British PM Resign : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि है जब तक इस पद के लिए नया उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता है वह इस पद पर बने रहेंगे. वहीं, 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र के नाम संबोधन में स्टार्मर ने कहा कि मेरी पार्टी को नहीं लगता है कि मैं अगले चुनाव में उनका नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं. दूसरी तरफ स्टार्मर का इस्तीफा एक ऐसे समय में आया है जब उनकी पार्टी के 400 सांसदों में से 100 से ज्यादा सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सांसदों ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि स्टार्मर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दें या फिर वह तारीख तय करके इस्तीफा संसदों को सौंप दें.
10 सालों में छठे प्रधानमंत्री हैं कीर स्टार्मर
स्टार्मर बीते 10 सालों में अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले प्रधानमंत्री छोड़ने वाले छह प्रधानमंत्री हैं. इससे पहले डेविड कैमरून, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस इस्तीफा दे चुके हैं. हालांकि, ऋषि सुनक भी अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उन्हें इस्तीफा उस वक्त देना पड़ा जब कंजर्वेटिव पार्टी की चुनाव में हार हो गई थी.
आपको बताते चलें कि स्टार्मर ने यह भी साफ कर दिया है कि लेबर पार्टी जुलाई मध्य तक अपना नेता चुन लेगी. साथ ही नए नेता चुनने तक वह देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका निभाते रहेंगे. स्टार्मर ने यह भी बताया कि उन्होंने सोमवार को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय को अपने इस्तीफे का बारे में जानकारी दे दी थी. दूसरी तरफ अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन करेगी और उसमें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर देगी.
जुलाई के मध्य में चुन लिया जाएगा पार्टी का नेता
वहीं, 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले ग्रीष्मकाल अवकाश से पहले नए नेता का ऐलान कर दिया जाएगा. बता दें कि ब्रिटेन में जनता डायरेक्ट प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करती है. वह अपने सांसदों को चुनती है और जिस भी पार्टी के पास सांसदों की संख्या अधिक होती (बहुमत) है वह अपना मुख्य नेता चुनती है और बाद में उसको ही प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई जाती है. वर्तमान में लेबर पार्टी के पास बहुमत है और वह जिस भी नेता को चुनेगी वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा. कीर स्टार्मर के इस्तीफा के साथ ही दुनिया भर में यह बहस छिड़ गई है कि क्यों बीते दस सालों में पांच प्रधानमंत्रियों को अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले इस्तीफा सौंपना देना पड़ा.
जानें कब किसका कितना रहा कार्यकाल
डेविड कैमरन (मई 2010-जुलाई 2016)
6 साल 2 महीने तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे डेविड कैमरन ने कंजर्वेटिव पार्टी के भीतर मतभेदों का समाधान निकालने के लिए खुद ही ब्रेक्जिट जनमत संग्रह करवाया था. इसके बाद 23 जून 2016 को 52 प्रतिशत वोटों के साथ ब्रिटेन की जनता ने यूरोपियन यूनियन (EU) से बाहर निकलने का फैसला किया. वहीं, कैमरन ईयू में बने रहना चाहते थे और जनता ने उनका फैसला पलट दिया. इसके अगले ही दिन 24 जून, 2016 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, उनका कार्यकाल 2020 में पूरा होना था.
थेरेसा मे (जुलाई 2016-जुलाई 2019)
तीन साल तक प्रधानमंत्री पद पर बनी रही थेरेसा मे को सबसे मुश्किलों कामों में से एक EU से बाहर निकलना का जिम्मा सौंपा गया. उन्हीं के कार्यकाल में EU के साथ एक ब्रेक्जिट समझौता तैयार किया गया. लेकिन पार्लियामेंट में इस प्रस्ताव को तीन बार खारिज कर दिया गया. उस वक्त सांसदों को लगा कि यह समझौता ब्रिटेन से अधिक यूरोप के पक्ष में है. उस दौरान सांसदों को इस प्रस्ताव में यूरोप का हित ज्यादा लगा, ऐसे में भारी दबाव के बीच थेरेसा मे ने भी 24 मई 2019 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
बोरिस जॉनसन (जुलाई 2019-सितंबर 2022)
बोरिस जॉनसन 3 साल 2 महीने तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहे थे. उन्होंने ब्रेक्जिट को पूरा करने का जनता से वादा किया था और इसके बाद वह चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. लेकिन इसी बीच कोविड-19 महामारी और पार्टीगेट (लॉकडाउन के दौरान डाउनिंग स्ट्रीट में पार्टियां) ने उनकी लोकप्रियता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था. इसी कड़ी में उन्होंने भी 6 सितंबर 2022 को पार्टी के नेताओं के दबाव में आकर पीएम पद से इस्तीफा दे दिया.
लिज ट्रस (सितंबर 2022-अक्टूबर 2022)
ब्रिटिश राजनीतिक इतिहास में सबसे ज्यादा छोटा प्रधानमंत्री कार्यकाल लिज ट्रस का रहा. उन्होंने 44 दिनों तक इस पद पर रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई. उनके बजट के दौरान वित्तीय बाजारों में हड़कंप मच गया था. इसके बाद पाउंड की कीमत गिर गई और बॉन्ड बाजार पर भी संकट आ गया. इसी बीच 20 अक्टूबर, 2022 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.
