जरूरत वाकिफ होंगे. ‘सहपाठी’ और ‘बंकु बाबू का मित्र’ जैसी कहानियां लिखने वाले मशहूर लेखक को आज भला कौन नहीं जानता. दरअसल, 20वीं शताब्दी के एक बंगाली मोशन-पिक्चर निर्देशक, लेखक और चित्रकार सत्यजीत रे ने अपनी फिल्म पाथेर पांचाली के साथ भारतीय सिनेमा को विश्व स्तर पर एक बड़ी पहचान दिलाई. इसके साथ ही सत्यजीत रे ने साल 1955 में पाथेर पांचाली से निर्देशन की शुरुआत की और 36 फिल्मों का निर्देशन किया, जिसमें 29 फीचर फिल्में, पांच वृत्तचित्र और दो लघु फिल्में शामिल थीं. साथ ही सत्यजीत रे को कई बड़े पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया, जिनमें सिनेमा में भारत का सर्वोच्च पुरस्कार, दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1984) और भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार और भारत रत्न (1992) जैसे कई बड़े पुरस्कार शामिल हैं.

(Who Is Satyajit Ray) कौन थे सत्यजित रे?

सत्यजित रे भारतीय फ़िल्म जगत का वो बड़ा नाम, जिन्हें सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में भी गिना जाता है. इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता के एक बंगाली परिवार में 2 मई, 1921 को हुआ था. इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई. इन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की थी. फ्रांसिसी फ़िल्म देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ. सत्यजित रे ने बांग्ला भाषा के बाल-साहित्य में दो लोकप्रिय चरित्रों की रचना भी की थी, जिसमें गुप्तचर फेलुदा और वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर शंकु शामिल हैं. इन्होंने कई लघु-कथाएं भी लिखीं, जो बारह-बारह कहानियों के संकलन में प्रकाशित होती थीं. ऐसे भी बताया जाता है कि सत्यजित रे की बेतुकी कविताएं लिखने में भी काफी रुचि थी, लेकिन 23 अप्रैल साल 1992 में सत्यजीत रे ने भारतीय सिनेमा जगत को अलविदा कह दिया.

सत्यजित रे की पुण्यतिथी के मौके पर उनकी मशहूर किताबों और फिलमों के बारे में जानते हैं.

Childhood Days

यह किताब बंगाली भाषा में लिखी हुई है. जिसे ट्रांसलेट उनकी पत्नी बिजोय रे ने किया था. यह किताब सिनेमा, फोटोग्राफी, किताबों आदि के प्रति जूनून को बताती है.

The Apu Trilogy

सत्यजीत रे की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक द अपू ट्रिलॉजी है, जिसमें तीन कहानियों का संग्रह है. साथ ही इसमें नायक के जीवन के मुख्य चरणों – बचपन, विवाह और पितृत्व को भी दर्शया गया है.

Our Films, Their Films

फिल्म निर्माता बनने के इच्छुक लोगों के लिए पढ़ना चाहिए, यह फिल्म प्रशंसा में एक अद्भुत अंतर्दृष्टि देता है.

Indigo

अलौकिक कहानियां, छोटी कहानियों का यह संग्रह युवा और बूढ़े को काफी पसंद आएगा.

The Complete Adventures of Feluda

द फुल एडवेंचर्स ऑफ फेलूदा, रे द्वारा लिखी गई विभिन्न लुभावनी और रहस्यपूर्ण कहानियों की एक पुस्तक है. फेलूदा सत्यजीत रे के पसंदीदा जासूसी पात्रों में से एक है.

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