MP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का गृह जिला व धर्मनगरी उज्जैन में इस वक्त आस्था और प्रशासन के बीच बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है. नगर निगम और उज्जैन प्रशासन के मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई का साधु-संतों, हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया है.
हनुमान की प्रतिमा नहीं हुई टस से मस
अवंतिका नगरी के खड़े हनुमान मंदिर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रशासन प्रतिमा को शिफ्ट करने पहुंचा. संतों का दावा है कि तमाम कोशिशों और पुरातत्व विशेषज्ञों की मौजूदगी के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई. श्रद्धालु इसे बजरंगबली का साक्षात चमत्कार मान रहे हैं. मंदिर परिसर में अब विरोध प्रदर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू हो चुका है.
चौड़ीकरण का काम प्रस्ता वित
बता दें यह पूरा विवाद उज्जैन के मास्टर प्लान से जुड़ा है, जिसके तहत लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण और चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है. प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस मार्ग की जद में लगभग 12 से 15 धार्मिक स्थल आ रहे हैं, जिन्हें स्थानांतरित यानी दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है. इसी कड़ी में जब प्रशासन की टीम खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने पहुंची तो माहौल गर्मा गया.
टीमों ने तकनीकी हथकंडे अपनाए
संतों और स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि नगर निगम और पुरातत्व विभाग की टीमों ने तकनीकी हथकंडे अपनाए, लेकिन प्रतिमा को उसके मूल स्थान से रत्ती भर भी हटाया नहीं जा सका. श्रद्धालुओं ने इसे भगवान बजरंगबली की आस्था और चमत्कार से जोड़ दिया है. घटना की खबर फैलते ही जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि महाराज समेत कई वरिष्ठ संत और हिंदू संगठन मौके पर पहुंच गए. मंदिर परिसर में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया गया है और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है.
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उज्जैन नगर निगम ने की अपनी सफाई पेश
बढ़ते विरोध को देखते हुए उज्जैन नगर निगम ने भी अपनी सफाई पेश की है. नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर के मुताबिक किसी भी धार्मिक स्थल के स्थानांतरण का काम जबरन नहीं, बल्कि संबंधित पुजारियों और मंदिर व्यवस्थापकों की सहमति से ही किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि प्रतिमा हटाने में जो तकनीकी जटिलताएं सामने आई हैं. उनकी जांच अब एक्सपट्र्स से कराई जा रही है. विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा.
बाबा महाकाल की नगरी में मुस्तैद प्रशासन
एक तरफ विकास का मास्टर प्लान है तो दूसरी तरफ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था. उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में जिस तरह से श्रद्धालुओं और संतों का जमावड़ा लगा हैए उसने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं. अब देखना होगा कि विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है या फिर संतों के इस आक्रोश के आगे मास्टर प्लान का नक्शा बदलना पड़ता है.
