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सूखने की कगार पर मुंबई की झीलें, कर्नाटक में 12.48 प्रतिशत बचा उपयोगी पानी, खेती पर संकट!

by Neha Singh 29 June 2026, 6:29 PM IST
29 June 2026, 6:29 PM IST
Water Scarcity in India

Water Scarcity in India: भारत में भीषण गर्मी के बाद लोगों को मानसून का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार बहुत धीमी है. देश की फाइनेंशियल कैपिटल मुंबई इस समय पानी के संकट से जूझ रही है. शहर की प्यास बुझाने वाली सात बड़ी झीलों और तालाबों में पानी का लेवल लगातार कम हो रहा है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि इन तालाबों में अब अपनी कुल कैपेसिटी का 7 प्रतिशत से भी कम पानी बचा है. इसी तरह कर्नाटक में भी जलाशयों में पानी की कमी आई है. मानसून की रफ्तार लगे ब्रेक के कारण अब तक पूरे देश में बारिश में 43 प्रतिशत की कमी आई है. 

इसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी, इंडस्ट्री और सबसे जरूरी, खेती पर पड़ सकता है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कई शहरों में पानी की कटौती बढ़ सकती है, जिससे किसानों के लिए अपनी फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा, इसकी सबसे बड़ी वजह इस साल का देर से आया मानसून और नॉर्मल से कम बारिश है.

मुंबई में सूखी झीलें

मुंबई में पानी का गंभीर संकट है क्योंकि इसकी सात प्रमुख झीलों में कुल लाइव स्टोरेज 7 प्रतिशत से भी कम हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है. पिछले साल इसी समय में, इन सात झीलों में पानी का स्टॉक 39.5 प्रतिशत था. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के हाइड्रोलिक इंजीनियर डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक, सुबह 6 बजे (सोमवार को) सात रिज़र्वॉयर में कुल मिलाकर 1,00,279 मिलियन लीटर पानी था, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज कैपेसिटी का 6.93 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 5,71,670 मिलियन लीटर (39.5 प्रतिशत ) था.

mumbai water stock

भाटसा, अपर वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, मिडिल वैतरणा, तुलसी और विहार, ये सात झीलों वाला पूरा सिस्टम बनाते हैं जो मुंबई और उसके मेट्रोपॉलिटन एरिया को पीने का पानी सप्लाई करता है. इनकी कुल उपयोगी स्टोरेज कैपेसिटी 14.47 लाख मिलियन लीटर है और ये मुंबई को रोजाना लगभग 4,000 मिलियन लीटर पीने का पानी सप्लाई करते हैं. डेटा के मुताबिक, चार बड़े जलाशयों अपर वैतरणा, मोदक सागर, तानसा और मिडिल वैतरणा में कुल मिलाकर 46,192 मिलियन लीटर पानी बच गया है, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज कैपेसिटी का 6.65 प्रतिशत है.

बारिश से केवल इतनी भरीं झीलें

सुबह 6 बजे खत्म हुए 24 घंटे के दौरान, तुलसी में 179 mm, विहार में 112 mm और मोदक सागर में 38 mm बारिश हुई, जबकि भांडुप कॉम्प्लेक्स में 191 mm बारिश रिकॉर्ड की गई. 17 जून को, मुंबई को पीने का पानी सप्लाई करने वाले सात जलाशयों में पानी का स्टॉक 1,44,918 मिलियन लीटर या उनकी कुल उपयोगी स्टोरेज क्षमता का 10.01 प्रतिशत था. दक्षिण-पश्चिम मानसून में देरी और इस साल के आखिर में मजबूत अल नीनो इफेक्ट के कारण शहर की पानी की सप्लाई को लेकर चिंताएं जताई गई हैं. हालांकि, जलाशयों में अभी 2024 में इसी समय की तुलना में ज़्यादा पानी है, जब इस दिन यह 5.43 प्रतिशत था.

मानसून आमतौर पर 10 जून के आसपास मुंबई पहुंचता है, लेकिन इस साल इसकी शुरुआत में देरी हुई है. पिछले साल, मानसून शहर में मई में आया था, जो इसकी सामान्य शुरुआत की तारीख से काफी पहले था. मानसून के देर से आने और धीमी रफ़्तार की वजह से BMC को तालाबों के लेवल पर करीब से नजर रखनी पड़ रही है और पानी बचाने के तरीके अपनाने पड़ रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार के वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट के निर्देशों के बाद, BMC ने पीने के पानी के मैनेजमेंट के लिए बचत के तरीके लागू करना शुरू कर दिया है. इसलिए, हाइड्रोलिक इंजीनियर डिपार्टमेंट ने इस महीने की शुरुआत में एक डिटेल्ड सर्कुलर जारी किया जिसमें पानी कटौती के समय उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताया गया है.

