Spain Migrants : स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा की सीमा पर 30 जुलाई को अजीब सा संकट पैदा हो गया. हजारों प्रवासी मोरक्को से समुद्र के रास्ते स्यूटा पहुंच गए. यह साल 2021 के बाद स्पेन में अब तक का सबसे बड़ा प्रवासी संकट माना जा रहा है. इस घुसपैठ ने स्थानीय पुलिस को बेबस कर दिया और अफ्रीका के साथ यूरोपीय संघ की एकमात्र भूमि सीमा पर सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है. वहीं, स्यूटा के प्रेसिडेंट जुआन जीसस विवास का कहना है कि पिछले 24 घंटों में मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी स्पेन के स्यूटा में दाखिल हुए हैं. यह संख्या शहर की आम आबादी के 70 प्रतिशत के बराबर है. इस दौरान कम से कम 34 प्रवासियों की मौत हो गई है. विवास ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान में स्यूटा जिस स्थिति से गुजर रहा है, वह बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं है. साथ ही शुक्रवार को यह संकट और बढ़ा गया जब मोरक्को से आने वाले प्रवासियों की भिड़ंत सुरक्षा बलों से हो गई. इसी बीच स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने स्यूटा में सीमा के उल्लंघन की निंदा की और इस घटना को ‘स्पेन की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन’ बताया.
इस कारण कर रहे आम लोग प्रवास!
आपको बताते चलें कि उत्तर अफ्रीका में स्थित स्यूटा शहर स्पेन के अधीन है. वह अफ्रीकी महाद्वीप का हिस्सा होने के बाद भी स्पेन का पार्ट है. साथ ही स्यूटा मोरक्को की सीमा से भी लगा हुआ है. यही वजह है कि आम लोग इसको यूरोप में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण रास्ता मानते हैं. ये लोग मोरक्को से यूरोप में बेहतर नौकरी, आय और जीवन स्तर की तलाश में एक नया रास्ता तैयार कर रहे हैं. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि स्यूटा में इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं, जब स्पेन और मोरक्को के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा है. हालांकि, इस बार इतने बड़े पैमाने पर लोगों के अचानक पहुंचने का सटीक कारण अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है. यहां पर बड़ी संख्या में लोगों के प्रवेश ने पूरे यूरोप में प्रवासन और सीमा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.

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34 लोगों की हो चुकी है मौत
स्पेन के नेता ने मानव तस्करों को दोषी ठहराते हुए कहा कि वे बहुत से युवाओं को धोखा देते हैं और आखिरकार उनमें से कई की मौत का कारण बनते हैं. जैसा कि इस मामले में हुआ है. वह लोग यूरोप का सपना दिखाकर स्यूटा में घुसने की सलाह दे रहे हैं और अभी तक 34 लोगों की भी मौत हो चुकी है. एक लाइव फुटेज में सैकड़ों प्रवासियों को स्यूटा के पास एक पहाड़ी पर जमा होते हुए देखा गया. इस दौरान मोरक्को के सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़कर तितर-बितर किया और अन्य लोग तैरकर स्पेन के स्वायत्त इलाके में पहुंचते रहे. इसी बीच बड़ी संख्या में प्रवासी स्यूटा से मोरक्को की ओर पैदल भी अपने घर लौट दिखे. दूसरी तरफ सिविल गार्ड अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थानीय कर्मचारी संघ के प्रमुख रशीद स्बिही ने इस स्थिति को ‘गंभीर मानवीय संकट’ बताया है. उन्होंने कहा कि हजारों प्रवासी पार्कों और फुटपाथों पर सोने को मजबूर थे. साथ ही दूसरे लोग बिना किसी मकसद के सड़कों पर घूम रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अभी भी आ रहे हैं. इसके अलावा स्पेनिश सेना के जवानों समेत जो अतिरिक्त बल पहुंचा है, वह सिर्फ घायलों की मदद और मानवीय कार्यों में ही सहायता कर रहा है.
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नौकरी की तलाश में स्यूटा पहुंचे
स्बिही ने बताया कि मरने वाले 34 लोगों में से कई डूब गए. लेकिन कुछ लोग मोरक्को के साथ बॉर्डर चेकपॉइंट के पास मौजूद शहरी और ताराजल बीच पर ब्रेकवॉटर फेंस को पार करने की कोशिश में मारे गए. मोरक्को के 33 साल के अहमद करीम ने बताया कि उन्होंने अपने देश में नौकरी न होने की वजह से स्यूटा में घुसने की कोशिश की थी. करीम ने आगे कहा कि बहुत से लोग यूरोप या अमेरिका जाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पाता है. मोरक्को में मानवाधिकार समूहों के अनुसार, मोरक्को की पुलिस ने प्रवासियों को स्यूटा में घुसने से रोकने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए और वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया. साथ ही चेतावनी के लिए हवा में गोलियां भी चलाई गईं. मोरक्को के शहर फनिदेक में मानवाधिकार कार्यकर्ता अशरफ मैमौनी ने कहा कि पुलिस की भारी मौजूदगी के बावजूद लोगों ने जलमार्ग से सीमा पार की, जबकि जमीनी सीमा बंद रही. उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर पकड़े गए प्रवासियों को स्यूटा से दूर मोरक्को के अंदरूनी इलाकों में ले जाया गया. स्पेन में मोरक्को की राजदूत करीमा बेन्याइच ने उम्मीद जताई कि जो लोग मोरक्को से स्यूटा में गए हैं, वे सभी वापस देश लौट जाएं. बेन्याइच ने कहा कि हमने हमेशा कानूनी, व्यवस्थित और सुरक्षित माइग्रेशन को प्राथमिकता दी है. हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की कि वह किन कारणों की वजह से मोरक्को से स्यूटा पहुंचे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हुए प्रेरित
वहीं, ज्यादातर प्रवासी स्पेनिश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से प्रेरित हुए हैं, जिसमें कहा गया था कि समुद्र के रास्ते आने वाले लोगों को तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता. हालांकि, जमीन या बॉर्डर की बाड़ पार करके आने वालों को तत्काल वापस भेजा जा सकता है. इसी बीच सांचेज ने कहा कि प्रवासी तस्करों ने फैसले का गलत मतलब निकाला, लेकिन उन्होंने माना कि इस फैसले की वजह से भी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की यह व्याख्या पिछले कुछ घंटों में मानव तस्करी करने वाले संगठनों के नेटवर्क के जरिए तेजी से फैली. बता दें कि बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में या अपने देशों में हिंसा से बचने के लिए यूरोप आने वाले प्रवासियों के लिए स्पेन एक मुख्य प्रवेश बिंदु है. उत्तरी अफ्रीकी तट पर स्थित स्यूटा पर पहुंचने के लिए मोरक्को से लोग तैरकर पहुंच जाते हैं. दूसरी तरफ सांचेज ने उस माइग्रेशन-विरोधी ट्रेंड के उलट काम किया है जो पूरे यूरोप और अमेरिका में तेजी से बढ़ रहा है. ट्रंप प्रशासन और दूसरे यूरोपीय देशों ने अपनी सीमाओं को और कड़ा कर दिया है और लोगों को देश से बाहर निकालने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं. स्पेन ने इस साल की शुरुआत में उन लाखों प्रवासियों को रेजिडेंसी और वर्क परमिट देने का फैसला किया, जो पहले से ही देश में रह रहे हैं.

