Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कई गंभीर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने कहा, मैं हाल ही में खबरों में रही कुछ बातों पर अपनी बात रखना चाहता हूं. मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं. भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ यानी सत्ता-विरोधी लहर एक बुनियादी ताकत है, जो बहुत तेजी से किसी भी सरकार के खिलाफ काम करने लगती है. यह किसी को नहीं छोड़ती.
उन्होंने आगे कहा कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था और वह अपनी लोकप्रियता के शिखर पर थीं, लेकिन इसके एक-दो साल के भीतर ही उन्हें जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा. राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा एक के बाद एक कई नेताओं के साथ हुआ है. कांग्रेस नेताओं के साथ भी ऐसा होता है और क्षेत्रीय दलों के साथ भी, लेकिन उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के साथ ऐसा क्यों नहीं होता, यह सवाल उठता है.
दो आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों (ECs) ने SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर आपत्ति जताई थी. साथ ही हरियाणा में पिछले 50 सालों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है. अचानक एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) गायब हो जाती है. महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है. अचानक यह गायब हो जाती है. उत्तर प्रदेश में भी सत्ता बदलती रहती है. कभी समाजवादी पार्टी, तो कभी BSP सत्ता में आती रही है. लेकिन बीते कुछ सालों से एंटी-इनकंबेंसी गायब हो गई है. मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही होता है, गुजरात में भी. यह हमारे लिए एक बुनियादी सवाल रहा है.
‘मिशन MP’ पर राहुल गांधी : मालवा से गरजेगी ‘छात्रों की गूंज’, 1 घंटे युवाओं से करेंगे सीधी बात
कुछ सालों से एंटी-इनकंबेंसी गायब हुई
उन्होंने कहा कि लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को तो समझ सकते हैं, लेकिन यह समझ नहीं पाते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है. सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती थी. उत्तर कोरिया में भी ऐसा नहीं है. इस धरती पर ऐसी कोई डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) नहीं है जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो. वोट से ही हमारे संविधान को ताकत मिलती है और वोट की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है. संविधान से हमारे कानून बनते हैं और कानूनों से हमारे संस्थान बनते हैं. यह एक चेन (कड़ी) है. अगर वोट ही खत्म हो गया, तो हमारा संविधान भी खत्म हो गया. अगर संविधान खत्म हो गया, तो हमारे कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं. अगर कानून गैर-कानूनी हैं, तो हमारे संस्थानों का कोई मतलब नहीं रह जाता. यहां मुख्य सवाल यह है कि यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं है. यह हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति पर हमला है. हम बार-बार यही कह रहे हैं कि वोटिंग प्रक्रिया में कोई समस्या है.
हमारी वोटिंग प्रणाली में अव्यवस्था हुई
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि भारतीय चुनाव (लोकसभा और विधानसभा) धांधली हो रही है. ज्ञानेश कुमार पर दो चुनाव आयुक्त सवाल उठा रहे हैं. मैं भी सवाल उठाता रहा हूं, लेकिन उन सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया. भारत के लोगों ने इस पर विश्वास किया. लेकिन भारत का संस्थागत ढांचा इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा था. ज्ञानेश कुमार को भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने चुना था. अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि हमारी वोटिंग प्रणाली में जो अव्यवस्था और नुकसान हुआ है. इसके लिए सीधे तौर पर ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं. वोट-चोरी से कानून-चोरी होती है. कानून-चोरी से संस्था-चोरी होती है. यह एक सिलसिला है जो चला है. अगर वोट चोरी हुआ है और संसद में बैठे सांसद चोरी हुए वोट के आधार पर वहां हैं, तो उनके द्वारा बनाया गया कोई भी कानून गैर-कानूनी है. साथ ही उनके द्वारा किया गया कोई भी संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी है.
‘सिस्टम की कई परतें हैं, सबसे ऊपर 6 लोग’, इंदौर में राहुल गांधी ने मोदी-शाह को लेकर क्या कहा?