गोवा में हालात सुधरे

हाल ही में, मानसून की धीमी रफ्तार की वजह से, गोवा के कई बड़े तालाबों में पानी का लेवल खतरनाक लेवल तक गिर गया था, जिससे राज्य में पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ गई थी. उस समय सरकार ने बताया था कि तालाबों में सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत पानी बचा है. सबसे बड़े सेलौलिम डैम में पानी का लेवल लगभग 27 प्रतिशत, अंजुनेम डैम में 9.9 प्रतिशत और म्हैसल डैम में लगभग 21 प्रतिशत था. हालांकि, 22 से 26 जून के बीच हुई भारी बारिश के बाद हालात में काफी सुधार हुआ है. वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, साउथ गोवा के सबसे बड़े सेलौलिम डैम में लगातार पानी आ रहा है. चापोली डैम में पानी 40 प्रतिशत से ज्यादा है, इसलिए कैनाकोना इलाके में पानी की सप्लाई को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है. इस बीच, म्हैसल डैम में भी पानी लेवल बढ़ रहा है.

rain

नॉर्थ गोवा में अंजुनेम डैम, जो कुछ दिन पहले बहुत नीचे चला गया था, अब गोवा और महाराष्ट्र के कैचमेंट एरिया में भारी बारिश की वजह से तेजी से भर रहा है. हालांकि हाल की बारिश ने पानी की तुरंत की दिक्कत को काफी हद तक टाल दिया है, लेकिन अभी सभी तालाब भरे नहीं हैं. इसलिए, आने वाले हफ्तों में लगातार अच्छी बारिश राज्य की लंबे समय की पानी की सुरक्षा और खेती, दोनों के लिए बहुत जरूरी होगी.

दक्षिण भारत में स्थिति

कर्नाटक में प्रमुख जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले लगभग 46 प्रतिशत की कमी आई है. ताजा जानकारी के मुताबकि, कर्नाटक के सभी प्रमुख और सिंचाई बांधों में कुल उपयोगी पानी घटकर 12.48 प्रतिशत रह गया है. पिछले साल इसी समय इन जलाशयों में 58 प्रतिशत लाइव स्टॉक मौजूद था. कर्नाटक के तत्ताहल्ला बांध में केवल 24.63% पानी बचा है. बेंगलुरू और मैसूर को पानी देने वाले कावेरी बेसिन में सबसे ज्यादा कमी आई है. यहां कुल क्षमता का केवल 15.7 प्रतिशत पानी बचा है. मध्य कर्नाटक की लाइफलाइन कृष्णा बेसिन में केवल 50 प्रतिशत पानी बच गया है. कर्नाटक में इस साल सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है.

तमिलनाडु के वैगई में सिर्फ 15.17% पानी बचा है और पेरियार में 29.21% पानी है. चेन्नई में ग्राउंडवॉटर लेवल बहुत गिर गया है, जिससे टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है. तेलंगाना में प्रियदर्शिनी जुराला डैम में 46% पानी है और केरल के मुख्य जलाशयों में 30% से कम पानी है.

मानसून की धीमी रफ्तार

भारत में मानसून की शुरुआत अंडमान निकोबार से होती है और धीरे-धीरे यह दक्षिण पश्चिम राज्यों तक पहुंचता है. जून की शुरुआत में केरल में बारिश होने लगती है और दूसरे हफ्ते में महाराष्ट्र तक बादल बरस जाते हैं. इसके बाद जून के तीसरे हफ्ते तक दिल्ली, पंजाब, यूपी समेत उत्तर भारत के राज्यों में बारिश होती है. लेकिन इस बार मानसून महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों तक आकर रुक गया है. कमजोर मानसूनी हवाएं और अल नीनो इफेक्ट के कारण मानसून में देरी हो रही है.

खेती पर असर

भारत की लगभग 50 प्रतिशत कृषि भूमि आज भी बारिश पर निर्भर है. ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है या लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है. कई राज्यों में किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. IMD ने कहा, दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी उत्तर की ओर प्रगति, साथ ही इक्वेटोरियल प्रशांत महासागर पर हाल ही में अल नीनो की स्थिति बनने से, खरीफ फसलों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है, जिन्हें फलने-फूलने के लिए समय पर बारिश की जरूरत होती है.

farming

गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य कृषि प्रधान राज्यों में बारिश की सुस्त रफ्तार किसानों की चिंता बढ़ा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर तिलहन, दलहन, सब्जियों और फलों के उत्पादन पर देखने को मिल सकता है. मुंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और कपास जैसी फसलें पर्याप्त वर्षा पर निर्भर रहती हैं. यूपी-बिहार में धान की फसलें प्रभावित हो सकती हैं. यदि इन फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है तो खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इसका असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल से बनने वाले अनेक खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन जिलों की पहचान करने के निर्देश दिए जहां कम या असमान बारिश की संभावना है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसल के हिसाब से इमरजेंसी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए. मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पानी बचाने, नमी मैनेजमेंट, इंटर-क्रॉपिंग और दूसरे फसल पैटर्न पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए.

कब मिलेगी राहत

राहत की बात यह है कि अगले दो-तीन दिनों में भारत के ज्यादातर राज्यों में सूखे और भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है. गोवा में मानसून सक्रिय हो चुका है. अगले दो से तीन दिनों में मानसून मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, बिहार और झारखंड में आगे बढ़ेगा, जिससे खेती और फसल की बुआई को काफी राहत मिल सकती है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अभी चल रही तेज गर्मी भी अगले तीन से पांच दिनों में मानसूनी हवाओं के आने से कम हो जाएगी और तापमान में तेजी से गिरावट आएगी.

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