Quad Summit 2026: भारत चार देशों के समूह क्वाड की इस बार अध्यक्षता कर रहा है. 26 मई को देश की राजधानी नई दिल्ली में क्वाड की बैठक होने जा रही है. इसकी तैयारी लगभग पूरी की जा चुकी है. यह बैठक वाशिंगटन डीसी में क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक के लगभग एक साल बाद हो रही है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग होगी. इसमें हिंद प्रशांत क्षेत्र की मजबूती को बनाए रखने, व्यापार, सुरक्षा, एनर्जी समेत पश्चिम एशिया में जारी तनाव के अलावा और भी कई मुद्दों पर बातचीत व चर्चा हो सकती है.
इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई से ही भारत के दौरे पर है. जी हां, रुबियो भारत के चार दिवसीय यात्रा पर हैं और 26 मई को क्वाड समिट में भाग लेने के बाद उनकी इस आधिकारिक यात्रा का समापन हो जाएगा. रुबियो ने शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के बाद क्वाड को एक महत्वपूर्ण तंत्र बताया. उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “क्योंकि क्वाड चार देशों के बीच एक ऐसा मंच है जो न केवल कई प्रमुख मुद्दों पर रणनीतिक रूप से संरेखित हैं, बल्कि चार ऐसे देश हैं जिनके पास पारस्परिक हित के इन विषयों पर वैश्विक घटनाओं को अलग-अलग स्तर पर प्रभावित करने की क्षमता है.” उन्होंने आगे कहा, “मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि क्वाड, वास्तव में अपने मौजूदा स्वरूप में, राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ था. और वास्तव में, इसने तभी गति पकड़ी थी. यह आगे बढ़ चुका है.”
जी हां, क्वाड भारत सहित चार देशों का समूह है. इसमें भारत के अलावा अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. अमेरिका के अलावा इन देशों के भी विदेश मंत्री व प्रतिनिधि क्वाड मीटिंग में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं. यह समूह सदस्य देशों के अपने आपसी रिश्ते को और भी मजबूत करने में बहुत ही बड़ी भूमिका निभाता है. इस साल क्वाड मीटिंग की मेजबानी भारत कर रहा है, जो 26 मई को नई दिल्ली में होगी. आइए जानते हैं कि क्वाड क्या है और क्यों हुई थी इसकी स्थापना? इसके साथ ही जानेंगे कि इससे भारत को कितना फायदा है.

क्वाड क्या है?
भारत 26 मई को क्वाड देशों की मीटिंग की मेजबानी करने जा रहा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में यह बैठक देश की राजधानी दिल्ली में हो रही है. इस बीच कई लोग क्वाड को लेकर चर्चा कर रहे हैं. आखिर यह क्वाड क्या है, आइए इसके बारे में जानते हैं. क्वाड की बात करें तो यह भारत सहित कुल चार लोकतांत्रिक देशों का एक समूह है. इसमें भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. क्वाड का पूरा नाम क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (Quadrilateral Security Dialogue) है. क्वाड इन चार देशों का एक रणनीतिक समूह है, जो हिंद प्रशांत महासागर/इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने में अपनी बड़ी भूमिका निभाता है. इसके साथ ही इस ग्रुप के देश ट्रेड, सुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव को भी संतुलित करने में मदद करते हैं. इसी उद्देश्य से इस समूह की स्थापना हुई थी.
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कब हुई थी क्वाड की स्थापना?
क्वाड यानी क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग की स्थापना को लेकर दो वर्षों को खास माना जाता है. इनमें से एक है साल 2007 और दूसरा है साल 2017. जी हां, रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2007 में जापान के तब के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने पहली बार क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग यानी क्वाड को लेकर अपने विचार रखे थे. बताया जाता है कि तब उनका यह विचार आगे नहीं बढ़ सका था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया पर चीन के दबाव की वजह से उसने खुद को इस समूह से बाहर करने का फैसला कर लिया था. लेकिन अब बात आती है करीब 10 साल बाद 2017 की. जी हां, साल 2017 में एक बार फिर से क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग को लेकर चर्चा होने लगी. इसी साल भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एक साथ आए और क्वाड का गठन (पुनर्गठन) किया.
मतलब कि साल 2007 में जापान के तब के पीएम शिंजो आबे के द्वारा क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) का विचार रखा गया था, लेकिन इसे पूर्ण रूप मिला साल 2017 में. हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामकता को देखते हुए क्वाड का एक मजबूती के साथ गठन किया गया और इसमें शामिल ये चार देश हिंद प्रशांत के साथ अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा और रिश्ते को मजबूत करने में लग गए.

