City of Caves: अगर आप मुंबई को सिर्फ ऊंची इमारतों, लोकल ट्रेन, मरीन ड्राइव और बॉलीवुड के लिए जानते हैं, तो शहर के आसपास छिपी इसकी ऐतिहासिक दुनिया आपको हैरान कर सकती है. दरअसल, मुंबई के तट से कुछ दूरी पर अरब सागर के बीच एक ऐसा आइलैंड है, जहां पहुंचते ही शहर की भागदौड़ पीछे छूट जाती है. बस सामने आती हैं हरी-भरी पहाड़ियां, समंदर की लहरें और चट्टानों को काटकर बनाए गए खूबसूरत प्राचीन मंदिर. ये जगह है घारापुरी यानी एलीफेंटा आइलैंड, जिसे लोग आमतौर पर ‘सिटी ऑफ केव्स’ यानी गुफाओं की नगरी भी कहते हैं. यहां एलीफेंटा गुफाएं सिर्फ घूमने की जगह नहीं हैं, बल्कि भारतीय कला, इतिहास और शैव परंपरा की शानदार झलक भी देती हैं.
कहां है गुफाओं की नगरी?
घारापुरी आइलैंड मुंबई के तट से करीब 10 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने का सबसे लोकप्रिय रास्ता मुंबई के फेमस गेटवे ऑफ इंडिया से फेरी लेना है. समुद्र के रास्ते करीब एक घंटे की जर्नी के बाद आप एलीफेंटा जेट्टी पहुंचते हैं. इस जर्नी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यही है कि कुछ ही देर में मुंबई की भीड़भाड़, ट्रैफिक और ऊंची इमारतें दूर होती चली जाती हैं. चारों तरफ समंदर और सामने धीरे-धीरे नजदीक आती हरी पहाड़ियां आपका स्वागत करती हैं. जेट्टी से गुफाओं तक पहुंचने के लिए पैदल सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. रास्ते में छोटी दुकानें और लोकल लोगों की चहल पहल भी देखने को मिलती है. अगर सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो तो रास्ते में टॉय ट्रेन जैसी टूरिस्ट फेसिलिटीज का ऑप्शन भी मिल जाता है.

क्या है इस जगह की खासियत?
घारापुरी की सबसे बड़ी पहचान यहां की प्राचीन एलीफेंटा गुफाएं हैं. ये गुफाएं पहाड़ी की कठोर चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं. यहां कई गुफाएं हैं, जिनमें भगवान शिव की बड़ी बड़ी मूर्तियां देखने को मिलती हैं. इतिहासकारों के अनुसार, गुफाओं का निर्माण लगभग 5वीं से 6वीं शताब्दी के बीच माना जाता है. हालांकि, इस आइलैंड का इतिहास इससे भी पुराना है. इसके लिए यहां ह्यूमन एक्टिविटीज के प्रमाण भी मिलते हैं. यहां की सबसे फेमस है केव 1. आप जैसे ही इसके अंदर एंट्री करते हैं, बड़ा से पत्थर के खंभे और दीवारों पर उकेरी गई बड़ी-बड़ी मूर्तियां आपका ध्यान खींच लेती हैं. एलीफेंटा गुफाओं की सबसे चर्चित कलाकृति है त्रिमूर्ति, जिसे सदाशिव भी कहा जाता है. यह भगवान शिव के तीन रूपों को दिखाने वाली लगभग सात मीटर ऊंची और बड़ी सी मूर्ति है. मूर्ति को देखकर ऐसा लगता ही नहीं है कि, जैसे इसे किसी अलग पत्थर से बनाकर यहां रखा गया है. इसे पहाड़ की चट्टान को काटकर उसी का हिस्सा बनाते हुए तैयार किया गया है. इसके अलावा यहां शिव के कई और रूपों की मूर्तियां भी हैं. इनमें नटराज, अर्धनारीश्वर, शिव पार्वती विवाह और पौराणिक प्रसंगों से जुड़ी कलाकृतियां भी शामिल हैं. इन मूर्तियों को देखने के लिए थोड़ा समय लेकर चलना ज्यादा अच्छा रहता है. पहली नजर में जहां विशाल आकृतियां आपको बहुत ज्यादा अट्रैक्ट करती हैं. वहीं, ध्यान से देखने पर पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी भी नजर आने लगती है.
चाय के बागानों से जंगल सफारी तक, East India की इन 10 जगहों पर आएगा घूमने का असली और पूरा मजा
कैसे पड़ा ये नाम?
