Zojila Tunnel: भारतीय सेना को कश्मीर घाटी और लद्दाख में सबसे अधिक चुनौतियों का सामना बर्फबारी के दौरान करना पड़ता है. क्षेत्र में अधिक बर्फबारी की वजह से कई सड़कें बंद हो जाती हैं. इससे आम लोगों के साथ-साथ भारतीय सेना को भी बॉर्डर क्षेत्र में पहुंचने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस बीच चीन और पाकिस्तान की किसी भी चुनौतियों का सामना करने और जरूरत पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना को एक बहुत ही खास तोहफा मिलने जा रहा है. जी हां, इस तोहफे का नाम है जोजिला सुरंग. कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली भारत ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे लंबी सुरंग (पहाड़ों में सड़क सुरंग) अब अपने निर्माण में एक बड़ी जीत हासिल की है.
बीते मंगलवार को जोजिला सुरंग ने अपने निर्माण की ऐतिहासिक जीत हासिल की, जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लद्दाख के मीनामर्ग में ईस्ट पोर्टल के नजदीक रिमोट का बटन दबाकर के सुरंग में विस्फोट किया. यह विस्फोट जोजिला सुरंग के ब्रेक थ्रू के लिए किया गया. ब्रेक थ्रू की बात करें तो जब सुरंग के दोनों सिरों/छोर से की जा रही खुदाई को आपस में मिलाई जाती है तो मिलाने की इस प्रक्रिया को ही ब्रेक थ्रू कहते हैं.
13.153 किमी लंबी, 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची टनल
यह सुरंग हिमालय को काटकर बनाई गई है, जो 13.153 किलोमीटर लंबी, 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है. यह समुद्र तल से करीब 11 हजार 578 फीट की ऊंचाई पर है. जानकारी के अनुसार, जोजिला सुरंग कश्मीर घाटी से लद्दाख जाने वाले लोगों, पर्यटकों के लिए बहुत ही सुविधाजनक होने वाली तो है ही, लेकिन इससे खास और बड़ा फायदा भारतीय सेना को भी होने वाला है.
जी हां, यह सुरंग चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली डिफेंस सहित सभी चुनौतियों का सामना करने में भारतीय सेना की बहुत ही मदद करेगी. इसका कारण यह है कि कश्मीर से लद्दाख अब आप किसी भी समय जा सकते हैं. सर्दियों में सेना के अलावा अन्य लोगों को भी जाने में दिक्कत होती थी लेकिन यह सुरंग सर्दियों में हिमपात के बीच आपके लिए खुली रहेगी. कश्मीर से लद्दाख जाने में घंटों का सफर करना पड़ता था, अब जब जोजिला सुरंग पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी तो मात्र 15 मिनट में आप इस सफर को पूरा कर सकेंगे.
आइए अब जानते हैं कि जोजिला सुरंग चीन-पाक की चुनौतियों के बीच भारत के लिए कितना अहम है. इसके साथ ही देश की 5 प्रमुख सुरंगों के भी बारे में भी जानेंगे, जिनमें से एक जोजिला सुरंग भी है. शुरुआत हम जोजिला सुरंग के बारे में खास और महत्वपूर्ण जानकारी से करेंगे.

15 मिनट में श्रीनगर से लद्दाख पहुंचाएगी जोजिला टनल, एशिया की सबसे लंबी सुरंग में अंतिम ब्रेकथ्रू सफल
कब तक खुलेगी ₹6,800 करोड़ की लागत वाली जोजिला सुरंग?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली एशिया की सबसे लंबी सुरंग, जोजिला सुरंग की लागत 6,800 करोड़ रुपये की है. बीते मंगलवार को हिमालय को काटकर गुजरने वाली 13 किलोमीटर लंबी इस उच्च ऊंचाई वाली परियोजना के अंतिम 2.5 मीटर हिस्से को तोड़ दिया. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने समुद्र तल से 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही मुख्य सुरंग का विस्फोट करके प्रारंभिक खुदाई का कार्य किया. यह सुरंग सोनमर्ग से लगभग 24 किलोमीटर और श्रीनगर से 103 किलोमीटर दूर स्थित है.
इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह परियोजना लेह, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए जीवन रेखा है. यह परियोजना 3,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और श्रमिकों ने -4 डिग्री सेल्सियस तक के कम तापमान में काम करके अपना योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि वर्कफोर्स का 80 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से संबंधित है और उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना लद्दाख क्षेत्र के लोगों को श्रीनगर से हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगी.
इस परियोजना के इंजीनियर यूसुफ एस्हागपुर रहिमाबादी ने पीटीआई को यहां बताया कि अब तक कुल काम का लगभग 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है. वहीं, अधिकारियों ने बताया कि सुरंग को फरवरी 2028 में जनता के लिए खोले जाने की संभावना है.

