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US के साथ BTA पर सबकी नजर! 50% टैरिफ बदलाव के बाद दिल्ली में अहम बैठक; अब तक क्या हुआ?

by Amit Dubey 24 June 2026, 4:24 PM IST (Updated 24 June 2026, 4:25 PM IST)
24 June 2026, 4:24 PM IST (Updated 24 June 2026, 4:25 PM IST)
India US BTA

India US BTA: भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय व्यापार को और मजबूत करने की पूरी तैयारी में है. इसके लिए दोनों देशों के व्यापार प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है और यह अब अपने फाइनल की ओर जाती हुई दिख रही है. बता दें कि 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा है. अमेरिका के द्वारा भारत पर हाई टैरिफ के बावजूद, पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में 0.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. यह बढ़कर 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. वहीं, आयात में 15.95 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 52.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) की बात करें तो यह 2024-25 में 40.89 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 2025-26 में 34.4 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया.

भारत और अमेरिका के बीच BTA (द्विपक्षीय व्यापार समझौते) को पूरा करने की तैयारी अब अपने अंतिम चरण में है. आइए जानते हैं कि यूएस के साथ ऐतिहासिक BTA क्या है और इस डील को लेकर अभी तक क्या हुआ है. इसके साथ ही जानेंगे कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत पर 50% का टैरिफ क्यों थोपा गया था और फिर यह कैसे घटकर 10 फीसदी तक आ गया. इन सभी बातों की शुरुआत बीटीए क्या है और इसको लेकर हाल ही में राजधानी दिल्ली में अमेरिका-भारत के बीच हुई अहम बैठक से करेंगे.

ऐतिहासिक BTA पर सभी की नजर

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने वाला है. इस डील पर दुनिया के कई देशों की भी नजर है. इस समझौते के होने से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में केवल बेतहाशा बढ़ोतरी ही नहीं होगी बल्कि इन दोनों देशों के रिश्ते भी मजबूत होंगे. सबसे पहले हम यहां बात बीटीए की करते हैं.

मालूम हो कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की घोषणा फरवरी 2025 में हुई थी. यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान वाशिंगटन में की गई थी. तब प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से इसका ऐलान किया था. इस व्यापार डील का उद्देश्य साल 2030 तक अपने ट्रेड को 500 अरब अमेरिकी डॉलर (“मिशन 500”)पहुंचाना है. इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को 2025 के अंत तक पूरा करने का टारगेट किया था, लेकिन ट्रंप टैरिफ की वजह से यह पूरा नहीं हो पाया.

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व्यापार समझौते के बहुत करीब- मॉरिसन

मंगलवार को कैपिटल हिल में फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम अमेरिकी उप सहायक विदेश मंत्री बेथानी पौलोस मॉरिसन (Bethany Poulos Morrison) ने संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक रिजल्ट ओरिएंटेड संबंध को आगे बढ़ा रहे हैं. मॉरिसन ने कहा, “हम मुलाकातों के आधार पर (संबंधों का) मूल्यांकन नहीं कर रहे हैं. हम परिणामों के आधार पर इसका मूल्यांकन कर रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “फरवरी 2026 में जब हमने व्यापार पर विचार किया, तो हमने ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के अपने इरादे की घोषणा की. हम इसके बहुत करीब हैं.”

मॉरिसन ने बताया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी शर्तों पर खोलेगा. अधिकारी ने कहा, “प्रशासन मिशन 500 के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार हासिल करना है और यह लक्ष्य पूरी तत्परता के साथ पूरा किया जा रहा है.”

23-24 जून को भारत-अमेरिका के बीच दिल्ली में बैठक

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि नई दिल्ली के दौरे पर है. इस बीच मंगलवार को भारत और अमेरिका ने नई दिल्ली में एक हाई लेवल व्यापार वार्ता आयोजित की, जिसका आज बुधवार को समापन भी हो गया है. इसका बैठक का उद्देश्य अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव के बाद प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को बचाना और उसमें सुधार करना था. इसका कारण साफ था क्योंकि इस समझौते के ढांचे ने इस साल की शुरुआत में बातचीत के बाद उलटफेर कर दिया था.

मंगलवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात की, क्योंकि दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते को पूरा करने की कोशिश कर रहे थे, जब व्यापारिक साझेदारों से आयात पर वाशिंगटन का अस्थायी 10 प्रतिशत टैरिफ समाप्त होने वाला है. गोयल ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, “आज एंबेसडर जेमिसन ग्रीर और एंबेसडर सर्जियो गोर से मिलकर खुशी हुई. भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत और बढ़ती हुई आर्थिक साझेदारी है.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के अनुरूप, एक संतुलित और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने पर सार्थक चर्चा की. भारत, अमेरिका के साथ मिलकर आर्थिक संबंधों को और गहरा करने, विकास और इनोवेशन के लिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में रचनात्मक रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.”

