World Tourism Day: घर से ऑफिस, ऑफिस से घर…यह हम सभी के लाइफ का साइकल बन गया है. इसके बीच में हम खुद की मेंटल हेल्थ के बारे में भूल जाते हैं. एक छोटा ब्रेक न सिर्फ थकान दूर करता है बल्कि दिमाग को भी तरोताजा करता है, जिससे आप नई एनर्जी के साथ अपनी जिंदगी फिर से शुरू कर पाते हैं. इसके लिए जरूरी नहीं कि आप किसी महंगे या भीड़-भाड़ वाले टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाएं. देश में कई खूबसूरत जगहें हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. यहां आपको शहर का शोर, ट्रैफिक और भीड़ नहीं मिलेगी. नेचर के करीब कुछ सुकून भरे पल बिताना आपकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ, दोनों के लिए अच्छा होगा.
खास बात यह है कि भारत में कई छिपी हुई और ऑफबीट जगहें हैं, जहां अपको खूबसूरती, अनोखी संस्कृति, पहाड़, झील, जंगल और शांत माहौल मिलेगा. अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से बचने के लिए छुट्टियों का प्लान बना रहे हैं, तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल करना एक अच्छा आइडिया होगा. विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर जानें भारत की 10 ऐसी सीक्रेट ट्रैवल डेस्टिनेशन के बारे में, जहां जाने के बाद आपका वहां से आने का मन नहीं करेगा.
जीभी, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में घूमने की जगह के नाम पर ज्यादातर लोगों को कुल्लू-मनाली ही याद आता है, लेकिन यहां और भी कही जगहें हैं, जो ट्रिप के लिए बेस्ट हैं. हिमाचल प्रदेश में जीभी एक छोटा शांत गांव है जो पहाड़ों और सेब के बागों से घिरा है. घने चीड़ के जंगल, ताजे पानी की झीलें और खूबसूरत नजारे इसे बेस्ट डेस्टीनेशन स्पॉट बनाते हैं. जिभी मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच घूमने के लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि वहां सर्दियां बहुत ज्यादा ठंडी होती हैं. वहां पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप दिल्ली या चंडीगढ़ से बस या टैक्सी से औट आएं. औट से जिभी जाने के लिए, लोकल बस लें या टैक्सी किराए पर लें. यहां चेहनी कोठी झील है, जो ट्रेकिंग और पिकनिक के लिए बहुत अच्छी है. आप झील के आसपास घूम सकते हैं और पहाड़ों के शानदार नजारे देख सकते हैं. तीर्थन वैली बर्डवॉचिंग के लिए एक बेहतरीन जगह है. यहां लाल चोंच वाले नीले मैगपाई और ग्रेट बारबेट जैसे रंग-बिरंगे हिमालयी पक्षी देखने को मिलते हैं.

पालमपुर हिमाचल प्रदेश
पालमपुर हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा वैली में बसा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. हरे-भरे चाय के बागानों और चीड़ के जंगलों से घिरा यह शहर भीड़-भाड़ वाली जिंदगी से दूर एक शांत जगह पर बसा है. पालमपुर घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून तक है, जब मौसम सुहावना होता है. सर्दियों में काफी ठंड हो जाती है और टेम्परेचर 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है. पालमपुर के लिए सबसे पास का रेलवे स्टेशन मारंडा है, जो लगभग 10 km दूर है. वहां से, पालमपुर के लिए टैक्सी और बस मिलती है. इसके अलावा आप फ्लाइट से कांगड़ा एयरपोर्ट तक पहुंच सकते हैं.
यहां रोडोडेंड्रोन और चीड़ के पेड़ों से सजे रास्ते हैं, जो आपको छिपे हुए झरनों और शानदार नजारों तक ले जाते हैं. आप यहां फैले हुए चाय के बागानों में घूम सकते हैं और ताजी चाय की पत्तियों की खुशबू में डूब सकते हैं. इसके अलावा आप पुराने बैजनाथ मंदिर को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं.
