Patola Saree: फैशन की दुनिया में इन दिनों एक अलग ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है. वैसे भी, अब लोग सिर्फ नए ट्रेंड्स के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि अपने कल्चर और ट्रेडिशन को स्टाइल का हिस्सा बना रहे हैं. यही वजह है कि हैंडलूम और ट्रेडिशनल बुनाई वाली साड़ियों की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ रही है. इन्हीं में सबसे खास नाम है पाटन पटोला साड़ी का, जो अपनी बारीक कारीगरी, खूबसूरत कलर और शानदार डिजाइन के लिए दुनियाभर में फेमस है. एक टाइम था जब पाटन पटोला साड़ी सिर्फ शादियों और बड़े फंक्शन में ही पहनी जाती थी. लेकिन अब बदलते फैशन के साथ इसकी स्टाइलिंग भी बदल गई है. आज की लड़कियां इसे सिर्फ ट्रेडिशन नहीं, बल्कि फ्यूजन और मॉडर्न लुक के साथ भी कैरी कर रही हैं. यही वजह है कि ये सदियों पुरानी साड़ी आज भी उतनी ही स्टाइलिश लगती है.
पटोला साड़ी की खासियत?
गुजरात के खूबसूरत शहर पाटन में बनने वाली पटोला साड़ी भारत की सबसे रेयर और बेहतरीन हैंडलूम बुनाई में गिनी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी डबल इकत टेक्निक. इस टेक्निक में साड़ी बुनने से पहले ताने (Warp) और बाने (Weft) दोनों के धागों को अलग-अलग रंगा जाता है. इसके बाद बड़े सटीक तरीके से हर धागे को इस तरह बुना जाता है कि पूरा डिजाइन बिल्कुल सही जगह पर बने. इस प्रोसेस में जरा-सी गलती पूरे पैटर्न को खराब कर सकती है. यही वजह है कि एक असली पाटन पटोला साड़ी तैयार होने में कई महीने लग जाते हैं. इसे बनाने के लिए सालों के एक्सपीरियंस की जरूरत होती है. आज भी गुजरात के कुछ परिवार इस आर्ट को पीढ़ी दर पीढ़ी जिंदा रखे हुए हैं.

हर डिजाइन के पीछे एक कहानी
पाटन पटोला सिर्फ एक साड़ी नहीं, बल्कि इंडियन आर्ट और कल्चर का शानदार नमूना है. इसमें बने डिजाइन सिर्फ सजावट के लिए नहीं होते, बल्कि उनका अपना कल्चरल महत्व भी होता है. इन साड़ियों में अक्सर आपको तोते, हाथी, नाचते हुए लोग, फूल, बेल-बूटे और अलग-अलग पैटर्न देखने को मिलेंगे. रंगों का खूबसूरत कॉम्बिनेशन और बैलेंस्ड डिजाइन इस साड़ी को कभी आउट ऑफ फैशन नहीं होने देते. यही वजह है कि कई परिवारों में पाटन पटोला साड़ी को विरासत की तरह संभालकर रखा जाता है.
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डबल इकत टेक्निक?
अगर आपने कभी सोचा हो कि पाटन पटोला इतनी खास क्यों होती है, तो इसका जवाब इसकी बुनाई में छिपा है. नॉर्मल प्रिंटेड कपड़ों में डिजाइन कपड़ा तैयार होने के बाद बनाया जाता है. लेकिन इकत टेक्निक में पहले धागों को अलग-अलग हिस्सों में बांधकर रंगा जाता है. इसके बाद उन्हीं रंगे हुए धागों से कपड़ा बुना जाता है. पाटन पटोला में ये प्रोसेस और भी कठिन हो जाती है, क्योंकि इसमें ताना और बाना दोनों को पहले से डिजाइन के हिसाब से रंगा जाता है. बुनाई के दौरान हर धागे का बिल्कुल सही जगह पर मिलना बहुत जरूरी होता है. यही वजह है कि ये आर्ट दुनिया की सबसे कठिन बुनाई टेक्निक्स में शामिल है.
भारी नहीं, ग्रेसफुल
अक्सर लोग सोचते हैं कि ट्रेडिशन सिल्क साड़ियां काफी हैवी होती हैं और उन्हें संभालना मुश्किल होता है. लेकिन पाटन पटोला इस सोच को बदल देती है. इसकी खूबसूरती भारी कढ़ाई या स्टोन वर्क में नहीं, बल्कि इसकी बुनाई में होती है. इसलिए ये साड़ी देखने में रॉयल लगती है, लेकिन पहनने पर बहुत लाइटवेट और ग्रेसफुल.

पटोला को दें मॉडर्न ट्विस्ट
अगर आप पाटन पटोला साड़ी को आज के फैशन के हिसाब से पहनना चाहती हैं, तो सबसे पहले अपने ब्लाउज के डिजाइन पर ध्यान दें. स्लीवलेस, हॉल्टर नेक, हाई नेक, बोट नेक, फुल स्लीव्स, कॉर्सेट स्टाइल और स्ट्रक्चर्ड ब्लाउज इस साड़ी के साथ बहुत खूबसूरत लगते हैं.
कम जूलरी, ज्यादा एलिगेंस
पाटन पटोला साड़ी अपने आप में काफी अट्रैक्टिव होती है. ऐसे में इसके साथ बहुत हैवी जूलरी पहनने की जरूरत नहीं होती. हल्के गोल्ड ईयररिंग्स, सिल्वर स्टेटमेंट इयररिंग्स, एक खूबसूरत कफ ब्रेसलेट या फिर सिंपल नेकपीस आपके पूरे साड़ी लुक को क्लासी बना सकते हैं.
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