Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों और दावों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. वे जब से दूसरी बार अमेरिका के प्रेसिडेंट के रूप में कार्यभार संभाले हैं, तब से कुछ न कुछ ऐसे कदम उठाते रहे हैं, जिससे उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. इनकी ये आलोचनाएं केवल दूसरे देशों में नहीं बल्कि अमेरिका में भी होती है. कई बार इनकी पार्टी ‘रिपब्लिकन पार्टी’ में भी इनके कुछ फैसलों पर असहमति दिखती है. इनमें से टैरिफ का भी एक मुद्दा शामिल है.
खैर, हम यहां बात ट्रंप के उन दावों और बातों की कर रहे हैं, जिनकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति को कई बार इंटरनेशनल बेइज्जती का सामना करना पड़ा है. ताजा मामला इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को लेकर किए गए दावे का है. जी हां, चाहें भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की बात हो या फिर मेलोनी की उनके साथ फोटो खिंचवाने या राजनीतिक लोकप्रियता पर झूठे सवाल करने के मामले हों, ट्रंप हर बार अपने दावे पर कमजोर दिखे हैं और कई बार उन्हें पीछे भी हटना पड़ता है. ट्रंप की इन हरकतों से लोगों के मन में यही सवाल उठता है कि अमेरिका जो एक महाशक्तिशाली देश माना जाता है, उसके राष्ट्रपति की ऐसी हरकतें इस पद की गरिमा को कितना ठेस पहुंचा रही हैं?
अब हम बात ट्रंप के कुछ उन बयानों और कदमों की करेंगे, जिसकी वजह से दुनिया को परेशानी हुई और ट्रंप की बेइज्जती हुई. इसकी शुरुआत ट्रंप के द्वारा इटली की पीएम मेलोनी पर दिए बयान से करेंगे.
मेलोनी मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं- ट्रंप
हाल ही में 15 से 17 जून के बीच फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था. इसमें जी7 सदस्य देशों के अलावा विशेष आमंत्रण पर भारत, यूक्रेन भी शामिल हुए थे. इटली, जो इस ग्रुप का सदस्य है, उसकी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी भी जी7 समिट में शामिल होने फ्रांस आईं थी. इस दौरान ट्रंप ने उन्हें लेकर दावा किया कि इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ट्रंप के साथ फोटो खिंचवाने के लिए बार-बार अनुरोध कर रही थीं. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को लेकर कहा, “उन्होंने मुझसे तस्वीर लेने की गुजारिश की थी. वह मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं. मैं तस्वीर नहीं खिंचवाता. लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया.”
ट्रंप के इस दावे और बयान पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी/जियोर्जिया मेलोनी ने पलटवार करते हुए सख्त अंदाज में जवाब दिया था. मेलोनी ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह मनगढ़ंत हैं. मुझे हैरान हुई है. मुझे नहीं मालूम कि अमेरिकी राष्ट्रपति सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं. वैसे भी यह पहली बार नहीं है.”
मेलोनी ने आगे कहा था, “मैं सिर्फ इतना कह सकती हूं कि यह निराशाजनक है कि वह पश्चिम और अमेरिका के दुश्मनों के प्रति दृढ़ता से पेश नहीं आते. एक बात उन्हें याद रखनी चाहिए. न मैं और न ही इटली कभी किसी से गुजारिश करता है.”

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खुद की लोकप्रियता पर ध्यान दें- मेलोनी
फोटो खिंचवाने वाले दावे के बाद मेलोनी ने ट्रंप को अपना जवाब भी दे दिया था, लेकिन ट्रंप अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और एक बार फिर से उन्होंने इटली की पीएम को निशाना बनाया और इस बार उनकी लोकप्रियता पर ही सवाल खड़े कर दिए.
जी हां, अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की राजनीतिक लोकप्रियता पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री इटली में अपनी लोकप्रियता के स्तर के मामले में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हैं. ट्रंप ने उनपर आरोप लगाते हुए कहा कि मेलोनी ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या विकसित करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन नहीं किया.
