NCERT Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक अध्याय के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही को बंद कर दिया है. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि विशेषज्ञों के पैनल के सुझावों के आधार पर पाठ्यपुस्तक में बदलाव कर दिए गए हैं और संशोधित किताब को भी बाजार में उपलब्ध करा दिया गया है. इसी बीच कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका आलोचना से परे नहीं है और न ही हो सकती है. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी आलोचना उचित मंच पर और निष्पक्ष एवं तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए.
NCERT वाले मामले को किया बंद
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहन की बेंच ने यह टिप्पणी उस वक्त की है जब वे क्लास 8वीं की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर वाले मामले की कार्यवाही को बंद कर रहे थे. अदालत ने कहा कि फर्क आलोचना और चुप्पी के बीच नहीं, बल्कि जिम्मेदार बातचीत और बिना जानकारी के किए गए दावों के बीच है. उन्होंने कहा कि एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है और न ही कभी हो सकती है. न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष, जानकारीपूर्ण और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र की जायज और जरूरी विशेषता है. साथ ही ये संस्थागत जवाबदेही और खुद में सुधार लाने में योगदान देती है.
कक्षा 9 के बच्चे अब पढ़ेंगे SIR: NCERT ने सोशल साइंस में किया शामिल, निष्पक्ष चुनाव की तारीफ
कच्चा होता है बच्चों का मन
बेंच ने कहा कि आलोचना सही मंच और निष्पक्ष व तर्कसंगत तरीके से की जाए. साथ ही बिना जांच-पड़ताल के ऐसे बच्चों के स्कूल के सिलेबस में शामिल न की जाए. उन्होंने आगे कहा कि इस उम्र में बच्चों का मन कच्चा होता है और वह जल्दी से प्रभावित हो जाते हैं. कोर्ट ने इस बात की तरफ भी ध्यान दिया कि केद्र सरकार द्वारा बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों के आधार पर विवादित अध्याय को हटा दिया गया है. कोर्ट ने तीनों अकादमिक की सफाई पर विचार करने के बाद केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, पब्लिक यूनिवर्सिटीज से फंड पाने वाले संस्थानों पर छोड़ दिया था कि वह इस मु्द्दे पर स्वतंत्र फैसला ले सकते हैं. साथ ही वह 11 मार्च के आदेश में कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना ऐसा कर सकते थे.
तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया
इसके अलावा शीर्ष अदालत ने 11 मार्च के आदेश का वह हिस्सा भी वापस ले लिया था. इसमें कहा गया था कि तीनों एकेडेमिक्स (प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार) ने 8वीं क्लास के स्टूडेंट के सामने भारतीय न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करने के लिए ‘जानबूझकर और सोच-समझकर’ तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया. तीनों एकेडमिक्स ने कहा था कि अध्याय का कंटेंट तैयार करने में किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं था और यह एक ग्रुप वर्क था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसकी सभी टिप्पणियों कंटेंट को लेकर थी, न कि व्यक्तियों के बारे में थी. बता दें कि 11 मार्च को अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने चैप्टर बनाने वाली टीम में शामिल तीनों एक्सपर्ट्स से केंद्र को दूरी बनाने के लिए कहा था.
NCERT ने जारी की 8वीं क्लास की नई किताब! सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बदल दिया पूरा चैप्टर
News Source: PTI
