Google Fined News: अमेरिका की दिग्गज ग्लोबल टेक कंपनी गूगल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 लाख का जुर्माना लगाया है. शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के जज मिनी पुष्कर्ना ने हिंडवेयर लिमिटेड के द्वारा फाइल किए गए दो मुकदमों की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल को सैनिटरीवेयर बनाने वाली प्रमुख कंपनी हिंडवेयर के ट्रेडमार्क को अपने एडवर्ड्स कार्यक्रम के लिए कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए हिंडवेयर को 30 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
आठ हफ्ते के अंदर भरना है जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट के जज मिनी पुष्कर्ना ने हिंडवेयर लिमिटेड द्वारा फाइल किए गए दो मुकदमों की सुनवाई की. इस दौरान उन्होंने पाया कि ट्रेडमार्क का कीवर्ड के रूप में उपयोग करना ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत “अनुचित लाभ” के बराबर है. जज ने गूगल एलएलसी और गूगल इंडिया को अपने प्लेटफॉर्म के विज्ञापन कीवर्ड के हिस्से के रूप में ‘हिंडवेयर’ या ‘हिंडवेयर सैनिटरीवेयर’, ‘हिंडवेयर सैनिटरी’ या ‘हिंडवेयर सैनिटरीवेयर इंडिया’ का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया है.
जज ने अपने आदेश में कहा, “इस कोर्ट ने इन मुकदमों में प्रत्येक वादी को मात्र 15 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है. कुल मिलाकर वादी को 30 लाख रुपये का हर्जाना दिया जाता है. उक्त राशि प्रतिवादियों यानी कि गूगल एलएलसी/गूगल इंडिया द्वारा आठ सप्ताह के समय के भीतर भुगतान की जाएगी.” कोर्ट के अपने फैसले में आगे कहा कि हिंडवेयर इस मुद्दे पर अपने दो मुकदमों के संबंध में मुकदमेबाजी की वास्तविक लागतों का हकदार है और उसे दो महीने के भीतर अपना “लागत बिल” दाखिल करने को कहा गया.
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गूगल का एडवर्ड्स प्रोग्राम एक व्यावसायिक उद्यम था जिसका उद्देश्य विभिन्न विज्ञापनदाताओं के प्रायोजित लिंक प्रदर्शित करके विज्ञापन के लिए सर्च इंजन के उपयोग से धन कमाना था. अदालत ने फैसला सुनाया कि जब यूजर्स ने वादी के चिह्न में रुचि व्यक्त की, तो प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धियों को उन्हें रोकने की अनुमति देकर, Google ने एक “अनुचित प्रथा” में लिप्त होकर वादी के फेमस ट्रेडमार्क के विशिष्ट चरित्र या प्रतिष्ठा का फायदा उठाकर अपने विज्ञापन व्यवसाय को लाभ पहुंचाने की कोशिश की. इसमें कहा गया है कि Google ने AdWords कार्यक्रम के तहत अन्य संस्थाओं को अपने पंजीकृत ट्रेडमार्क की पेशकश करने, सुझाव देने और बेचने के लिए वादी से कोई पूर्व सहमति या अनुमोदन नहीं मांगा था.
कोर्ट ने आगे कहा कि गूगल द्वारा वादी के ट्रेडमार्क का कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की नीलामी और बिक्री प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धियों को करने का कार्य आईटी अधिनियम की धारा 79(1) के तहत छूट प्राप्त नहीं था, जो मध्यस्थों को कानूनी दायित्व से सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है.
अपने फैसले में, अदालत ने यह भी कहा कि 2009 तक, गूगल ने स्वयं भारत में ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन बाद में उसने भारत में अपनी नीति बदलकर इस तरह की प्रथा की अनुमति दे दी. कोर्ट ने कहा, “इस प्रकार, गूगल की वाणिज्यिक नीति स्पष्ट रूप से ट्रेडमार्क वाले शब्दों को कीवर्ड के रूप में उपयोग करने को बढ़ावा देने और उनसे वाणिज्यिक लाभ प्राप्त करने के लिए बनाई गई है.”
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News Source: PTI