ट्रंप के इस दावे और आरोप पर मेलोनी ने फिर से जवाब दिया. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर जारी अपने एक बयान में कहा कि ट्रंप लगातार और बिना किसी उकसावे के किए जा रहे हमले बिल्कुल बेमतलब हैं. मेलोनी ने आगे कहा, “जहां तक मेरी लोकप्रियता का सवाल है, आपका दोस्त होना निश्चित तौर पर इसे बढ़ाने में मददगार नहीं रहा है और न ही यह आपसे मेरे संबंधों पर निर्भर करता है.” जियोर्जिया मेलोनी ने ट्रंप को यहां तक कह दिया, “मेरी लोकप्रियता आपकी चिंता का विषय नहीं है. मेरा सुझाव है कि आप अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दें.”
चुनाव हारने के बाद धांधली का दावा
रिपबल्किन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप पहली बार जनवरी 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे. वे इस पद पर 20 जनवरी 2017 से 20 जनवरी 2021 तक रहे थे. साल 2020 में हुए चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. तब डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने उन्हें हराया था.
हार से बौखलाए ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप लगाने लगे. उन्होंने चुनाव में वोटिंग, वोटिंग मशीनों में हेराफेरी और बाइडेन की पार्टी पर धांधली के साथ धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे. ट्रंप ने दावा किया था कि वोटरों की संख्या से अधिक वोट पड़े हैं. उन्होंने इसके लिए वोटिंग मशीन में हेराफेरी के आरोप लगाए थे.
हारने के बाद ट्रंप के समर्थकों में भी काफी गुस्सा दिखा था. उन्होंने राजधानी वाशिंगटन डीसी में स्थित कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद) को निशाने पर लिया और उसपर हमला कर दिया. भीड़ इतनी थी कि कैपिटल हिल इससे ढंका हुआ नजर आ रहा था. इस दौरान हिंसा और तोड़फोड़ भी की गई थी. ट्रंप के समर्थक जबरन अमेरिकी संसद में घुस गए थे और तोड़फोड़ शुरू कर दी थी. इस दौरान ट्रंप के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की भी खबर सामने आई थी, जिसमें दोनों पक्षों से कई लोग जख्मी हुए थे. मामला इतना बढ़ गया था कि पुलिस प्रशासन को शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ गया था.
इस हिंसा और ट्रंप के द्वारा चुनाव में धांधली के आरोपों की जांच की गई. हिंसा की घटना में हुई जांच में ट्रंप के कई समर्थकों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए. वहीं, ट्रंप के द्वारा चुनाव में धांधली के आरोपों व दावों की जांच में पता चला कि ऐसी कोई हरकतें नहीं हुई हैं. ट्रंप के चुनाव में धांधली के आरोपों को अमेरिकी न्याय विभाग और वहां के कई कोर्ट ने एक सिरे से खारिज कर दिया.

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ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप का दावा
बता दें कि बीते साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पाकिस्तान की शह पर पाले गए कायर आतंकियों ने भारतीय पर्यटकों पर हमला कर दिया था. इस हमले के दौरान निहत्थे लोगों को आतंकियों ने उनका धर्म पूछकर (हिंदू होने पर मारा) बेरहमी से मारा था. इस कायराना आतंकी हमले में 25 भारतीय समेत एक नेपाली नागरिक (पर्यटक) की मौत हुई थी.
इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंक और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर दिया. इसका आगाज भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 6-7 मई 2025 की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में बनाए गए आतंकी ठिकानों पर जोरदार हमले कर के किया गया. भारत की इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे और उनके कई लॉन्चपैड और ठिकाने नष्ट कर दिए गए थे.