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विरोधी ने की सांचेज के फैसले की आलोचना
सांचेज का तर्क था कि यह स्पेन की अर्थव्यवस्था और वहां की बूढ़ी होती आबादी के लिए अच्छा होगा. लेकिन 1 जनवरी, 2026 के बाद बिना सही कागजात के आए प्रवासियों को इसमें शामिल नहीं किया गया था. लेकिन उनके आलोचकों ने भारी संख्या में आ रहे प्रवासियों की तस्वीर दिखाकर खुलकर आलोचना की. उनका कहना था कि इससे और ज्यादा प्रवासियों को स्पेन में आने का बढ़ावा मिला है. स्पेन की कंज़र्वेटिव नेता इसाबेल डियाज़ आयुसो ने X पर लिखा कि सांचेज स्यूटा के जरिए स्पेन पर कब्जे की स्थिति बनने दे रहे हैं. सांचेज ने प्रवासियों को कानूनी दर्जा देने की अपनी पहल को स्यूट में हो रही घटनाओं से अलग बताया है. इसके अलावा इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने स्पेन के साथ इटली के ओपन-बॉर्डर शेंगेन समझौते को सस्पेंड करने की धमकी दी है. उन्होंने यह बयान अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए दिया है. हालांकि, इटली की सीमा स्पेन से नहीं लगती है और इटली खुद भी हर साल उत्तरी अफ्रीका से भूमध्य सागर पार करके आने वाले हजारों प्रवासियों के लिए एक मुख्य एंट्री पॉइंट है. फ्रांस के इंटीरियर मिनिस्टर लॉरेंट नुनेज ने कहा कि फ्रांस स्पेन के साथ बॉर्डर पर चेकिंग और मजबूत करेगा. उन्होंने X पर लिखा कि देश में रैपिड इंटरवेंशन बॉर्डर फोर्स को एक्टिवेट कर दिया है.

तस्करों ने इस फैसले का गलत फायदा उठाया
मेलोनी के ऐलान के बाद गुरुवार देर रात स्पेन की सरकार ने एक बयान में जारी किया. बयान में कहा गया कि स्यूटा में चल रहे इस संकट का स्पेन सरकार द्वारा प्रवासियों को रेगुलर करने के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है, जैसा कि कुछ लोग गलत दावा कर रहे हैं. सरकार ने मैड्रिड में इटली के राजदूत को भी तलब किया. स्पेन सरकार ने कहा कि यह संकट सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या से पैदा हुआ है, जिसके मुताबिक जो लोग गैर-कानूनी तरीके से तैरकर बॉर्डर पार करते हैं. उन्हें वापस नहीं भेजा जा सकता है. सरकार ने आगे कहा कि तस्करों ने इस फैसले का गलत फायदा उठाया है और वे कमजोर प्रवासियों का फायदा उठाते हैं. मोरक्को में कुछ एक्टिविस्ट ने इस बात पर शक जताया कि इस फैसले की वजह से प्रवासियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. उनका तर्क है कि ज्यादातर प्रवासियों को ऐसे कानूनी फैसलों के बारे में जानकारी नहीं होगी. इसके अलावा मोरक्को से आए प्रवासियों ने स्पेन एक दूसरे मेलिला इलाके में भी कोशिश की, यह भी उत्तरी अफ्रीका के सिरे पर स्थित है. अब स्थानीय मीडिया बता रहा है कि स्यूटा की सीमा से सटे मोरक्को के शहर ‘बनी नस्र’ में भारी अफरातफरी मच गई है. यहां पर प्रवासियों की पुलिस के साथ झड़प हुई, जिसमें उन्होंने पत्थर फेंके और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी. साथ ही सुरक्षा बलों के कई जवान घायल हुए और सीमा पार करने की कोशिश कर रहे दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया.
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