Home राज्यमध्य प्रदेश MP के सागर में गलत दवाइयों ने बच्चे के जीवन में किया अंधेरा, डॉक्टर ने 19 महीने के मासूम की छीन ली आंखें

MP के सागर में गलत दवाइयों ने बच्चे के जीवन में किया अंधेरा, डॉक्टर ने 19 महीने के मासूम की छीन ली आंखें

by Nitin Thakur 29 June 2026, 12:09 PM IST (Updated 3 July 2026, 1:40 PM IST)
29 June 2026, 12:09 PM IST (Updated 3 July 2026, 1:40 PM IST)
Child Vision Loss

Child Vision Loss: क्या आप सोच सकते हैं कि आपके बच्चे को मामूली सर्दी-जुकाम हो, आप उसे सरकारी अस्पताल लेकर जाएं और वहां से लौटें तो आपका बच्चा हमेशा के लिए अंधा हो चुका हो. जी हां, कलेजा कंपा देने वाली यह खौफनाक हकीकत सामने आई है मध्य प्रदेश के सागर से, जहां अस्पताल की एक ओपीडी पर्ची और डॉक्टर की लिखी चंद दवाइयों ने 19 महीने के एक मासूम की जिंदगी में हमेशा के लिए अंधरा कर दिया. मामला बण्डा तहसील के सिविल अस्पताल का है.

मामूली सर्दी का इलाज कराने गया था पिता

ग्राम भूसा कमलपुर का रहने वाला एक बेबस पिता इन्द्राज विश्वकर्मा अपने 1 साल 7 महीने के फूल जैसे बेटे विनय को लेकर अस्पताल पहुंचा था. बच्चे को सिर्फ मामूली सर्दी थी और आंखों में हल्की लाली. पिता को लगा डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, दो बूंद दवा डालेंगे और बच्चा ठीक हो जाएगा. लेकिन उसे क्या पता था कि वह अपने बच्चे को इलाज कराने नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी का उजाला छीनने वाले सिस्टम के हवाले करने आया है. अस्पताल में तैनात उस डॉक्टर ने बच्चे को देखा, एक आई ड्रॉप लिखी, पैरासिटामोल सिरप दिया और एक इंजेक्शन ठोक दिया.

दवा देते ही तड़पने लगा बच्चा

दवा शरीर के अंदर जाते ही मासूम विनय तड़पने लगा. तबीयत सुधरने के बजाय उसका पूरा शरीर बेकाबू होने लगा. डॉक्टर की उस रहस्यमयी दवा ने चंद घंटों के भीतर मासूम के जिस्म पर ऐसा खतरनाक रिएक्शन किया कि डॉक्टर खुद घबरा गए और आनन फानन में उसे सागर और फिर वहां से भोपाल रेफर कर दिया गया. बदहवास पिता भोपाल के एम्स अस्पताल भागा, लेकिन वहां जो डॉक्टरों ने कहा उसने पूरे मध्य प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा जड़ दिया. एम्स के डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि बण्डा अस्पताल में दिए गए गलत और जानलेवा इलाज के कारण मासूम विनय की आंखों की रोशनी हमेशा-हमेशा के लिए जा चुकी है.

19 महीने के बच्चे का जीवन बर्बाद

वो बच्चा, जो कल तक दुनिया देख रहा थाए आज पूरी तरह नेत्रहीन हो चुका है. अब इस मामले में पीड़ित पिता ने बण्डा थाने में रोते हुए गुहार लगाई है. पिता का कहना है कि वह उस ‘कातिल डॉक्टर’ को चेहरे से पहचानता है, लेकिन नाम नहीं जानता. पुलिस ने जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन सवाल ये है कि क्या वो डॉक्टर वाकई कोई डिग्रीधारी था या कोई ऐसा जो मासूमों की जिंदगी से खेल रहा है. आखिर उस आई ड्रॉप और इंजेक्शन में ऐसा क्या था जिसने 19 महीने के बच्चे को उम्रभर का अंधापन दे दिया.

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