दिलचस्प बात ये है कि इस आइलैंड का असली नाम घारापुरी था. ‘एलीफेंटा’ नाम तो बाद में पॉपुलर हुआ. दरअसल, 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली जब इस आइलैंड पर पहुंचे, तो उन्हें यहां पत्थर से बनी हाथी की एक बड़ी मूर्ति मिली. इसी वजह से उन्होंने इसे एलीफेंटा नाम से बुलाना शुरू कर दिया. बाद में इस हाथी की मूर्ति को मुंबई ले जाया गया, लेकिन आइलैंड का नाम एलीफेंटा ही रह गया. आज भी ऐतिहासिक और स्थानीय संदर्भों में घारापुरी और एलीफेंटा दोनों नाम सुनने को मिलते हैं. वैसे, एलीफेंटा गुफाओं को साल 1987 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा भी दिया जा चुका है. यहां की खासियत सिर्फ मंदिर या मूर्तियां नहीं हैं. पूरी गुफा वास्तुकला इस बात का उदाहरण है कि सदियों पहले कलाकारों और शिल्पकारों ने विशाल चट्टानों को किस तरह धार्मिक और कलात्मक संरचनाओं में बदल दिया था.
घूमने का सबसे अच्छा टाइम
मुंबई का मौसम गर्म और उमस भरा हो सकता है, इसलिए एलीफेंटा घूमने के लिए ठंडे महीने ज्यादा कंफर्टेबल रहते हैं. ऐसे में नवंबर से फरवरी के बीच का मौसम आमतौर पर घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. यहां घूमने के लिए सुबह जल्दी निकलना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इससे समंदर में घूमने का मज़ा भी मिलता है और गुफाओं को देखने के लिए पूरा टाइम भी बचता है. मानसून में आइलैंड का हरा-भरा रूप बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगता है. लेकिन भारी बारिश या खराब समुद्री मौसम में फेरी सर्विस में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में बारिश के मौसम में यहां घूमने के लिए निकलने से पहले बोट सर्विस और मौसम की जानकारी लेना अच्छा रहता है.

कैसे पहुंचें?
अगर आप मुंबई में हैं, तो एलीफेंटा पहुंचना काफी आसान है. सबसे पहले आप साउथ मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया पहुंचें. इसके बाद वहां से एलिफेंटा आइलैंड जाने वाली फेरी लें. फिर लगभग एक घंटे की समुद्री यात्रा के बाद आप एलिफेंटा जेटी पहुंच जाएंगे. जेट्टी से गुफाओं की तरफ जाने वाला रास्ता लें. यहां आपको सीढ़ियां चढ़नी होंगी. फेरी का समय, किराया, मौसम और स्थानीय संचालन के हिसाब से बदल सकता है, इसलिए वहां जाने वाले दिन ताजा जानकारी लेना बेहतर रहेगा.
आसपास घूमने की जगहें
वैसे, अगर आप एलीफेंटा आइलैंड जा रहे हैं तो, इसे एक दिन की जर्नी ना बनाएं. साउथ मुंबई में आसपास कई ऐसी जगहें हैं जहां घूमने, तस्वीरें लेने और इतिहास को करीब से देखने का मौका मिलता है. इनमें सबसे पहले आता है गेटवे ऑफ़ इंडिया का नाम. एलीफेंटा की यात्रा यहीं से शुरू होती है, इसलिए इसे देखने के लिए अलग से टाइम जरूर निकालें. समुद्र के किनारे बना ये मुंबई का सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट है. सुबह और शाम यहां का माहौल देखने लायक रहता है.
कोलाबा कॉज़वे
अगर गुफाएं देखने के बाद खरीदारी का मूड हो, तो कोलाबा कॉज़वे बढ़िया ऑप्शन है. यहां कपड़े, जूलरी, बैग, जूते, एक्सेसरीज और कई तरह की छोटी-बड़ी चीजें मिलती हैं. यहां दुकानदारों से मोलभाव करना भी खरीदारी के एक अलग एक्सपीरियंस का हिस्सा है.
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस
इतिहास और वास्तुकला पसंद है तो CSMT को जरूर देखें. इसकी शानदार गोथिक वास्तुशिल्प इसे मुंबई की सबसे खास ऐतिहासिक इमारतों में शामिल करती है.
मरीन ड्राइव
दिन खत्म करने के लिए मरीन ड्राइव से अच्छी जगह शायद ही आपको मिलेगी. मरीन ड्राइव का नज़ारा आपको जिंदगी भर याद रह सकता है. यहां बैठकर समुद्र की हवा का मज़ा लेना और शहर की रोशनी देखना मुंबई की ट्रिप को क्लासिक बना देगा.