वायनाड, केरल
वायनाड हरे-भरे नजारों के बीच बसी एक जगह है, जो नेचर लवर्स के लिए जन्नत है. अगर आपको हरियाली पसंद है, तो अपना बैग पैक करें और निकल जाएं. यहां अक्टूबर से मई के बीच, मौसम बहुत अच्छा रहता है. वायनाड ट्रॉपिकल जंगलों, नदियों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है. वहां पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका कोझिकोड या बैंगलोर के लिए फ्लाइट लेना है. इन शहरों से टैक्सी या बस से आप आसानी से वायनाड पहुंच सकते हैं.
वायनाड में आपको बाणासुर सागर डैम मिलेगा, जो यह भारत का सबसे बड़ा मिट्टी से बना डैम है. चेम्बरा पीक ट्रेकर्स के लिए एक मजेदार जगह है, जहां से वेस्टर्न घाट के शानदार नजारे दिखते हैं. एडक्कल गुफाओं में पुराने पत्थर दिखेंगे, जिन पर नक्काशी की गई है. यह वायनाड के रिच इतिहास को दिखाते हैं. कुरुवा द्वीप में आप बैम्बू राफ्टिंग कर सकते हैं. नीलिमाला व्यू पॉइंट से झरने और घाटी के शानदार नजारे दिखते हैं.
जवाई, राजस्थान
जवाई, जोधपुर और उदयपुर के बीच एक अनोखी जगह है जो अपनी लेपर्ड सफारी के लिए मशहूर है. यह अकेला आदिवासी गांव जवाई बांध डैम के पास है और अरावली की ऊबड़-खाबड़ ग्रेनाइट चट्टानों से घिरा हुआ है. जवाई घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी तक सर्दियों के महीनों में होता है, जब मौसम बहुत सुहावना होता है. सबसे पास का रेलवे स्टेशन लूनी है, जो 48 किलोमीटर दूर है, जहां से आप टैक्सी ले सकते हैं. जोधपुर एयरपोर्ट से सफर में लगभग 90 मिनट लगते हैं. यहां आप जवाई डैम देख सकते हैं, जहां से खतरनाक मगरमच्छ और मनमोहक नजारे दिखते हैं. वहीं जवाई लेपर्ड कैंप में आपको तेंदुए समेत कई जंगली जानवर देखने को मिलेंगे.

कास पठार, महाराष्ट्र
सतारा में स्थित कास पठार, खिले हुए फूलों से भरी एक अनोखी घाटी है, जिसे महाराष्ट्र की फूलों की घाटी कहा जाता है. हर साल मानसून के बाद पूरा घास का मैदान सोनकी, कार्वी, स्मिथिया, एरियोकॉलन और ऑर्किड जैसे रंग-बिरंगे जंगली फूलों से ढक जाता है. पठार को फूलों से ढका हुआ देखने के लिए मानसून के तुरंत बाद अगस्त और अक्टूबर के बीच घूमने जाएं. कास झील और सज्जनगढ़ किले जैसी जगहों से फूलों की घाटी के शानदार नजारे दिखते हैं. सबसे पास का रेलवे स्टेशन सतारा है, जो 25 km दूर है. यहां से बसें भी मिल जाती हैं. यहां से पुणे एयरपोर्ट सबसे पास है.
गुरेज घाटी, कश्मीर
गुरेज घाटी कश्मीर को वो अनछुआ और जादुई कोना है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वादियों और अनोखी संस्कृति के लिए जाना जाता है. लाइन ऑफ कंट्रोल के बहुत पास होने के कारण यह इलाका पर्यटकों से छिपा हुआ रहता है. लेकिन अब यह ऑफबीट ट्रैवलर्स की पहली पसंद बन चुकी है. यहां आपको हब्बा खातून चोटी मिलेगी, जिसका नाम कश्मीर की मशहूर कवयित्री के नाम पर रखा गया है. इसके साथ ही यहां नीले-हरे रंग की साफ पानी वाली किशनगंगा मिलेगी. इसके किनारे बैठना या कैंपिंग करना बेहद सुकून देता है. गुरेज घाटी श्रीनगर से लगभग 123 किलोमीटर दूर है. सड़क मार्ग यहां पहुंचने का एकमात्र रास्ता है, जो बहुत मजेदार और खूबसूरत है.
