Home Top News कैसे हुई BRICS की शुरुआत, कौन से देश हैं हिस्सा? जानें भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है सम्मेलन

कैसे हुई BRICS की शुरुआत, कौन से देश हैं हिस्सा? जानें भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है सम्मेलन

by Neha Singh 9 September 2026, 5:21 PM IST
9 September 2026, 5:21 PM IST
BRICS Summit in Delhi

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में 11 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. यह सम्मेलन भारत मंडपम में होगा, जहां ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष, आमंत्रित अतिथि और लगभग 30 देशों के शीर्ष नेता और बड़े कारोबारी प्रतिनिधि हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं. यह ऐतिहासिक समिट BRICS ग्रुप की स्थापना के 20 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है. कूटनीति और व्यापार के लिहाज से यह सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. यह ब्रिक्स के विस्तार के बाद से पहला शिखर सम्मेलन है.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली में कई दिनों पहले से तैयारियां चल रही है. इस खबर में आप जानेंगे कि BRICS में कौन-कौन से देश शामिल हैं और इसकी शुरुआत कैसे हुई. साथ ही भारत के लिए इसकी मेजबानी करना कितना फायदेमंद होने वाला है.

क्या है ब्रिक्स

BRICS दुनिया के ग्यारह बड़े विकासशील देशों और उभरते बाजारों का संगठन है. ब्रिक्स की शुरुआत चार देशों से हुई थी, इसलिए उन देशों के पहले अक्षर से इसका नाम रखा गया- B, R, I, C . इसके बाद इसमें साउथ अफ्रीका जुड़ा, जिससे बाद में संगठन का नाम B, R, I, C,S हो गया. इसके बाद विस्तार होता गया और अब यह 11 देशों का संगठन है.

BRICS ग्लोबल और क्षेत्रीय महत्व वाले आज के मुद्दों और ग्लोबल राजनीतिक और आर्थिक शासन के मुद्दों पर सलाह-मशविरा और सहयोग के लिए एक उपयोगी मंग के तौर पर काम करता है. रूस को छोड़कर सभी ब्रिक्स सदस्य तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के साथ विकासशील देश हैं. ये राष्ट्र क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. एक अनुमान के अनुसार, ये राष्ट्र संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार में 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान करते हैं. उनकी संयुक्त जीडीपी 15 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में 23% का योगदान करते हैं और विश्व व्यापार का लगभग 18% हिस्सा हैं. इसे R-5 के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इन पांच देशों के की करंसी ‘आर’ से शुरू होती है.

कैसे हुई शुरुआत

2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की पहली मीटिंग में संगठन को BRIC नाम से औपचारिक रूप दिया गया था. पहला BRIC समिट 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था. बदलते वैश्विक समीकरणों के अनुसार तीन बार ब्रिक्स संगठन का विस्तार किया गया. पहले 2010 में न्यूयॉर्क में BRIC विदेश मंत्रियों की मीटिंग में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करके BRIC को BRICS में बढ़ाने पर सहमति बनी थी. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में सान्या में तीसरे BRICS समिट में हिस्सा लिया.

अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में हुए 15वें शिखर सम्मेलन में समूह को बड़ा करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. इसके तहत 1 जनवरी 2024 से चार नए देश आधिकारिक तौर पर पूर्ण सदस्य बन, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. तीसरी बार इसका विस्तार जनवरी 2025 में हुआ, जब इंडोनेशिया को भी शामिल किया गया. यह पहला दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश था जो ब्रिक्स में शामिल हुआ.

सहायक सदस्य

ब्रिक्स संगठन के 11 प्रमुख सदस्य हैं- ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात. 2025 में सहायक सदस्य देश भी BRICS में शामिल हुए, जिनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, ​​कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं. सहायक सदस्य मुख्य रूप से संगठन के साथ आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग करते हैं.

कौन-कौन आ रहा दिल्ली

इस साल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें शिखर सम्मेलन में भारत की मेजबानी बहुत ही महत्वपूर्ण है. यह सम्मेलन भारत मंडपम में हो रहा है. BRICS की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. भारत के खास मेहमानों के स्वागत के लिए दिल्ली तैयार है. दिल्ली के एक बड़े फाइव-स्टार होटल लुटियंस को BRICS मेहमानों के लिए रिजर्व कर दिया गया है. भारतीय मेहमानों के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे.

BRICS समिट के लिए दुनिया के कई बड़े देश भारत आ रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने समिट में शामिल होने के लिए भारत आने की पुष्टि कर दी है. साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा ईरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और इथियोपिया के प्राइम मिनिस्टर अबी अहमद भी दिल्ली आ रहे हैं. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो पहली बार समिट में शामिल होंगे. इसके अलावा, सहायक देशों से मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायेव जैसे नेता भी समिट में शामिल हो रहे हैं. हालांकि, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा इस बार घरेलू कामों की वजह से खुद भारत नहीं आ पा रहे हैं और उनकी जगह विदेश मंत्री मौरो विएरा देश को प्रतिनिधित्व करेंगे.

