Travel Guide to 12 Jyotirlingas: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, आस्था और आध्यात्म का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी लाइनें देखने को मिलती हैं. हालांकि, भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व सबसे अलग माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन 12 जगहों पर भगवान शिव स्वयं ज्योति स्वरूप में प्रकट हुए थे. यही वजह है कि हर साल लाखों नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालु सावन के महीने में इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं. अगर आप भी सावन के महीने में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले से सही जानकारी लेना ना भूलें. सही जानकारी आपकी यात्रा को न सिर्फ आसान बल्कि यादगार भी बना देगी. यही वजह है कि आज हम भी आपके लिए देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की ट्रेवल गाइड लेकर आए हैं.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात
गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है. अरब सागर के किनारे बना ये मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला और समृद्ध इतिहास के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. बीती कुछ सदियों में ये मंदिर कई बार टूटा और बना है. इसके बाद भी लोगों के दिल में सोमनाथ मंदिर के लिए आस्था कभी कम नहीं हुई. ऐसे में अगर आप भी सावन के पावन महीने में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है. यहां आने के लिए वेरावल रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है. वहीं, दीव एयरपोर्ट पहुंचकर आप टैक्सी सर्विस लेकर आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं. शाम के समय समुद्र किनारे मंदिर का नजारा और लाइट एंड साउंड शो टूरिस्टों का दिल जीत लेता है.
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है. इस मंदिर को शिव भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. बाबा विश्वनाथ का ये धाम गंगा नदी के तट पर बना हुआ है. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. सावन में यहां का माहौल पूरी तरह शिवमय हो जाता है. अगर आप यहां आना चाहते हैं तो वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन या लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे अच्छे ऑप्शन हैं. वहां से टैक्सी या ऑटो लेकर गोदौलिया चौराहा पहुंचा जा सकता है. यहां से सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ दूरी पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना होता है.
महाकालेश्वर, उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग अपनी अनूठी पहचान के लिए जाना जाता है. ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है. यहां होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती पूरी दुनिया में मशहूर है. सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने की इच्छा रखते हैं. अगर आप भी इस भव्य आरती में शामिल होना चाहते हैं तो, पहले से ऑनलाइन बुकिंग करना बेहतर रहेगा. इसके अलावा महाकालेश्वर मंदिर पहुंचना भी काफी आसान है. उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से सिर्फ कुछ ही किलोमीटर दूर है. यहां से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाती है. क्षिप्रा नदी के किनारे बसे इस शहर का आध्यात्मिक वातावरण यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभव देता है.
बैद्यनाथ धाम, देवघर
झारखंड के देवघर में स्थित बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन स्थल के रूप में जाना जाता है. सावन में यहां कांवड़ यात्रा का बहुत बड़ा महत्व होता है. लाखों श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 100 किलोमीटर पैदल चलकर बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक करते हैं. यहां पहुंचने के लिए फ्लाइट और ट्रेन दोनों ही अच्छे ऑप्शन है. मंदिर से देवघर एयरपोर्ट और जसीडीह रेलवे स्टेशन, दोनों ही नजदीक हैं. इसके अलावा आपको आसानी से बस और टैक्सी की सुविधा भी मिल जाती है.

