Home Top News Mumbai Blast Case: 27 मौतें, 130 घायल… और अब 2011 मुंबई धमाके का आरोपी बरी!

Mumbai Blast Case: 27 मौतें, 130 घायल… और अब 2011 मुंबई धमाके का आरोपी बरी!

by Amit Dubey 13 August 2026, 12:50 PM IST
13 August 2026, 12:50 PM IST
2011 Mumbai Blast Case

2011 Mumbai Blast Case: साल 2011 में मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. इसमें 27 लोगों की मौत हुई थी और 130 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस मामले में एक आरोपी को लेकर कोर्ट ने बड़ा अहम फैसला सुनाया है.

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई की एक विशेष अदालत ने बुधवार को 2011 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में एक आरोपी को जमानत दे दी, जिसमें लगभग 15 वर्षों की लंबी कैद और पहले रिहा किए गए सह-आरोपियों के साथ समानता के सिद्धांत का हवाला दिया गया. आइए जानते हैं पूरी खबर.

2012 से सलाखों के पीछे था शेख

मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमसीओसीए) के तहत दायर मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने जोर देकर कहा कि अदालत इस बात से अवगत है कि आरोप “बेहद गंभीर” हैं और उसने “अभियोजन साक्ष्य की खूबियों पर कोई राय व्यक्त करने” से परहेज किया है.

न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी जैनुल शेख की याचिका पर “पूरी तरह से लंबे समय तक कारावास के संवैधानिक आधार पर और जमानत पर रिहा किए गए सह-आरोपियों के साथ समानता के सिद्धांत पर विचार किया गया.”

बता दें कि आरोपी जैनुल शेख मुंबई बम धमाके के आरोप में 2012 से सलाखों के पीछे था.

कोर्ट रूम में दोनों पक्षों में क्या हुई बहस?

न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, अभियुक्तों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता वहाब खान ने मुख्य रूप से समानता और लंबी कारावास की सजा के आधार पर जमानत की पैरवी की. बचाव पक्ष ने बताया कि दो सह-आरोपियों – नकी अहमद वसी अहमद शेख और हारून राशिद अब्दुल हमीद नायक – को मुकदमे में देरी और लंबी कैद के कारण इस साल 10 अप्रैल को अदालत द्वारा पहले ही जमानत दे दी गई थी. खान ने आगे कहा कि आरोपियों की विस्फोटों में संलिप्तता साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं थे.

विशेष लोक अभियोजक अजय मिसार ने जैनुल शेख की याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनमें इकबालिया बयान और सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं. मिसार ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मुकदमे में काफी प्रगति हो चुकी है और अब तक 227 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. अभियोजन पक्ष ने कहा कि मुकदमे के शीघ्र निष्कर्ष की संभावना के कारण लंबी कैद के आधार अब पहले की तरह प्रभावी नहीं रह गए हैं.

जज ने क्या सुनाया फैसला?

वहीं, जज नवंदर ने कहा कि मुकदमे की प्रगति सराहनीय है. अदालत ने कहा, “हालांकि, यह परिस्थिति अपने आप में इस तथ्य को नकार नहीं सकती कि आवेदक पहले ही विचाराधीन कैदी के रूप में लगभग 15 वर्ष कारावास भुगत चुका है.” न्यायाधीश ने आगे कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से लंबे समय तक वंचित रखने के संबंध में संवैधानिक विचार अपरिवर्तित रहता है.

न्यायाधीश ने कहा कि सह-आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आधार केवल साक्ष्य की अवधि ही नहीं थी, बल्कि उनके द्वारा भुगती गई असाधारण रूप से लंबी कारावास की अवधि भी थी. न्यायाधीश ने निष्कर्ष निकाला, “केवल इसलिए कि पूर्व आदेश के बाद 24 अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ की गई है, इससे कोई ऐसा विशिष्ट कारण उत्पन्न नहीं होता है जो वर्तमान आवेदक को समानता का लाभ देने से इनकार करने के लिए पर्याप्त हो.”

जमानत देते समय, अदालत ने आरोपी को 1,00,000 रुपये के बांड के साथ इतनी ही राशि के एक या एक से अधिक सक्षम स्थानीय जमानतदारों को पेश करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि आवेदक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अभियोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए या किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए. उनकी जमानत की एक अन्य शर्त यह है कि वे पूर्व अनुमति के बिना अदालत के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते.

मुंबई धमाके में 27 लोगों की हुई थी मौत

बता दें कि 13 जुलाई 2011 को शाम 6:54 बजे, दक्षिण मुंबई में ओपेरा हाउस के पास प्रसाद चैंबर्स के बाहर एक जबरदस्त बम धमाका हुआ था. यह शाम के व्यस्त समय में हुए तीन सिलसिलेवार धमाकों (जिनमें जवेरी बाजार और दादर भी शामिल थे) में से एक था. इन धमाकों में 27 लोगों की मौत हो गई थी और 130 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. धमाके के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई थी.

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News Source: PTI

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