Shiv Sena (UBT): शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने छह बागी सांसदों के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उन्हें डर था कि पार्टी का कांग्रेस में विलय हो सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि एकजुट शिवसेना ने हमेशा हिंदुत्व और ‘भूमिपुत्रों’ (स्थानीय लोगों) का समर्थन किया है. चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी में होने वाले संभावित बंटवारे पर अपनी पहली टिप्पणी में ठाकरे ने कहा कि शिवसेना किसी के साथ विलय करने के लिए नहीं बनी है.
शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस
अपने पिता दिवंगत बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर मुंबई में शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इसे मराठी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने और हिंदुत्व की रक्षा के लिए बनाया गया था. उन्होंने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की जिसमें कहा गया था कि उन्हें डर था कि शिवसेना (UBT) कांग्रेस में विलय हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर हम 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद बीजेपी के साथ विलय नहीं हुए, तो हम कांग्रेस के साथ कैसे विलय हो सकते हैं? मुझे डर है कि महाराष्ट्र बीजेपी का कहीं शिंदे सेना में विलय न हो जाए.
विपक्ष को खत्म कर रही बीजेपी
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे गंभीर राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन उसने कभी भी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा कि बीजेपी कर रही है. व्हिप की अनदेखी करते हुए गुरुवार को नई दिल्ली में हुई संसदीय दल की एक अहम बैठक में शिवसेना (UBT) के नौ में से छह लोकसभा सांसद शामिल नहीं हुए. बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों में नागेश आष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल थे. पूर्व मुख्यमंत्री ने उन सांसदों को चुनने के लिए मतदाताओं से माफ़ी मांगी, जो अब पाला बदलने की तैयारी में दिख रहे हैं. ठाकरे ने कहा कि शिवसेना का जन्म किसी और पार्टी में विलय के लिए नहीं हुआ था. इसे मराठी लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने और हिंदुत्व की रक्षा के लिए बनाया गया था.
उन्होंने दावा किया कि 2019 में उन्होंने ज़िम्मेदारी की भावना के कारण मुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया था, क्योंकि बीजेपी ने एकजुट शिवसेना के साथ धोखा किया था. उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा, जो अक्सर उनके काम करने के तरीके और पार्टी कार्यकर्ताओं व आम लोगों से उनकी कथित दूरी की आलोचना करते रहते हैं.
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा हो रहा कम
उन्होंने कहा कि अगर मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने और पूरे राज्य का दौरा करने के लिए बाहर नहीं निकलता, तो वे सभी चुनाव कैसे जीतते? (2024) लोकसभा चुनावों के दौरान, मैंने हर निर्वाचन क्षेत्र में सात से दस बैठकें कीं. वे (बागी नेता) शिव सैनिकों और मतदाताओं के भरोसे की वजह से ही सांसद बने. ठाकरे ने दावा किया कि देश एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं वाली राह पर बढ़ रहा है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की दलबदल कराने की राजनीति लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है. उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का भरोसा कम हो रहा है.
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News Source: PTI