सुरंग बनाते समय आईं कई चुनौतियां
जानकारी के अनुसार, जोजिला सुरंग को बनाते हुए पिछले 5 वर्षों में कई चुनौतियां सामने आई हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में, इस जगह पर लैंडस्लाइड (हिमस्खलन) की पांच घटनाएं हुई हैं, जिनमें जनवरी 2023 में हुई एक भीषण घटना भी शामिल है. तब क्षेत्र में फंसे 172 मजदूरों को भारतीय सेना द्वारा बचाया गया था. सुरंग को बनाते समय इसके कुछ हिस्सों में कमजोर चट्टानों की वजह से इसका काम भी कुछ दिनों तक प्रभावित हुआ था. इसको बनाने में लगे मजदूर, कर्मचारी, अधिकारी माइनस तापमान यानी कि जबरदस्त कड़ाके की ठंड में भी काम करते रहे.
अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह सुरंग लद्दाख को साल भर, हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगी, जिससे यात्रा का समय 1-1.5 घंटे से घटकर 15 मिनट हो जाएगा. जानकारी के अनुसार, यह पूरी परियोजना 31 किलोमीटर लंबी है, जिसमें पहुंच मार्ग और पुल भी शामिल हैं, जो सोनमर्ग से मिनिमर्ग तक फैली हुई है. मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बालताल से लेकर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के द्रास जिले के मिनिमार्ग तक जाने वाली सुरंग में 18 किलोमीटर लंबी संपर्क सड़क भी शामिल है.
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भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर बनेगी जोजिला सुरंग
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सुरंग से आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की काफी उम्मीद है. इसके अलावा, यह जोजिला दर्रे से होकर गुजरने वाली परिवहन संबंधी चुनौतियों का समाधान करेगी, जो भारी हिमपात, हिमस्खलन और खराब मौसम की वजह से हर साल कई महीनों तक बंद रहता है. एक बार चालू हो जाने के बाद, यह सुरंग मुश्किल जोजिला दर्रे से आम लोगों और सेना की आवाजाही को आसान बना देगी. भारी बर्फबारी के कारण यह दर्रा आम तौर पर सर्दियों के तीन महीनों तक ट्रैफिक के लिए बंद रहता है.
इस बीच सबसे बड़ी बात भारतीय सेना के लिए है. कई जानकार बताते हैं कि जोजिला सुरंग भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. बता दें कि इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी की वजह से सर्दियों में सड़कें बंद हो जाती थी, इससे सेना को लद्दाख और कश्मीर में बॉर्डर इलाकों में सामानों को पहुंचाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें काफी फायदा होने वाला है. जब जोजिला सुरंग का आधिकारिक रूप से उद्घाटन हो जाएगा, तब यह चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली किसी भी चुनौतियों के लिए भारत की सेना की कई स्तर पर मदद करेगी.
यह सुरंग सेना को साल भर बिना किसी रुकावट के कश्मीर घाटी से लेकर लद्दाख तक कनेक्टिविटी देगी. पूर्वी लद्दाख (गलवन घाटी) में साल 2020 में चीन से विवाद हुआ था, अब ऐसी किसी भी प्रकार की चुनौती से निपटने में यह सुरंग भारतीय सेना की मदद करेगी. इसके जरिए बिना किसी रुकावट और बहुत ही कम समय में सेना एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपने सामान, रसद, हथियार और जरूरत पड़ने पर अधिक सैनिकों की तुरंत आवाजाही कर सकेगी. जोजिला सुरंग की मदद से भारत को चीन या पाकिस्तान के साथ दो-तरफा युद्ध में भी निपटने की क्षमता बढ़ेगी.
जानकारी के अनुसार, कारगिल के युद्ध में 1999 में पाकिस्तान ने इसी हाईवे पर टारगेट करने की कोशिश की थी, लेकिन तब जोजिला सुरंग नहीं थी. अब इसके बन जाने से किसी भी विपरीत स्थिति में सेना सैनिकों के साथ कोई भी आवाजाही एकदम सुरक्षित और तुरंत कर सकेगी.
जोजिला सुरंग के बन जाने से भारतीय सेना चीन और पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर किसी भी प्रकार से सहयोग और रणनीतिक कदम को बिना किसी देरी के सुरक्षित रूप से उठा सकेगी. आसान भाषा में कहें तो चीन या पाकिस्तान से सटे बॉर्डर पर भारतीय सेना जोजिला सुरंग के जरिए तुरंत बिना देरी किए संपर्क साध सकेगी. जरूरत पड़ने पर सैनिकों से लेकर टैंक तक, सब इस सुरंग से एक स्थान से दूसरे स्थान तक किसी भी मौसम में पहुंचा सकेगी. इससे सैनिकों की आवाजाही और सैन्य हथियारों की सप्लाई आसान हो जाएगी.

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देश की 5 प्रमुख सुरंगें
जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चिनौनी-नाशरी टनल
हम यहां देश की पांच बड़ी सुरंगों के बारे में बता रहे हैं. पहली सुरंग जोजिला के बारे में हमने काफी कुछ ऊपर बता दी है. अब हम बात जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चिनौनी-नाशरी टनल की कर रहे हैं. इसको डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनल भी कहा जाता है. इसकी कुल लंबाई 9.28 किलोमीटर है. यह उधमपुर जिले में चिनौनी को रामबन जिले के नाशरी से जोड़ती है. इस सुरंग से यात्रा में करीब 2 घंटे की कमी आई है.
हिमाचल प्रदेश में अटल टनल
अब बात हिमाचल प्रदेश की अटल टनल की करेंगे. यह टनल समुद्र तल से 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर है. इसकी कुल लंबाई 9.02 किलोमीटर है. अटल टनल को रोहतांग टनल के नाम से भी जाना जाता है. यह मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ती है.

बनिहाल-काजीगुंड टनल
बनिहाल-काजीगुंड टनल की बात करें तो यह जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर स्थित है. इसकी कुल लंबाई 8.45 किलोमीटर है. यह टनल पीर पंजाल होते हुए जाती है, जो बनिहाल और काजीगुंड को जोड़ती है. यह करीब 3 घंटें के सफर को कम करके 15 मिनट तक कर देती है. यह हर प्रकार से मौसम में यातायात के लिए चालू रहती है.
जेड-मोड़ सुरंग
जेड-मोड़ सुरंग को सोनमर्ग टनल भी कहा जाता है. यह जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग में है. इसकी कुल लंबाई 6.5 किलोमीटर है. यह टनल गगनगीर और सोनमर्ग के बीच स्थित है. भारी बर्फबारी या बारिश के बीच भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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