Stock Market Updates: शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला. एक तरफ जापान का निक्की करीब 1.2 फीसदी चढ़ा, तो दूसरी तरफ हांगकांग का हैंग सेंग 1.7 फीसदी फिसल गया. इस बीच अमेरिकी बांड बाजार में जारी बिकवाली ने दुनियाभर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. US 10 साल के ट्रेजरी यील्ड 5.2 फीसदी के आसपास पहुंच गया है. वहीं, भारत में भी सेंसेक्स और निफ्टी ने शुरुआत में बढ़त दिखाई, लेकिन कुछ ही देर में बाजार की चाल पलट गई. सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 86 अंक चढ़कर 73,672.98 पर पहुंचा. निफ्टी भी 18.80 अंक की बढ़त के साथ 23,080.45 पर कारोबार कर रहा था. हालांकि, बाद में दोनों इंडेक्स लाल निशान में आ गए. सेंसेक्स करीब 12.95 अंक गिरकर 73,568.22 और निफ्टी 16.75 अंक नीचे 23,049.40 के आसपास पहुंच गया.
एशियाई बाजारों का हाल
शुक्रवार को जापान का निक्की 225 करीब 1.2 फीसदी की तेजी के साथ 66,318.14 पर पहुंचा. वहीं, हांगकांग का हैंग सेंग 1.7 फीसदी गिरकर 24,333.20 के आसपास रहा. ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी 0.5 प्रतिशत नीचे 8,660.30 पर कारोबार कर रहा था. भारत का बाजार मामूली बढ़त में रहा, जबकि चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया के बाजार छुट्टी की वजह से बंद रहे. अमेरिकी बाजार में भी गुरुवार को तस्वीर कुछ खास मजबूत नहीं रही. S&P 500 लगभग स्थिर रहा और 0.1 फीसदी से कम गिरा. डाउ जोन्स 0.3 फीसदी नीचे बंद हुआ. वहीं, में 0.1 फीसदी से कम की मामूली बढ़त रही.
बाजार की सबसे बड़ी टेंशन
अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस समय दुनिया के शेयर बाजारों के लिए सबसे बड़ी टेंशन बनी हुई है. गुरुवार को यह 5.20 फीसदी के ऊपर पहुंच गया था. शुक्रवार की शुरुआत में करीब 5.19 फीसदी के आसपास रहा. बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ सकता है. दरअसल, जब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न ज्यादा होता है, तो निवेशकों की दिलचस्पी शेयरों मार्केट में घटने लगती है. इसके अलावा हाई यील्ड का मतलब अर्थव्यवस्था में ज्यादा कर्ज लेने की संभावना भी है. इसका असर कंपनियों की फंडिंग, होम लोन और फ्यूचर की कॉर्पोरेट कमाई पर पड़ सकता है. बाजार में बोंज यील्ड बढ़ने की एक बड़ी वजह अमेरिका में महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता और सरकारी कर्ज का बढ़ता दबाव माना जा रहा है. इसके साथ ही एनर्जी प्राइज में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है.
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तेल की कीमतों पर भी नजर
कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को कुछ नरमी देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में कच्चा तेल करीब 1.4 प्रतिशत गिरकर 98.84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. हालांकि, अलग-अलग समय के घरेलू बाजार अपडेट में तेल करीब 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास भी कारोबार करता दिखा. तेल की कीमतों में ये उतार-चढ़ाव भारत जैसे बड़े ऑयल इम्पोर्टर के लिए खास मायने रखता है. महंगा तेल देश के इम्पोर्ट बिल से लेकर महंगाई और रुपये की चाल तक पर असर डाल सकता है. इसके अलावा निवेशकों की नजर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर भी बनी हुई है.
आज चमके ये शेयर
भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान लार्सन एंड टुब्रो, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, HCL टेक्नोलॉजीज़ और बजाजा फाइनेंस जैसे शेयर थोड़े चमके. वहीं, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टेक महिंद्रा और NTPC पर दबाव देखने को मिला. खासकर IT स्टॉक्स में बिकवाली ने बाजार की तेजी को सीमित किया. बाजार में गुरुवार की भारी गिरावट का असर भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
FII की भारी बिकवाली
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं. एक्सचेंज डाटा के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में 5,027.36 करोड़ रुपये की इक्विटी बेच दी. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो बाजार पर और दबाव बनता है. खासकर ऐसे समय में जब US बोंड यील्ड और कच्चा तेल दोनों हाई लेवल पर हों. हालांकि, शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 14 पैसे मजबूत होकर 95.85 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. रुपया 95.92 के स्तर पर खुला और बाद में 95.85 तक मजबूत हुआ. मगर रुपये पर कई तरफ से दबाव बना हुआ है. घरेलू ऑयल कंपनियों की डॉलर मांग, ऊंची तेल के प्राइज और मजबूत US डॉलर इंडेक्स भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं.
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