Social Media: दिल्ली के जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान PM मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर मेटा के इंडिया हेड पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है. उनके खिलाफ FIR दर्ज किया गया है. आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री पर काफी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायत पर कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स और भारत में मेटा (Meta) के प्रमुख के खिलाफ़ दो मामले दर्ज किए हैं.
IT एक्ट के तहत कार्रवाई
तेलंगाना बीजेपी की सोशल मीडिया कोर कमेटी के एक सदस्य की 29 जुलाई की शिकायत के बाद IT एक्ट की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित करना) और BNS की धारा 353 (2) (आरोपी व्यक्ति सक्षम गवाह होगा) और 336 (4) (जालसाज़ी) के तहत FIR दर्ज की गई. साइबर क्राइम के एक अधिकारी ने शुक्रवार को PTI को बताया कि ये मामले उन लोगों के खिलाफ़ दर्ज किए गए जिन्होंने पोस्ट किया था और इस बात पर भी कि कैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स ने इसकी इजाज़त दी. शिकायत पर ‘इंस्टाग्राम और फेसबुक यूज़र्स’ और भारत में मेटा के प्रमुख के खिलाफ़ FIR दर्ज की गई.
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग
शिकायतकर्ता ने कुछ ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स की जांच की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर पीएम मोदी के खिलाफ़ अपमानजनक कंटेंट प्रकाशित और प्रसारित किया था. शिकायत में कहा गया है कि यह कंटेंट देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ़ था. शिकायतकर्ता ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट के URL की जानकारी सौंपी. शिकायतकर्ता ने पुलिस से अनुरोध किया कि वे सोशल मीडिया अकाउंट्स और पोस्ट से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखें, अकाउंट्स चलाने वाले व्यक्तियों की पहचान करें, गहन जांच करें. इसके अलावा ज़रूरी अकाउंट विवरण प्राप्त करने तथा ज़रूरत पड़ने पर संबंधित डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए मेटा के साथ समन्वय करें.
दोषियों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई
तेलंगाना बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता एनवी सुभाष ने शुक्रवार को मांग की कि CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान PM मोदी को निशाना बनाकर मीम्स, अपमानजनक और आपत्तिजनक कंटेंट बनाने, फैलाने और उसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी कभी भी संगठित रूप से गाली-गलौज और चरित्र हनन का लाइसेंस नहीं बन सकती. उन्होंने कहा कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ बार-बार और संगठित रूप से सार्वजनिक तौर पर गाली-गलौज करना अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में आता है या यह कानूनी कार्रवाई के लायक कदाचार है. सुभाष ने एक बयान में कहा कि संविधान आज़ादी की रक्षा करता है, लेकिन यह कानून तोड़ने को सही नहीं ठहराता.
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News Source: PTI
