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नेपाल में जल प्रलय: मदद को बढ़े हाथ, UN देगा 20 लाख डॉलर, दिल्ली-नेपाल बस सेवा हुई बंद

by Sanjay Kumar Srivastava 27 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 27 August 2026, 9:44 PM IST)
27 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 27 August 2026, 9:44 PM IST)
नेपाल में जल प्रलय: मदद को बढ़े हाथ, संयुक्त राष्ट्र का 20 लाख डॉलर देने का ऐलान, एहतियातन दिल्ली-नेपाल बस सेवा बंद

Nepal Flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद ओडिशा का एक NRI जोड़ा लापता है. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने राहत कार्यों के लिए शुरुआती तौर पर 20 लाख अमेरिकी डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है. उधर, दिल्ली सरकार ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण एहतियात के तौर पर अगले दो दिनों के लिए यानी 28 और 29 अगस्त को ‘इंडो-नेपाल मैत्री बस सेवा’ को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. नेपाल में सभी दलों ने एकजुट होकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में समन्वित बचाव और राहत कार्यों का आह्वान किया है.

पुनर्वास कार्यों के लिए सभी पार्टियां हुईं एकजुट

नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने गुरुवार को काठमांडू में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई. इस बैठक का मकसद विनाशकारी बाढ़ के बाद मिलकर खोज-बचाव अभियान चलाने और राहत कार्यों पर चर्चा करना था. बैठक में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िलों में बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ करने पर ज़ोर दिया गया. राजनीतिक नेताओं ने पार्टियों के बीच एकता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि आपदा पीड़ितों की मदद को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखा जाना चाहिए और इसका इस्तेमाल निजी फ़ायदे के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

ओडिशा का एक NRI जोड़ा लापता

अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद लापता हुए ओडिशा के एक NRI जोड़े का पता लगाने की कोशिशें की जा रही हैं. नेपाल में संकट में फंसे ओडिशा के लोगों की मदद के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी प्रीतिश पांडा ने बताया कि मूल रूप से खुर्दा ज़िले के रहने वाले संदीप महापात्रा और उनकी पत्नी सिद्धार्थ कुमारी साहू 2018 से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं. दोनों हिमालयी देश में बाढ़ आने के बाद से लापता हैं.

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पांडा ने PTI को बताया कि हम उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं. उनके मोबाइल फ़ोन स्विच ऑफ़ मिले. यह जोड़ा पर्यटन स्थलों की यात्रा के लिए 22 अगस्त को ऑस्ट्रेलिया से नेपाल पहुंचा था. संदीप के भाई स्वरूप महापात्रा ने बताया कि संदीप ने 25 अगस्त की शाम को तिब्बत सीमा के पास बस से यात्रा करते समय खुर्दा में अपने परिवार से बात की थी. स्वरूप ने कहा कि हमें 26 अगस्त को तबाही के बारे में जानकारी मिली और तब से हम अपने भाई और भाभी से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस जोड़े का एक बेटा ओडिशा में रहता है.

सभी फुटबॉल खिलाड़ी सुरक्षित

स्वरूप ने ओडिशा और केंद्र सरकार के साथ-साथ नेपाल के अधिकारियों से भी इस जोड़े का पता लगाने की अपील की. इस जोड़े के अलावा अधिकारियों को भुवनेश्वर की एक फुटबॉल टीम के परिवार वालों के भी फोन आए, जो नेपाल गई हुई थी. पांडा ने कहा कि खिलाड़ियों के परिवार वाले परेशान थे क्योंकि बुधवार को उनके मोबाइल फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था. आज हमने उनके कोच से संपर्क किया. वे सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि फुटबॉल खिलाड़ी और उनके कोच बाढ़ प्रभावित इलाके से लगभग 200 किलोमीटर दूर पोखरा में हैं और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की कोशिशें की जा रही हैं. ओडिशा के खेल मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि फुटबॉल खिलाड़ी सुरक्षित हैं और वे बाढ़ प्रभावित इलाके में नहीं हैं. टीम की सुरक्षित वापसी की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है.

ट्रेकिंग के लिए गए 12 लोगों से परिवार का संपर्क नहीं

नोडल अधिकारी ने विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पुरी के रहने वाले राकेश रंजन पांडा और उनके दो साथी, जो बुधवार को नेपाल में थे, गुरुवार सुबह भारत लौट आए. इस बीच, मयूरभंज ज़िले के बारीपदा की एक महिला ने बताया कि वह अपनी 21 साल की बहन से संपर्क नहीं कर पा रही है, जो 22 अगस्त को नेपाल गई थी. कुलसुम की बड़ी बहन ने कहा कि कुलसुम निगारा 22 अगस्त को अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए बिहार बॉर्डर से नेपाल गई थी.

12 लोगों की यह टीम 25 अगस्त को पोखरा इलाके में थी और उस दिन ट्रेकिंग पर गई थी. अचानक आई बाढ़ के बाद से हम निगारा और उसके दोस्तों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. नेपाल में आई ज़बरदस्त बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 332 हो गई है. पड़ोसी देश के अधिकारी हज़ारों लापता लोगों (जिनमें 288 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं) को खोजने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं. यह हाल के सालों में देश की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक है.

