Home Top News ओडिशा में समुद्री सुरक्षा हुई अभेद्यः पारादीप, धामरा और गोपालपुर बंदरगाहों पर कड़ा पहरा

ओडिशा में समुद्री सुरक्षा हुई अभेद्यः पारादीप, धामरा और गोपालपुर बंदरगाहों पर कड़ा पहरा

by Sanjay Kumar Srivastava 4 June 2026, 7:13 PM IST (Updated 4 June 2026, 7:14 PM IST)
4 June 2026, 7:13 PM IST (Updated 4 June 2026, 7:14 PM IST)
ओडिशा पुलिस तटीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है

Coastal Security: ओडिशा पुलिस समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. राज्य की तटरेखा 575 किलोमीटर लंबी है. डीजीपी वाईबी खुरानिया ने कहा कि ओडिशा तट की हवाई निगरानी ड्रोन के जरिए की जा रही है, जबकि समुद्री गश्त तेज गति से चलने वाली इंटरसेप्टर नौकाओं के जरिए की जा रही है. डीजीपी ने कहा कि तटीय सुरक्षा देश की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह राज्य के आर्थिक विकास, समुद्री व्यापार और जन सुरक्षा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है.

574.7 किलोमीटर लंबी है तटरेखा

उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि ओडिशा की तटरेखा 574.7 किलोमीटर लंबी है और पारादीप, धामरा और गोपालपुर जैसे प्रमुख बंदरगाह राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. खुरानिया ने कहा कि ओडिशा पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में तटीय सुरक्षा में उल्लेखनीय प्रगति की है.

वर्तमान में, तटीय क्षेत्र के 18 समुद्री पुलिस स्टेशनों में 700 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं. राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में तटीय सुरक्षा विंग को 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. उन्होंने बताया कि ओडिशा तट पर स्थित सभी 18 समुद्री पुलिस स्टेशनों में तटीय सुरक्षा की निगरानी के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है. डीजीपी ने कहा कि राज्य के सभी मछली पकड़ने के केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने आगे बताया कि ओडिशा देश का पहला राज्य है जहां भुवनेश्वर में एक केंद्रीकृत कमांड सेंटर स्थापित किया गया है, जो गश्ती नौकाओं, ड्रोन और अन्य उपकरणों से प्राप्त सभी लाइव फीड की निगरानी करेगा.

ड्रोनों के जरिए समुद्री गश्त

खुरानिया ने कहा कि पारादीप, गोपालपुर और धामरा बंदरगाहों के माध्यम से राज्य के नीली अर्थव्यवस्था (बंदरगाह आधारित अर्थव्यवस्था) की ओर बढ़ने के साथ-साथ समुद्र से भी राज्य को खतरा है. डीजीपी ने कहा कि समुद्र के रास्ते व्यापार बढ़ने से तटों पर असामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की संभावना है. इसलिए मादक पदार्थों, असामाजिक तत्वों या अवैध प्रवासन को रोकने के लिए हमें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है. इसके अलावा 15 तीव्र अवरोधक नौकाओं, 5 ड्रोनों और 5 किराए पर ली गई ट्रॉलरों के माध्यम से समुद्री गश्त को मजबूत किया गया है.

उन्होंने आगे कहा कि भुवनेश्वर स्थित कमान, नियंत्रण और प्रशिक्षण केंद्र तटीय सुरक्षा गतिविधियों के समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने बताया कि ‘नभमित्र’ ऐप के माध्यम से मछली पकड़ने वाली नौकाओं की आवाजाही पर नज़र रखी जा रही है और सुरक्षा प्रणाली में नौसेना और तटरक्षक बल के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं भी शामिल की गई हैं. अतिरिक्त महानिदेशक (तटीय सुरक्षा) अरुण बोथरा ने समुद्र और तट में सुरक्षा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और उनकी सुरक्षा व्यवस्थाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की.

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News Source: PTI

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