ऋषि सुनक (अक्टूबर 2022-जुलाई 2024)
भारतीय मूल ऋषि सुनक भी 1 साल 9 महीने तक इस पद पर रहते हुए देश की सेवा की थी और उन्होंने इस दौरान आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए कई योजनाओं को भी लागू किया था. हालांकि, इसी बीच महंगाई और कॉस्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस की वजह से कंजर्वेटिव पार्टी का उनसे भरोसा उठ गया था. वहीं, जुलाई 2024 में ब्रिटेन के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को लेबर पार्टी से बुरी हार का सामना करना पड़ा. साथ ही चुनाव में हार के बाद ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया.
कीर स्टार्मर (जुलाई 2024-जून 2026)
बहुमत से जीत मिलने के बाद लेबर पार्टी ने कीर स्टार्मर को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया. हालांकि, इसी बीच उन्हें अर्थव्यवस्था, इमिग्रेशन, स्वास्थ्य सेवा सुधार, टैक्सेशन और वेलफेयर फॉर्म जैसी नाकामियों ने चौतरफा घेर लिया. इसके अलावा उनके साथ पीटर मैंडेलसन-जेफ्री एपस्टीन विवाद भी जुड़ गया. आखिरकार उन्हें 22 जून, 2026 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
क्यों दिया 5 प्रधानमंत्रियों ने इस्तीफा?
विशेषज्ञों ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यकाल पूरा नहीं होने से पहले इस्तीफे कई कारण बताए हैं. इसमें सबसे प्रमुख वजह संसदीय व्यवस्था को बताया है. हालांकि, इसके अलावा और वजह भी हैं जिनकी वजह से प्रधानमंत्री पर सीधा दबाव बनता है और वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे देता है. आईए एक-एक करके पढ़ें कि वह क्या मुख्य वजह हैं…
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संसदीय व्यवस्था
ब्रिटेन में अमेरिका की तरह व्यवस्था नहीं है, जहां पर राष्ट्रपति को सीधे जनता चुनती है. ब्रिटेन में प्रधानमंत्री तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक उसे सांसदों और पार्टी का समर्थन प्राप्त होता है. अगर सांसदों को लगता है कि प्रधानमंत्री की जनता के बीच लोकप्रियता कमजोर होती जा रही है तो और यह भविष्य में पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा सकती है तो वह बिना आम चुनाव कराए ही, अपने नेता को बदल देते हैं.
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पार्टी के नियमों भी जटिलता
बीते कई दशकों में पार्टी के नियमों बड़े बदलावों की वजह से वरिष्ठ नेताओं को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कंजर्वेटिव पार्टी में 15 प्रतिशत सांसद अगर पत्र भरकर असहमति जता दें तो अविश्वास प्रस्ताव ट्रिगर हो जाता है. वहीं, लेबर पार्टी में 20 फीसदी सांसदों के विरोध के बाद प्रधानमंत्री को बड़ी चुनौती मिलने लग जाती है. साथ ही मीडिया के भारी दबाव के बीच प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ जाता है.
फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट एक्ट खत्म होना
वहीं, साल 2011 तक देश में फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट एक्ट संसद के कार्यकाल को तय करता था और इसके कारण राजनीतिक स्थिरता बनी हुई थी. लेकिन इस एक्ट को खत्म कर दिया गया और इसके बाद से ही प्रधानमंत्री को राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता रहता है. आलोचकों का कहना है इस एक्ट के खत्म होने की वजह से देश में प्रधानमंत्री के कार्यकाल छोटे हो गए और देश में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है.
ब्रेक्जिट का सपना बना डरावना
साल 2016 में आया ब्रेक्जिट जनमत संग्रह प्रधानमंत्री के ऊपर आकाल बनकर टूट पड़ा. ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में ब्रिटेन की जनता से पूछा जाता है कि EU में बना रहना है या फिर इससे बाहर निकल जाना है? जनता ने उस वक्त यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने वाले फैसले पर अपनी सहमति जाहिर की. इस संग्रह के बाद ब्रिटेन की राजनीति और अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इसी बीच वोटर्स महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं और कराधान जैसे मुद्दों के समाधान निकालने की बात करने लगे और राजनीतिक पार्टियों में भारी दबाव आने लगा. इसके बाद पार्टियां तत्काल इनके समाधान नहीं निकल पाई और उसके मुख्य नेता पर रिजाइन देने का दबाव बनने लगा.
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एंडी बर्नहम ने पेश की दावेदारी
कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम ने लेबर पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री की इस्तीफा दावेदारी पेश कर दी है. बर्नहम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट में कहा कि सत्ता सौंपने की जिम्मेदारी को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह इस पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. इसके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी उनका समर्थन किया है और बताया जा रहा है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे आगे हैं. इसके अलावा बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव संसद में वापसी की है और इसी बीच लेबर पार्टी के सांसदों का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है. ऐसे में कहा जा रहा है कि बर्नहैम को ही प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
दूसरी तरफ एंडी बर्नहैम ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय हैं. साथ ही उन्हें लेफ्ट और सेंटर दोनों गुटों से भी समर्थन प्राप्त है. बर्नहैम इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई पदों पर अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं. कोविड महामारी के दौरान मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खूब टक्कर ली थी. उस उनकी छवि आम जनता के लिए लड़ने वाले नेता के रूप में बन गई थी. वहीं, वह केंद्रीय राजनीति में सबसे चर्चित चेहरों में से एक बन गए थे. अब मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति पहले ज्यादा मजबूत हो गई है.
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