UN प्रमुख ने नेपाल आपदा पर जताया दुख

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख जताया है. इस बाढ़ में कई लोगों की जान गई है और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र ने राहत कार्यों के लिए शुरुआती तौर पर 20 लाख अमेरिकी डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है. तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई एक ज़बरदस्त बाढ़ बुधवार को मध्य नेपाल से गुज़री. इसने कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया. कई पुल बहा दिए और एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को ठप कर दिया. बाढ़ का पानी तेज़ी से नीचे की ओर बहते हुए कई ज़िलों में फैल गया. नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ में 332 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और 825 से ज़्यादा लोग (जिनमें 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं) लापता हैं. वहीं, सीमा के दूसरी ओर चीन में तीन लोगों की मौत हुई है और लगभग 560 लोग लापता हैं.

नेपाल पहुंची संयुक्त राष्ट्र की टीम

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि गुटेरेस नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से दुखी हैं, जिसमें कई लोगों की जान गई है, लोग लापता हुए हैं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है. बयान में कहा गया है कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार के नेतृत्व में किए जा रहे राहत कार्यों में मदद कर रहा है. इसमें आपदा के पैमाने का आकलन करना और तुरंत सहायता पहुंचाना शामिल है.

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संयुक्त राष्ट्र की टीमें नेपाल पहुंच गई हैं. मानवीय सहायता देने वाले सहयोगी बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए ज़रूरी सामान और कर्मचारी जुटा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जान बचाने के लिए काम कर रहे इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स की तारीफ़ की और कहा कि यह संस्था आगे भी मदद देने के लिए तैयार है.उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की. उन्होंने प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता दिखाई.

प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी टीमें तैनात

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि नेपाल के रसुवा ज़िले और नुवाकोट ज़िले के निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर है. मानवीय मामलों और इमरजेंसी राहत समन्वयक के लिए संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी जनरल टॉम फ्लेचर ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ को भयावह बताया. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी टीमें तैनात कर दी गई हैं और हालात का जायज़ा लेने के साथ ही और टीमें रिजर्व पर रखी गई हैं. अधिकारियों और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है. मैंने इमरजेंसी मेडिकल केयर, शेल्टर और पानी के ज़रिए जान बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल इमरजेंसी फंड CERF से शुरुआती 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर मंज़ूर किए हैं.

लगभग 10,000 परिवारों को तुरंत राहत की जरूरत

OCHA ने कहा कि नेपाली सरकार राहत और बचाव कार्यों की अगुवाई कर रही है. इसके लिए नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और नेपाल पुलिस को तैनात किया गया है. हेलिकॉप्टर से खोज और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं. नेपाली अधिकारियों के अनुसार, लगभग 10,000 परिवारों को तुरंत राहत की ज़रूरत है. UN एजेंसी ने बताया कि बस्तियां, बाज़ार, सड़कें, पुल और पनबिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे बह गए हैं या उन्हें काफी नुकसान पहुंचा है. साथ ही सड़कें कट गई हैं और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है. जैसे-जैसे बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ रहा है, त्रिशूली नदी के किनारे बसे रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन ज़िलों के लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने के आदेश जारी किए गए हैं.

प्रभावित जिलों को घोषित किया आपदा संकट क्षेत्र

प्रभावित ज़िलों के कुछ हिस्सों को तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहयोगी, रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर लीला पीटर्स याहिया के नेतृत्व में सरकार के नेतृत्व वाले राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दो कर्मचारी पहले से ही वहां मौजूद हैं. उनके पास टेंट और लॉजिस्टिक्स सहायता के अलावा तीन महीने तक 10,000 लोगों के लिए पर्याप्त मेडिकल किट भी उपलब्ध हैं. OCHA ने कहा कि मानवीय सहायता देने वाले सहयोगी भी तैयारी कर रहे हैं.

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‘सेव द चिल्ड्रन’ ने नुवाकोट ज़िले में स्टाफ़ भेजना शुरू कर दिया है, जबकि नेपाल रेड क्रॉस ने 200 इमरजेंसी शेल्टर पैकेज भेजे हैं. UN डेवलपमेंट प्रोग्राम डेटा-मैनेजमेंट में मदद और UN वॉलंटियर्स को जुटा रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ज़रूरतें साफ़ होती जाएंगी, मानवीय सहायता समुदाय अतिरिक्त मदद देने के लिए तैयार रहेगा. UN आपदा के पैमाने का तेज़ी से आकलन करने की कोशिशों में भी मदद कर रहा है. रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर और OCHA का एशिया और प्रशांत क्षेत्र का कार्यालय बाढ़ से प्रभावित इलाकों की सैटेलाइट तस्वीरें और उनका विश्लेषण हासिल करने में मदद कर रहे हैं.

28 और 29 अगस्त को भारत-नेपाल बस सेवा रुकी

गुरुवार को जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार, दिल्ली सरकार ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण एहतियात के तौर पर अगले दो दिनों के लिए ‘इंडो-नेपाल मैत्री बस सेवा’ को अस्थायी रूप से रोक दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में भीषण बाढ़ के कारण अभी दिल्ली-काठमांडू रूट पर नेशनल हाईवे पर सड़क परिवहन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.

दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के आदेश में कहा गया है कि इसे देखते हुए और एहतियात के तौर पर, नेपाल में भीषण बाढ़ के कारण 28 अगस्त को दिल्ली से काठमांडू और काठमांडू से दिल्ली जाने वाली DTC बसों की यात्राओं और इसी तरह 29 अगस्त को नेपाली बस की यात्रा को रोक दिया गया है. दिल्ली सरकार ने 2014 में दिल्ली-काठमांडू-दिल्ली अंतरराष्ट्रीय बस सेवा शुरू की थी. ये बसें सुबह 10 बजे दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना होती हैं और गोरखपुर के पास सोनौली चेकपोस्ट से नेपाल में प्रवेश करने से पहले उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती हैं.

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