Heatwave in France: फ्रांस इस समय भीषण लू (हीटवेव) की चपेट में है. भीषण गर्मी के कारण देश में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लोग तालाबों, नदियों और गड्ढों में कूद जा रहे हैं, जिससे डूबने से लोगों की मौत हो जा रही है. सरकार ने पूरे देश में इमरजेंसी घोषित कर दी है.देश भर में सैकड़ों स्कूल बंद कर दिए गए हैं. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपातकालीन मीटिंग बुलाई है. 18 जून से अब तक डूबने से 40 युवाओं की मौत हो गई है. इस हीटवेव को लेकर सरकार ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक की है. गर्मी के प्रकोप के चलते पूरे देश में सैकड़ों स्कूलों को बंद कर दिया गया है.
पसीने से तर-बतर हुए लोग
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को बताया कि वीकेंड के बाद से फ्रांस में बिना निगरानी वाले इलाकों में तैरते हुए 40 लोगों की डूबने से मौत हो गई है. मंगलवार को फ्रांस में लाखों लोग भीषण गर्मी वाली रात के बाद पसीने से तर-बतर होकर जागे. देश की ज़्यादातर आबादी बहुत ज़्यादा और असाधारण तापमान का सामना कर रही है, जबकि पिछले पांच दिनों में देश में डूबने से 40 लोगों की मौत हो गई है. तापमान दिन-रात ज़्यादा बना रहेगा क्योंकि राष्ट्रीय मौसम सेवा मेटियो फ्रांस ने 54 विभागों में ‘रेड हीट वेव अलर्ट’ जारी किया है. यह देश का लगभग आधा हिस्सा है.
टूट सकते हैं गर्मी के रिकॉर्ड
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने एक आपातकालीन बैठक के बाद कहा कि पिछले गुरुवार से डूबने से मरने वाले 40 लोग मुख्य रूप से युवा थे. इंसानों की वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन का संबंध लगातार बिगड़ते मौसम से है. संयुक्त राष्ट्र की जलवायु एजेंसी का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में गर्मी के और भी रिकॉर्ड टूट सकते हैं. मेटियो फ्रांस ने कहा कि पूरे फ्रांस में तेज धूप का असर बना हुआ है. भीषण गर्मी के हालात कम से कम इस हफ़्ते के आखिर तक बने रहने की उम्मीद है. कई शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहेगा.
2003 की लू में हुई थी 15,000 लोगों की मौत
मेटियो फ्रांस ने कहा कि आगे भी तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है, जिनमें से कुछ तो साल के किसी भी समय के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं. मौसम विभाग ने कहा कि यह लू (heat wave) बहुत ज़्यादा तेज़ है और गर्मियों की शुरुआत में ही आ गई है, लेकिन यह कितने समय तक चलेगी, यह अभी पक्का नहीं है. इसकी तुलना पहले ही अगस्त 2003 की लू से की जा चुकी है, जब आधी सदी से ज़्यादा समय में सबसे ज़्यादा तापमान के कारण अनुमानित 15,000 लोगों की मौत हुई थी.
इनमें से ज़्यादातर मौत अपार्टमेंट और रिटायरमेंट होम में रहने वाले बुज़ुर्गों की थीं. उस लू के बाद फ्रांस ने ‘हीट वॉच वॉर्निंग सिस्टम’ (लू की चेतावनी देने वाली प्रणाली) शुरू किया था. यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां 1980 के दशक से तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी तेज़ी से बढ़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप कार्यालय ने इस महीने कहा कि पिछले चार वर्षों में पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी वजहों से 200,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई.
ब्रिटेन में हीटवेव का असर
इंग्लिश चैनल के उस पार मेट ऑफिस ने बुधवार और गुरुवार के लिए भीषण गर्मी की ‘रेड वॉर्निंग’ जारी की है. अनुमान है कि जून में तापमान का अब तक का रिकॉर्ड टूट सकता है. दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान लगभग 37°C और दक्षिण-पूर्वी वेल्स में 35°C तक रहने की उम्मीद है. हीटवेव (लू) का सबसे ज़्यादा असर बुधवार और गुरुवार को रहने का अनुमान है, जब अधिकतम तापमान कम से कम 39°C तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग का कहना है कि शुक्रवार तक हालात में सुधार होने की उम्मीद है.
EU की निगरानी एजेंसी ने पाया कि यूरोप और दुनिया भर में 2026 अब तक का सबसे गर्म साल रहा और इस महाद्वीप में हीट स्ट्रेस (गर्मी से होने वाली परेशानी) वाले दिनों की संख्या दूसरी सबसे ज़्यादा रही. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी और सूखे की बारंबारता और तीव्रता बढ़ रही है, खासकर दक्षिण-पूर्वी यूरोप में, जिससे यह इलाका स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर और जंगल की आग के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो गया है.
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News Source: PTI