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भारत को क्वाड से कितना फायदा?
वैसे तो क्वाड से इसके सभी सदस्य देशों को काफी फायदा होता है, लेकिन अभी हम यहां बात भारत की कर रहे हैं. भारत को कई प्रकार के इससे फायदे होते हैं और आगे आने वाले दिनों में और भी फायदे होने की उम्मीद है. चीन, जो भारत का पड़ोसी है, इसका हिंद प्रशांत क्षेत्र में दबदबा के साथ कभी-कभी अधिक आक्रामकता भी दिखती है. इसकी इस चाल को संतुलित करने के लिए भारत को क्वाड से काफी फायदा मिलता है. क्वाड में अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की मदद और जापान व ऑस्ट्रेलिया के समर्थन से भारत चीन को कई मोर्चों पर स्थिर रखने और जरूरत पड़ने पर कूटनीति के तरीके से घेराबंदी करने में सफल होता है.
भारत क्वाड की मदद से अपनी समुद्री सुरक्षा को और भी मजबूत करता है. इसके लिए वह सदस्य देशों के साथ नौसैनिक अभ्यास भी करता रहता है. चूंकि क्वाड की स्थापना हिंद प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी की गई थी, इसी वजह से भारत को इस क्षेत्र में कई फायदे होते हैं, इनमें समुद्री सुरक्षा, समुद्री व्यापार, कई प्रकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान और जरूरत पड़ने पर खुफिया जानकारी को भी प्राप्त करना शामिल है.

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क्वाड देशों की मदद से भारत अपनी सीमाई सुरक्षा को दुरुस्त तो करता ही है इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर भी अपनी मौजूदगी को और भी ताकत के साथ प्रस्तुत करता है. इसके सदस्य होने के नाते भारत को कई ग्लोबल मंचों पर अपनी बात को आसानी से रखने में मदद मिलती है. अभी पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष जारी है. इसको देखते हुए क्वाड की होने वाली बैठक में भारत को इसमें भी फायदा होने की उम्मीद है. भारत ईरान और अमेरिका के बीच इस तनातनी को कम करने के लिए अपने कई सुझाव दे सकता है.
इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुल जाने का रास्ता साफ हो जाएगा. इसका फायदा भारत के साथ-साथ विश्व के कई देशों को भी मिलेगा. एक तरह से यह कहा जा सकता है कि क्वाड से भारत को तो फायदा होता ही है लेकिन इसके द्वारा भारत दुनिया के कई देशों को भी अलग-अलग तरीकों से मदद कर देता है. इसके अलावा क्वाड के जरिए भारत अपने व्यापार को बढ़ाने, दुर्लभ खनिज पदार्थों की सप्लाई, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मजबूती, इंफ्रास्ट्रक्चर, तेल आपूर्ति, देश की सुरक्षा और सहयोग के क्षेत्र में भी कई फायदे ले रहा है और भी लेता रहेगा.
26 मई को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक
भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी (Toshimitsu Motegi) और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 26 मई 2026 को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे.
जानकारी के अनुसार, एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए क्वाड के दृष्टिकोण के अनुरूप, मंत्री 1 जुलाई 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे. वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, चल रही क्वाड पहलों पर हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों और पारस्परिक चिंता के अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे.
वहीं, नई दिल्ली यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भारत के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर सकते हैं. इनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी संभव है. वहीं, यह बता भी दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने पीएम मोदी से मुलाकात और एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक पहले ही कर ली है.

2025 में क्वाड के विदेश मंत्रियों का संयुक्त वक्तव्य
बीते साल 21 जनवरी 2025 को क्वाड के विदेश मंत्रियों ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन से एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया था. भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस वक्तव्य में कहा गया था- “एक स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराने के लिए, आज वॉशिंगटन डी.सी. में हमारी, यानी संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के विदेश सचिव और ऑस्ट्रेलिया, भारत एवं जापान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई. हमारा प्रयास है कि इस क्षेत्र में कानून का शासन, लोकतांत्रिक मूल्य, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बने रहें और सुरक्षित रहें. क्वाड समूह के हम चार राष्ट्र इस बात पर सहमत हैं कि समुद्री क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानून, आर्थिक अवसर, शांति, स्थिरता और सुरक्षा, हिंद-प्रशांत के लोगों के विकास और समृद्धि में एक अहम भूमिका निभाते हैं. हम हर उस एकतरफा कार्रवाई का भी कड़ा विरोध करते हैं जो शांतिपूर्ण माहौल को जान-बूझकर खराब करने के उद्देश्य से की गई हो.”
इसमें आगे कहा गया था, “बढ़ते खतरों के मद्देनजर, हम क्षेत्रीय समुद्री, आर्थिक और प्रौद्योगिकी सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ, भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चैन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम आने वाले महीनों में क्वाड के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए भी तत्पर हैं और भारत की मेजबानी में होने वाले क्वाड नेताओं के आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए मुलाकातों का दौर जारी रखेंगे.”
