‘आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए…’ पढ़ें क़तील शिफ़ाई के चुनिंदा शेर

'आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए...' पढ़ें क़तील शिफ़ाई के चुनिंदा शेर

27 Feb 2026

'आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए...' पढ़ें क़तील शिफ़ाई के चुनिंदा शेर.

 बे-क़रारी 

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएंगे,
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ.

 मिरे नाम

जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ,
जाने क्यूं लोग मिरे नाम से जल जाते हैं.

आख़री हिचकी

आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए,
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूं.

 फूल से ख़ुशबू

 यूं लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना,
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना.

तराशा हुआ

उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन,
देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं.

दीवानगी अपनी

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी,
वगरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते.

इल्ज़ाम से पहचानते 

दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं,
लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं.

थक गया

थक गया मैं करते करते याद तुझ को,
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूं.

 नहीं मरता

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में,
ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे.

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