Goa Fire Incident: गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से लूथरा ब्रदर्स को बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. साथ ही कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है. सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता उत्तरी गोवा के अर्पोरा इलाके में स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब के सह-मालिक हैं. यहां पिछले साल 6 दिसंबर को भीषण आग लग गई थी. इस हादसे में मौके पर ही 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे.
कोर्ट ने सरेंडर करने का दिया निर्देश
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने तीनों आरोपियों को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने के निर्देश दिया है. साथ ही पीठ ने निचली अदालत से कहा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर मामले की सुनवाई पूरी करें. वहीं, लूथर भाइयों की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक एम सिंघवी और सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि यह मामला सीधे तौर पर जान-बूझकर किया गया अपराध नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि यह कथित तौर पर लापरवाही का मामला है. वहीं, दवे ने कहा कि लूथरा भाइयों की तरफ से ऐसा कोई काम नहीं किया गया था जिसकी वजह से 25 लोगों की मौत हुईं थी. उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 304, पार्ट-II इस मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं होते हैं.
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कई सह-आरोपियों को मिली जमानत
उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा अगर अभियोजन पक्ष इस मामले में सफल होना चाहते हैं तो यह धारा 304A (लापरवाही से मौत) के तहत हो सकता है. दूसरी ओर जस्टिस दत्ता ने सिंघवी से पूछा कि रेस्तरां में कितने लोगों की जान गई. इस पर सीनियर वकील ने बताया कि 25 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में दो बुनियादी गलतियां हैं. साथ ही इस मामले में अभी तक कई अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है. वहीं, अजय गुप्ता की तरफ से पेश सीनियर वकील श्याम दीवान ने कहा कि बिज़नेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ दस प्रतिशत है और इस घटना से उनका कोई लेना देना नहीं है. गोवा सरकार की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल SV राजू और स्टैंडिंग काउंसिल सुरजेंदु शंकर दास ने तीनों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया है.
लूथरा ब्रदर्स गया था थाईलैंड के फुकेत
इसके अलावा तीनों की याचिकाओं को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि उन्हें सरेंडर करने के लिए आज से दो हफ्ते का समय दिया जाता है. आग लगने की घटना के कुछ ही समय बाद लूथरा परिवार थाईलैंड के फुकेत चला गया था, जिसके बाद उनके खिलाफ इंटरपोल का ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया गया था. भारतीय मिशन लगातार थाई सरकार के संपर्क में था. थाई अधिकारियों ने 11 दिसंबर को फुकेत में इन दोनों को हिरासत में ले लिया. भारत में लाए जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने लूथरा ब्रदर्स को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया था. हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को तीनों की जमानत रद्द कर दी थी. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों पर ठीक से विचार करने में पूरी तरह नाकाम रहा है और यह मानने में पूरी तरह गलती की कि यह अपराध हत्या जितना गंभीर नहीं था.
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News Source: PTI