काला घोड़ा
आर्ट, कल्चर, कैफे और पुरानी इमारतों का कॉम्बिनेशन पसंद है तो काला घोड़ा भी घूम सकते हैं. यहां कई आर्ट गैलरीज, कल्चरल साइट्स खूबसूरत पुरानी बिल्डिंग्स देखने को मिलती हैं.

छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय
अगर आपको इतिहास और पुरानी कलाकृतियों में दिलचस्पी है, तो छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय आपके घूमने की जगहों की लिस्ट में होना चाहिए. यहां भारतीय इतिहास और कला से जुड़ी कई चीज़ें देखी जा सकती हैं.
मुंबई का खाना
एलीफेंटा से लौटकर अगर मुंबई के स्वाद का मजा लेना है तो ऑप्शन्स की कमी नहीं है. वड़ा पाव तो मुंबई की पहचान ही है. इसके अलावा पाव भाजी, मिसल पाव, बॉम्बे सैंडविच, भेल पुरी, सेव पुरी और डोसा जैसे स्ट्रीट फूड भी ट्राई किए जा सकते हैं. साउथ मुंबई में पारसी और ईरानी खानपान की झलक भी मिलती है. ईरानी चाय, बन मस्का और पारसी डिश मुंबई के पुराने खानपान कल्चर को समझने का एक अच्छा तरीका हैं. अगर आप सी फूड पसंद करते हैं तो मुंबई की बॉम्बे डक, मछली की करी और सी फूड की दूसरी लोकल डिश भी चख सकते हैं. हालांकि, खाने की जगह चुनते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है.
शॉपिंग के लिए कहां जाएं?
अगर एलीफेंटा घूमने के बाद खरीदारी करने का मन करे तो, कोलाबा कॉज़वे सबसे बढ़िया ऑप्शन्स में से एक है. यहां बजट में बढ़िया-बढ़िया फैशनेबल एक्सेसरीज मिल सकती हैं. थोड़ा अलग एक्सपीरियंस चाहिए तो क्रॉफर्ड मार्केट की तरफ जा सकते हैं. यहां फल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, घरेलू सामान और कई तरह की लोकल खरीदारी की जा सकती है. फैशन और ब्रांडेड शॉपिंग के लिए साउथ मुंबई के मॉर्डन शॉपिंग प्लेसेस और मॉल्स का ऑप्शन भी मौजूद है.

इन बातों का रखें ध्यान
एलीफेंटा आइलैंड घूमने जा रहे हैं तो, कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. समुद्री सफर के साथ-साथ यहां आपको काफी पैदल चलना पड़ता है. ऐसे में कंफर्टेबल जूते पहनना समझदारी होगी. पानी की बोतल, सनस्क्रीन, टोपी और हल्के कपड़े साथ रखें. गुफाओं के अंदर और आसपास ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान न पहुंचाएं और किसी भी मूर्ति या दीवार पर लिखने से बचें. ये सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि भारत की बड़ी विरासत का हिस्सा है. और हां, बंदरों से थोड़ा सावधान रहना अच्छा रहेगा. खाने-पीने की चीजें खुले में लेकर चलने पर वो आपके टूर का हिस्सा बनने की कोशिश कर सकते हैं. तो अगली बार मुंबई जाएं तो सिर्फ शहर में मत रुकिए, मुंबई की चमक-दमक से कुछ दूर घारापुरी का ये आइलैंड बिल्कुल अलग दुनिया है. एक तरफ समुद्र की लहरें, दूसरी तरफ हरी पहाड़ियां और उनके अंदर सदियों पुरानी चट्टानों पर उकेरी गईं भगवान शिव की विशाल मूर्तियां. यही वजह है कि घारापुरी यानी एलीफेंटा आइलैंड को ‘सिटी ऑफ केव्स’ कहना बिल्कुल खास लगता है. अगर आपको इतिहास, कला, आध्यात्मिकता, समुद्र और थोड़े थ्रिल का कॉम्बिनेशन पसंद है, तो मुंबई के अगले टूर में एलीफेंटा को अपनी लिस्ट में शामिल करना एक शानदार एक्सपीरियंस हो सकता है.
अक्टूबर में घूमने का है प्लान? इन 8 Offbeat जगहों पर मिलेगा मौसम, पहाड़, महल और समंदर का कॉम्बो