वहीं, आज बैठक खत्म होने के बाद गोयल ने एक और एक्स पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा, “आज सुबह एम्बेसडर जेमिसन ग्रीर और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठकों का दौर पूरा हुआ. हमने भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत की प्रगति की समीक्षा की और अपनी आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. मैं एम्बेसडर ग्रीर के नेतृत्व और दोनों टीमों की लगातार कोशिशों की सराहना करता हूं, जिन्होंने हमारी बातचीत को रचनात्मक और भविष्योन्मुखी ढंग से आगे बढ़ाया है.”

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द्विपक्षीय व्यापार साझेदारी दोनों के लिए लाभकारी- यूएस

मंगलवार को भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि द्विपक्षीय व्यापार साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है. एंबेसी ने कहा, “मजबूत संबंध अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार सृजित करते हैं और साथ ही विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत के विकास में सहयोग करते हैं. ऊर्जा सुरक्षा से लेकर तकनीकी प्रतिभाओं के आदान-प्रदान तक, हम मिलकर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं.”

दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए अंतरिम समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए आज नई दिल्ली में मुलाकात की.”

भारत पर क्यों लगा था 50% का टैरिफ?

आमतौर पर अमेरिका भारत पर 10 फीसदी का ही टैरिफ लगाता है लेकिन बीते साल इसने 50 फीसदी का टैरिफ थोप दिया था. इसकी वजह से दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते में काफी तनाव दिखा था और द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट ठंडे बस्ते में चला गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते साल अगस्त में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था. इसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ यह कहते हुए लगाया था कि भारत, रूस के साथ तेल की खरीदारी करता है. इससे मिलने वाले पैसों का रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल करता है.

हालांकि, तब ट्रंप और अमेरिका का परवाह किए बगैर पीएम मोदी ने रूस के साथ तेल की खरीदारी को जारी रखा था. वहीं, साल 2025 के आखिरी में भारत आए रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि बिना किसी दबाव और रुकावट के रूस, भारत को तेल भेजने की सप्लाई को जारी रखेगा. उन्होंने संकेत दिए थे कि भारत रूस से पहले के मुकाबले और भी अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी करेगा.

जैसा कि हमने ऊपर भी कहा कि अमेरिका के द्वारा भारत पर मूल टैरिफ 10 फीसदी का ही लगाया जाता रहा है लेकिन रेसिप्रोकल टैरिफ (15 फीसदी) और अतिरिक्त टैरिफ (25 फीसदी) लगाकर ट्रंप ने इसे 50 फीसदी तक कर दिया था. यह अतिरिक्त टैरिफ भारत पर दंडात्मक रूप से लगाया गया था. ट्रंप का कहना था कि भारत रूस से कच्चा तेल और हथियार खरीदता है, इसलिए उसपर यह अतिरिक्त टैरिफ लगा है.

बता दें कि बीते चार साल से अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष व युद्ध जारी है. अमेरिका ने इस युद्ध को लेकर रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं. इन्हीं में से एक कार्रवाई यह थी कि जो भी देश रूस से कच्चे तेल की खरीदारी करेगा, उसपर अतिरिक्त टैरिफ लगेगा.

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कोर्ट के आदेश के बाद भारत पर 10% का टैरिफ

ट्रंप के द्वारा भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाने से दोनों देशों के रिश्ते काफी तनाव वाले हो गए थे. भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते को सही करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रेसिडेंट ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई. जी हां, इस साल 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील बात हुई. इसके बाद अमेरिका के द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटा दिया गया था और मूल टैरिफ को घटाकर मात्र 18 फीसदी कर दिया गया था.

हालांकि, इसके बाद भारत को अमेरिकी अदालत से भी राहत मिली. 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. कोर्ट ने आदेश दिया कि 24 जुलाई 2026 तक सभी देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लागू रहेगा. भारत पर भी 10 फीसदी का ही टैरिफ लागू है. कोर्ट के आदेश के अनुसार, 24 जुलाई अब नजदीक आ रही है. ऐसे में जानकार उम्मीद कर रहे हैं कि अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता को लेकर पहले ही बात बन सकती है.

बीटीए में क्या-क्या?

भारत और अमेरिका के बीच बीटीए को पूरा करने की कोशिश अब अपने अंतिम फेज में है. रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत सीरीज पर टैरिफ को समाप्त करने या कम करने का प्रस्ताव रखा. इसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल (Fresh and Processed Fruit), सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट व अन्य उत्पाद शामिल हैं.

नई दिल्ली ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने की अपनी मंशा भी व्यक्त की है. अमेरिका में टैरिफ की स्थिति में बदलाव आने के बाद, दोनों पक्ष समझौते के फ्रेम की फिर से जांच कर रहे हैं. अब उम्मीद है कि यह समझौता जल्द ही हो सकता है.

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