Shahzad Poonawala : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा बीजेपी के नेतृत्व को सौंप दिया. साथ ही पूनावाला ने पार्टी छोड़ने के पीछे का कारण निजी बताया है. 38 वर्षीय पूनावाला बीजेपी के सबसे मुखर प्रवक्ताओं में से एक रहे हैं. हालांकि, बीजेपी में शामिल होने से पहले वह कांग्रेस में थे और साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.
इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताया
खबर है कि शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताया. अब सभी की नजर इस बात पर है कि वह आगे किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं. इस बीच, शहजाद पूनावाला ने अपने एक पुराने इंटरव्यू का वीडियो क्लिप भी रीपोस्ट किया, जिसमें वह यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने पर विचार कर रहे हैं.
अपडेटेड बायो का स्क्रीनशॉट किया शेयर
इसके अलावा गुरुवार को शहजाद ने अपने अपेडेटेड बायो का स्क्रीनशॉट भी एक्स पर शेयर किया. अपडेटेड बायो में लिखा है कि धर्म- इस्लाम, संस्कृति- हिंदू, विचारधारा- भारतीय, लेखक- जीएसटी की यात्रा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आजीवन अनुयायी हैं. साथ ही इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि ये मेरा अपडेटेड बायो है.
कौन हैं शहजाद पूनावाल है?
शहजाद पूनावाला विपक्षी पार्टियों पर हमला और बीजेपी का बचाव के लिए जाने जाते हैं. वह बीते कुछ वर्षों में बीजेपी के सबसे चर्चित टीवी पैनलिस्ट और सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय आवाजों में से एक रहे हैं. हालांकि, उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मोदी का अनुयायी बताया. इसके अलावा उन्होंने इंस्टाग्राम पर खुद को बीजेपी का प्रवक्ता बताया है.
ऐसा रहा राजनीतिक सफर
शहजाद पूनावाला शुरू से ही भाजपाई नहीं रहे हैं. शहजाद ने साल 2008 में कांग्रेस ज्वाइन की थी और यही से उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत हुई थी. उन्होंने तेजी से पार्टी में तरक्की की. पुणे में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के उपाध्यक्ष, फिर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी मीडिया सेल की रिसर्च टीम के सदस्य और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव पद पर भी काम किया. इसी कड़ी में साल 2017 में उनके राजनीतिक करियर में एक बड़ा मोड़ आया, जब उन्होंने कांग्रेस के अंदर होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव को सबसे सामने सीधी चुनौती दी. उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए चुनाव में धांधली हुई थी. इस दौरान उन्होंने पारदर्शी और योग्यता आधारित चुनाव की मांग की. वहीं, सार्वजनिक तौर पर बगावत करने के बाद वह अलग-थलग पड़ गए और आखिर में उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया.
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News Source: PTI