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने ब्रम्होस समेत कई ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिससे पाकिस्तान की सेना घुटने पर आ गई. खुद पाकिस्तानी सेना के DGMO (Director General of Military Operations) ने भारतीय सेना के DGMO को फोन करके यह निवेदन किया था कि कृपया इस ऑपरेशन को रोक दिया जाए. उसके बाद भारत ने अपनी इस कार्रवाई को रोका. लेकिन इस बीच अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत पाकिस्तान के इस संघर्ष को रुकवाया.

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भारत-पाक के बीच सीजफायर कराने का दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक तौर पर कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाक के बीच जारी युद्ध का सीजफायर कराया. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने व्यापारिक प्रेशर और टैरिफ की धमकी देकर दोनों देशों के बीच सीजफायर करवाया था.
इतना ही नहीं ट्रंप ने यहां तक दावा कर दिया था कि अगर वे भारत और पाकिस्तान के बीच इस युद्ध में हस्तक्षेप नहीं करते तो दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था. यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जान तक जा सकती थी. ट्रंप ने कहा था कि उनके हस्तक्षेप के बिना पाक पीएम शरीफ निश्चित तौर पर मारे जाते.
भारत ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
वहीं, ट्रंप के इन दावों को भारत ने हमेशा खारिज किया है. भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर पर किसी तीसरे देश की भूमिका को एक सिरे से खारिज कर दिया था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने दुनिया के सामने यह साफतौर पर कहते हुए स्पष्ट किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करने या किसी भी तनाव को कम करने में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी.
भारत के इस पलटवार से ट्रंप की ग्लोबल स्तर पर एक तरह से बेइज्जती हुई थी. भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित करने पर कहा था कि ऑपरेशन के दौरान भारत, पाकिस्तान पर जमीन, आसमान और पानी के जरिए से हर तरह का जवाब देने लगा. भारतीय सशस्त्रों बलों की चौतरफा कार्रवाई से पाकिस्तान और उसकी सेना घबरा गई. इस भारी क्षति से आहत होकर, पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय डीजीएमओ को फोन किया और युद्ध को समाप्त करने का आग्रह किया. तब जाकर भारत ने अपने ऑपरेशन को रोका. दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी कि दोनों पक्ष 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में किसी भी प्रकार की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोक देंगे.
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टैरिफ पर भी ट्रंप की फजीहत
बीते साल ट्रंप ने भारत सहित दुनिया के कई देशों पर मनमाने तरीके से 50 फीसदी तक का टैरिफ लगाया था. उनकी इस टैरिफ नीति की दुनिया भर में आलोचना हुई थी और उनकी फजीहत भी हुई थी. उसके बाद 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. कोर्ट ने आदेश दिया कि 24 जुलाई 2026 तक सभी देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लागू रहेगा. भारत पर भी 10 फीसदी का ही टैरिफ लागू है. कोर्ट के इस आदेश के बाद ट्रंप को बड़ा झटका लगा था.
हमने यहां देखा कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे दावे और फैसले किए, जिसपर उनकी केवल आलोचना ही नहीं हुई बल्कि इंटरनेशनल बेइज्जती भी हुई. उन्होंने अपने फैसलों से दुनिया के कई देशों को परेशान कर दिया. ताजा मामलों में वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठवाना और अमेरिका लाना, ईरान पर हमला आदि शामिल हैं. ट्रंप के व्यवहार और दावे से दुनिया के कई जानकार चिंतित हैं. उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि आने वाले समय में पता नहीं ट्रंप और क्या-क्या करेंगे और कैसे-कैसे फैसले लेंगे.
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पहली बार 20 जनवरी 2017 को अमेरिका के राष्ट्रपति (45वें राष्ट्रपति) के रूप में शपथ ग्रहण किए थे. उसके बाद के चुनाव में उनकी हार हुई थी. लेकिन साल 2024 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप एक बार फिर से जीते और 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. यूएस में प्रेसिडेंट का कार्यकाल 4 वर्षों का होता है. ट्रंप का यह दूसरा कार्यकाल 20 जनवरी 2029 में समाप्त होगा.
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