Home व्यापार रक्षाबंधन की खरीदारी से बाज़ारों में रौनक, 25 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान

रक्षाबंधन की खरीदारी से बाज़ारों में रौनक, 25 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान

by Kamlesh Kumar Singh 25 August 2026, 2:35 PM IST
25 August 2026, 2:35 PM IST
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन पर्व में अब केवल चार दिन शेष रहने के साथ ही दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में खरीदारी अपने चरम पर पहुंच गई है. दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली, लक्ष्मी नगर तथा विभिन्न स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. शाम के समय बाजारों में विशेष रौनक है और व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन का उत्साह पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक दिखाई दे रहा है. वहीं, देश भर के अन्य राज्यों के बाजारों में भी राखी की त्यौहारी खरीदारी को लेकर ग्राहकों में भारी उत्साह है.

हाथों से तैयार की गईं राखियां

इसी क्रम में चांदनी चौक के सांसद एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल के कार्यालय में महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों तथा कारीगरों ने देशभक्ति एवं राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित विशेष थीम आधारित राखियों के निर्माण का लाइव प्रदर्शन किया. इस अवसर पर महिला कारीगरों ने अपने हाथों से तैयार अनूठी राखियों का प्रदर्शन भी किया. श्री खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष पारंपरिक राखियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा तथा ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प से प्रेरित राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. विशेष रूप से ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ की मांग लगातार बढ़ रही है.

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ब्रह्मोस राखी का क्रेज

उन्होंने बताया कि युवाओं और बच्चों में विशेष रूप से ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर असाधारण उत्साह देखा जा रहा है. वहीं, महिलाओं के बीच ‘नारी वंदन राखी’ तथा ‘लखपति दीदी राखी’ विशेष लोकप्रिय हो रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं. श्री खंडेलवाल ने कहा कि कैट को देशभर के व्यापारिक संगठनों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन पर केवल राखियों का कारोबार लगभग ₹25 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि अकेले दिल्ली में यह कारोबार ₹4 हजार करोड़ के आसपास रहने की संभावना है. यदि उपहार, मिठाइयों, परिधानों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुओं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य त्योहारी उत्पादों को भी शामिल किया जाए तो रक्षाबंधन से संबंधित कुल व्यापार ₹30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है.

खूब बिक रहे हैं गिफ्ट पैक

उन्होंने बताया कि इस वर्ष बाजारों में उपहार पैकेज, चॉकलेट हैम्पर, ड्राई फ्रूट गिफ्ट बॉक्स, हस्तशिल्प उत्पाद, एथनिक परिधान और पारंपरिक मिठाइयों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है. ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मौजूदगी के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ता स्थानीय बाजारों में जाकर खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, जिससे बाजारों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है. श्री खंडेलवाल ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली राखियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं. इनमें नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, जनजातीय बांस राखी, मुंबई की सिल्क राखी तथा बिहार की मधुबनी कला राखी प्रमुख हैं. पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ तैयार की गई बीज (सीड) राखियों और प्राकृतिक सामग्री से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी लगातार बढ़ रही है.

आत्मनिर्भरता का उत्सव

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि अब यह स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र गौरव का भी उत्सव बन चुका है. स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग से लाखों महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है. श्री खंडेलवाल ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि आगामी सभी त्योहारों पर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाएं. उन्होंने कहा, “आज की स्वदेशी राखी केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र गौरव का सशक्त प्रतीक बन चुकी है. प्रत्येक राखी भारतीय कारीगरों के श्रम, भारतीय संस्कृति की समृद्धि और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संदेश लेकर आ रही है.”

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