चोपता, उत्तराखंड
चोपता उत्तराखंड का एक शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जिसे अक्सर “मिनी स्विट्जरलैंड” भी कहा जाता है. यह घने चीड़ और ओक के जंगलों, हरे-भरे घास के मैदानों और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ है. यहां से तुंगनाथ मंदिर बहुत पास हैं. सर्दियों में बर्फबारी का शानदार नजारा दिखता है. चोपता घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच है. अगर आप बर्फ देखना चाहते हैं, तो दिसंबर से फरवरी का समय बेस्ट रहेगा. चोपता जाने के लिए सबसे पास का रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो लगभग 165 किलोमीटर दूर है. यहां देहरादून एयरपोर्ट से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है.

माजुली, असम
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा माजुली असम में एक ऐसी जगह है जो शहरों की भीड़-भाड़ से बिल्कुल अलग अनुभव देता है. यह अपनी सत्त्रिया संस्कृति, मिट्टी के घरों, मास्क आर्ट और शांत गांवों के लिए जाना जाता है. यहां आपको असम की पारंपरिक कला और संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिलता है. सुबह नदी किनारे का नजारा और शाम को डूबता सूरज इस जगह को और भी खूबसूरत बनाते हैं. माजुली पहुंचने के लिए आप ट्रेन या फ्लाइट से जोरहाट पहुंच सकते हैं. जोरहाट से आपको निमाती घाट जाना होगा, जहां से आप रिक्शे से माजुली पहुंच सकते हैं. अक्टूबर से अप्रैल तक यहां घूमने लिए सबसे आरामदायक समय है.
लोंगवा, नागालैंड
नागालैंड का लोंगवा गाँव अपनी अनोखी जगह और कोन्याक जनजाति संस्कृति के लिए जाना जाता है. इस गांव की खास बात यह है कि भारत-म्यांमार बॉर्डर गांव से होकर गुजरता है. इसके पारंपरिक लकड़ी के घर, पहाड़ी रास्ते और लोकल जिंदगी टूरिस्ट को एक अनोखा अनुभव देते हैं. गांवों के चारों ओर की पहाड़ियां सुबह और शाम को शानदार नजारे दिखाती हैं. यहां पहुंचने के लिए दीमापुर मेन रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट हैं. दीमापुर से लोंगवा की दूरी लगभग 370 किलोमीटर है, जिससे सड़क का सफर लंबा हो जाता है, लेकिन रास्ते में नागालैंड के खूबसूरत पहाड़ सफर को मजेदार बना देते हैं. यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मई तक है.
जीरो वैली, अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली अपने हरे-भरे धान के खेतों, पहाड़ियों और अपतानी जनजाति की अनोखी संस्कृति के लिए मशहूर है. इसका शांत माहौल और छोटे-छोटे गांव इसे भीड़-भाड़ से दूर छुट्टियां बिताने के लिए एक बेहतरीन जगह बनाते हैं. घाटी में घूमने से पारंपरिक घरों, खेतों और स्थानीय जीवन को करीब से देखने का मौका मिलता है. यहां सितंबर में होने वाला जीरो म्यूजिक फेस्टिवल भी युवाओं के बीच बहुत मशहूर है. जीरो का सबसे पास का रेलवे स्टेशन नाहरलागुन है, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर है. गुवाहाटी से सड़क के रास्ते भी यहां पहुंचा जा सकता है. यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम मार्च से मई और सितंबर से नवंबर तक होता है.
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