Abhijeet Dipke: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद इस समय देश में गरमाया हुआ है. विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने जंतर मंतर 2.0 आंदोलन का ऐलान कर दिया है. अभिजीत ने एक्स पर पोस्ट में लिखा,” अगर ज्ञानेश कुमार कल तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से अपना देशव्यापी विरोध शुरू करेगी और इसे पूरे भारत के शहरों में ले जाएगी. इस गांधी जयंती पर आइए लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें.”
48 घंटे का अल्टीमेटम
इससे पहले, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने 48 घंटों का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने कहा, “हम तीन मांगें कर रहे हैं. पहली- ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ क्रिमिनल केस शुरू किया जाना चाहिए. दूसरी- SIR पर बैन लगाया जाना चाहिए और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को फिर से लागू किया जाना चाहिए. तीसरी- 2023 के कानून को रद्द किया जाना चाहिए और इलेक्शन कमीशन में सुधार किया जाना चाहिए.”
If Gyanesh Kumar does not resign by tomorrow, CJP will begin its nationwide protest from Mumbai on 2 October, and take it to cities across India.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 25, 2026
This Gandhi Jayanti let’s pledge to save democracy.
अभिजीत दिपके का यह ऐलान इसलिए अहम है क्योंकि NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
विपक्षी पार्टियों पर आरोप
अभिजीत दिपके ने विपक्षी पार्टियों से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हो रही है, तो वे चुनावों में हिस्सा लेना बंद कर दें. उन्होंने कहा कि उनका लगातार हिस्सा लेना ऐसे चुनावों को सही ठहराता है और यह “भ्रम” पैदा करता है कि वे फ्री और फेयर हैं. एक्स पर एक पोस्ट में, दिपके ने कहा कि विपक्षी पार्टियां एक ही समय में यह दावा नहीं कर सकतीं कि चुनावों में धांधली हो रही है और चुनाव लड़ती भी रहती हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर ने सवाल किया कि क्या विपक्षी पार्टियां इसलिए हिस्सा लेती रहीं क्योंकि उन्हें डर है कि चुनावों से दूर रहने से उनका राजनीतिक वजूद खत्म हो जाएगा. लेकिन जब वोट चुराए जा रहे हैं, आपके MLA और MPs को तोड़ा जा रहा है और आपकी पार्टियों को तोड़ा जा रहा है, तो आप किस तरह के वजूद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?”
डिपके ने पूछा, “यह पॉलिटिकल सर्वाइवल नहीं है. आप बस एक ऐसे सिस्टम में जिंदा रहने की कोशिश कर रहे हैं जो आपको कमजोर कर सकता है, आपकी पार्टी को तोड़ सकता है या जब चाहे आपके चुने हुए प्रतिनिधि को छीन सकता है. आप इस तरह कब तक जिंदा रह सकते हैं?” उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर यह भी आरोप लगाया कि वे कथित चुनाव धांधली के मुद्दे को चुन-चुनकर उठा रही हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा राज्य या कौन सी पार्टी प्रभावित है.
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News Source: ANI
