Hariyali Teej: महिलाएं सावन का बेसब्री से इंतजार करती हैं. सावन के महीने में महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं और श्रृंगार करती हैं. सावन में सबसे खास दिन हरियाली तीज का होता है. हरियाली तीज के दिन ही भगवान शिव और मां पार्वती का मिलन हुआ था, इसलिए सभी सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और महादेव से उनके रिश्ते में प्रेम बनाए रखने के लिए प्रार्थना करती हैं. कुंवारी लड़कियां इस दिन अच्छे जीवनसाथी के लिए व्रत रखती हैं. इस खबर में आप जानेंगे कि हरियाली तीज की सही तिथि और शुभ मुहूर्त क्या हैं. साथ ही आप जानेंगे कि हरियाली तीज की पूजा कैसे की जाती है.
कब है हरियाली तीज
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है. इस सावन यह त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा. हरियाली तीज 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी. इसलिए उदया तिथि के अनुसार, हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा.
हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त
प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 05:28 बजे से सुबह 09:08 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:35 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 01:08 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 बजे से दोपहर 03:42 बजे तक

हरियाली तीज और हरे रंग का महत्व
हरियाली तीज का त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार और भक्ति से जुड़ा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. देवी पार्वती की तपस्या सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन ही पूरी हुई थी. इसलिए सुहागिन महिलाएं अपने खुशहाल दंपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं और प्रार्थना रखती हैं. कुंवारी लड़कियां भी अच्छे और योग्य जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं.
इस दिन हरे रंग का खास महत्व होता है. महिलाएं हरी साड़ी हरी चूड़ियां पहनती हैं. 16 श्रृंगार करती हैं. हरा रंग सावन के महीने की हरियाली और प्रकृति की ताजगी का प्रतीक माना जाता है.
हरियाली तीज की पूजा विधि
हरियाली तीज की सुबह नहाकर, साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की तैयारी करें. धार्मिक परंपरा के अनुसार, मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, भगवान गणेश, देवी पार्वती और उनकी सहेलियों की मूर्तियां बनाई जा सकती हैं. इसके बाद एक थाली में सुहाग का सामान जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी और कपड़े रखकर देवी पार्वती को चढ़ाएं. सभी देवी-देवताओं की पूजा विधि-विधान से करें. दीप जलाकर फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. आखिर में हरियाली तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें. कई जगहों पर, महिलाएं रात्रि जागरण और कीर्तन भी करती हैं. पूजा के बाद महिलाओं के झूला झूलने की भी परंपरा है.