केदारनाथ, उत्तराखंड
उत्तराखंड के हिमालय में 3,580 मीटर की ऊंचाई पर बना केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मुश्किल लेकिन सबसे रोमांचक और आध्यात्मिक यात्रा मानी जाती है. यहां पहुंचने के लिए पहले हरिद्वार या ऋषिकेश से सड़क के रास्ते सोनप्रयाग जाना होता है. इसके बाद गौरीकुंड तक शटल सेवा मिलती है. फिर लगभग 16 से 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. जिन श्रद्धालुओं के लिए पैदल चलना मुश्किल या फिर संभव नहीं है, उनके लिए हेलीकॉप्टर, घोड़ा और पालकी की सुविधा भी उपलब्ध रहती है. बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों के बीच बना बाबा केदारनाथ का ये खूबसूरत मंदिर हर श्रद्धालु को जीवनभर याद रहने वाला अनुभव देता है.
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, श्रीशैलम
आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण भारत का कैलाश भी कहा जाता है. ये मंदिर घने जंगलों और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बना हुआ है. यहां का शांत वातावरण आने वाले लोगों के मन को सुकून से भर देता है. यहां पहुंचने के लिए हैदराबाद सबसे नजदीकी बड़ा शहर है. मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. रेलवे स्टेशन से आसानी से टैक्सी और बस की सेवाएं मिल जीत हैं. सावन के महीने में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में विशेष पूजा और सांस्कृतिक आयोजन होता है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
त्र्यंबकेश्वर, नासिक
महाराष्ट्र के नासिक में स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग अपनी धार्मिक विशेषता की वजह से बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि यहां के शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास है. इतना ही नहीं, गोदावरी नदी का उद्गम भी यहीं माना जाता है. त्र्यंबकेश्वर पहुंचने के लिए नासिक रोड रेलवे स्टेशन और ओझर एयरपोर्ट सबसे बेहतर ऑप्शन है. यहां पहुंचने के लिए सड़क का रास्ता भी काफी आसान है. सावन के महीने में यहां रुद्राभिषेक कराने के लिए लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं.
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ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के बीच मंधाता द्वीप पर बना ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि ऊपर से देखने पर ये द्वीप ‘ऊं’ के आकार का दिखाई देता है. अगर आप भी सावन में ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां पहुंचने के लिए इंदौर सबसे नजदीकी बड़ा शहर है. वहीं, खंडवा प्रमुख रेलवे स्टेशन है. नर्मदा नदी के किनारे बना ये मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी भक्तों को पसंद है. यहां आकर लोग नर्मदा नदी की परिक्रमा भी करते हैं.

भीमाशंकर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वतों में बसे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना लोगों के लिए अलग ही अनुभव होता है. साथ ही ये जगह नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. घने जंगल, पहाड़ और झरनों के बीच बना भगवान भोलेनाथ का ये मंदिर मानसून के दिनों में और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है. अगर आप यहां जाना चाहते हैं तो, पुणे या मुंबई सबसे अच्छे ट्रांजिट पॉइंट हैं. हालांकि, सावन में भारी बारिश और कोहरे की वजह से सड़क यात्रा में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. यही वजह है कि सावन में भीमांशकर मंदिर में दर्शन करने के लिए पहले से योजना बनाकर निकलना अच्छा रहता है.
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, द्वारका
गुजरात के द्वारका के पास स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के खास धामों में गिना जाता है. यहां स्थापित भगवान शिव की बड़ी प्रतिमा दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी तरफ खींच लेती है. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए आप सड़क, ट्रेन या फिर फ्लाइट, तीनों तरीकों से आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां के लिए द्वारका रेलवे स्टेशन और जामनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीक पड़ते हैं. आप इन दोनों ही जगह से टैक्सी या स्थानीय वाहन लेकर मंदिर दर्शन के लिए आसानी से पहुंच सकते हैं.
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रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग, रामेश्वरम
तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग का महत्व इसलिए भी खास है, क्योंकि ये चार धाम यात्रा का हिस्सा है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका जीतने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना करके पूजा की थी. इसके अलावा मंदिर के 22 पवित्र कुंडों में नहाने का भी अलग धार्मिक महत्व है. वहीं, रामेश्वरम पहुंचने के लिए मदुरै एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है. इसके अलावा रामेश्वरम रेलवे स्टेशन सीधे देश के कई शहरों से जुड़ा हुआ है. पंबन ब्रिज से गुजरते हुए समुद्र के बीच का सफर इस यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है.

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के एलोरा गुफाओं के पास स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है. औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) यहां का सबसे नजदीकी शहर है. यहां हवाई, रेल और सड़क तीनों रास्तों से आसानी से पहुंचा जा सकता है. सावन के महीने में मंदिर के दर्शन का समय भी बढ़ा दिया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर सकें. एलोरा की विश्व प्रसिद्ध गुफाएं देखने का मौका भी इसी यात्रा में मिल जाता है.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप सावन 2026 में इन पवित्र धामों की यात्रा करने की सोच रहे हैं तो कुछ बातों का खासतौर से ध्यान रखें. होटल, ट्रेन और फ्लाइट की बुकिंग पहले से कर लें क्योंकि सावन में भारी भीड़ रहती है. इसके अलावा बारिश का मौसम होने की वजह से रेनकोट, छाता और अतिरिक्त कपड़े जरूर साथ रखें. जहां पैदल यात्रा करनी हो, वहां आरामदायक जूते पहनें. मंदिरों में वीआईपी दर्शन या विशेष आरती की सुविधा चाहिए तो पहले से ऑनलाइन जानकारी जरूर ले लें. साथ ही स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.
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