क्या है इस साल की थीम?

BRICS 2026

बता दें, भारत चौथी बार इस शक्तिशाली वैश्विक मंच का नेतृत्व कर रहा है. भारत ने इससे पहले 2021, 2016 और 2012 में भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी. भारत ने BRICS 2026 के लिए बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी थीम चुनी है. यह प्रधानमंत्री मोदी के मानवता को सबसे पहले रखने के विजन को दिखाता है. भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है.

भारत के लिए कितना फायदेमंद

ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर तनाव, युद्ध और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, BRICS भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से काफी अहम हो जाता है.

भारत, चीन और रूस को एक साथ लाने का फायदा

BRICS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह तीन जरूरी देशों-भारत, चीन और रूस को एक साथ लाता है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कई सालों बाद भारत आ रहे हैं. इस दौरे को भारत और चीन के बीच उतार-चढ़ाव के बाद रिश्तों को ठीक करने वाला माना जा रहा है. इसे एक अच्छी शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है. असल में गलवान घटना के बाद मोदी और जिनपिंग की पहली मुलाकात रूस के कजान में हुई थी. इस मुलाकात से भारत-चीन रिश्तों में नरमी की शुरुआत हुई. PM मोदी भी 2025 में चीन गए थे. अब जिनपिंग और पुतिन दोनों एक साथ भारत में होंगे, इसलिए दुनिया की नजर प्रधानमंत्री मोदी और भारत के BRICS पर होगी.

साथ ही BRICS भारत को अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने की भी इजाजत देता है. दूसरे शब्दों में, BRICS इंडिया की मल्टी-अलाइनमेंट फॉरेन पॉलिसी को आगे बढ़ाने में मदद करता है. भारत किसी एक पावर ब्लॉक पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना अपने फायदे के हिसाब से अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते बना सकता है.

Modi Putin Jinping

डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश

BRICS के अंदर लोकल करेंसी में व्यापार बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने पर चर्चा बढ़ रही है. लोकल करेंसी में पेमेंट बढ़ाने से भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की जरूरत कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. इससे फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े खर्च और कुछ पेमेंट रिस्क कम हो सकते हैं. डिजिटल पेमेंट और डिजिटल करेंसी के क्षेत्र में सहयोग से भविष्य में BRICS देशों के बीच व्यापार भी आसान हो सकता है. हालांकि, डॉलर की भूमिका को तुरंत खत्म करना मुमकिन नहीं है. इसे धीरे-धीरे कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए.

भारतीय व्यापार के लिए बड़ा मार्केट

BRICS के विस्तार से भारत के लिए नए बाजार खुले हैं. मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं. भारत के फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, IT और डिजिटल सर्विस जैसे सेक्टर इन मार्केट से फायदा उठा सकते हैं. इससे भारतीय कंपनियों को नए ग्राहक और निवेश के मौके मिल सकते हैं.

MSME और रोजगार के मौके

BRICS भारत के छोटे और मध्यम साइज के एंटरप्राइज (MSME) सेक्टर के लिए एक बड़ा मार्केट दे सकता है. अगर भारतीय उत्पादों का निर्यात बढ़ता है, तो इससे न सिर्फ बड़ी कंपनियों को बल्कि छोटे बिजनेस और लोकल मैन्युफैक्चरर को भी फायदा हो सकता है. बढ़े हुए निर्यात से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर में रोजगार के नए मौके बन सकते हैं.

तेल और गैस की सुरक्षित सप्लाई

BRICS में रूस, सऊदी अरब, UAE और ईरान जैसे बड़े तेल और गैस बनाने वाले देश शामिल हैं. भारत दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी कंज्यूमर में से एक है और कच्चे तेल की लगातार सप्लाई हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है. BRICS भारत को इन एनर्जी बनाने वाले देशों के साथ बेहतर बातचीत और लंबे समय तक एनर्जी सहयोग के लिए एक प्लेटफॉर्म देता है. इससे भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत कर सकता है और ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर को कम कर सकता है.

आतंकवाद के खिलाफ सहयोग

भारत, क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद और आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ इंटरनेशनल सहयोग बढ़ाने के लिए BRICS प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर रहा है. भारत चाहता है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में नामंजूर माना जाए और आतंकी संगठनों की आर्थिक मदद रोकने के लिए देशों के बीच मजबूत सहयोग हो. BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने से भारत को अपनी सुरक्षा चिंताओं के लिए बड़े पैमाने पर इंटरनेशनल सपोर्ट जुटाने का मौका मिलता है.

दिल्लीवाले ध्यान दें! 11 से 13 सिंतबर तक डायवर्ट किए गए ये रास्ते, स्कूल-ऑफिस रहेंगे बंद, जानें डिटेल

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?