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भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका: वैश्विक संघर्षों से सबक लेकर ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरत बनेगा भारत

by Sanjay Kumar Srivastava
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भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका: वैश्विक संघर्षों से सबक लेकर ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरत बनेगा भारत

Defense Industry: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्षों से सबक लेने की जरूरत है.

Defense Industry: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्षों से सबक लेने की जरूरत है. वैश्विक संघर्ष को देखते हुए अब भारत को ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भर बनना होगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि इन संघर्षों ने यह साबित कर दिया कि ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रौद्योगिकियां भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को सैन्य शक्ति को बढ़ावा देने के लिए अगले कुछ वर्षों में स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए मिशन मोड में काम करना होगा. उन्होंने कहा कि जैसा कि पूरी दुनिया रूस और यूक्रेन के साथ-साथ ईरान-अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष को देख रही है, हम भविष्य के युद्ध में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं.

देश में हो इंजन, बैटरी सहित हर चीज का निर्माण

उन्होंने कहा कि आज भारत में एक ऐसे ड्रोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता है, जिसमें हम पूरी तरह से आत्मनिर्भर हों. राजनाथ सिंह नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन में बोल रहे थे. सम्मेलन में प्रमुख घरेलू रक्षा निर्माण कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अधिकारियों ने भाग लिया. उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए यह जरूरी है कि भारत ड्रोन निर्माण में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बने. उन्होंने कहा कि ड्रोन के सांचे से लेकर उसके सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और हर चीज का निर्माण भारत में ही होना चाहिए. यह कोई आसान काम नहीं है. सिंह ने उद्योग जगत के नेताओं से अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने का भी आह्वान किया.

डिफेंस इंडिया स्टार्ट अप चैलेंज संस्करण लॉन्च

उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भरता न केवल उत्पाद स्तर पर बल्कि घटक स्तर पर भी आवश्यक है. यानी ड्रोन के सांचे से लेकर सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक सभी भारत में निर्मित होने चाहिए. सिंह ने तर्क दिया कि किसी भी देश के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्ट-अप के योगदान पर निर्भर करता है. रक्षा मंत्री ने निजी क्षेत्र के सक्रिय योगदान का आह्वान किया और भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लिए वैश्विक केंद्र में बदलने के लिए मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का पूरा समर्थन दिया. सिंह ने डिफेंस इंडिया स्टार्ट अप चैलेंज (DISC-14) का 14वां संस्करण और ADITI (iDEX के साथ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज का एसिंग डेवलपमेंट) चुनौतियों का चौथा संस्करण भी लॉन्च किया. रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से DISC-14 के तहत 82 और ADITI चैलेंज 4.0 के तहत 25 सहित कुल 107 समस्या विवरण लॉन्च किए गए.

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News Source: PTI

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