Gujarat ATS: गुजरात ATS ने भारतीय तटरक्षक बल और केंद्रीय इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिलकर अरब सागर में ड्रग्स तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. संयुक्त ऑपरेशन में लक्षद्वीप के पश्चिम में एक संदिग्ध ईरानी नाव से करीब 526 किलो हेरोइन और मेथाम्फेटामाइन बरामद की गई है. बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है. कार्रवाई के दौरान नाव पर सवार पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया. भारतीय तटरक्षक बल के मुताबिक, खुफिया इनपुट के आधार पर समुद्र और हवा से निगरानी की गई. संदिग्ध नाव को लगातार ट्रैक किया गया और इसके बाद नाव को रोका गया. सुरक्षाकर्मियों ने नाव पर चढ़कर तलाशी ली, जिसके बाद बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद हुए.
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मिली थी ड्रग्स डील की जानकारी
गुजरात ATS के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन की अहम कड़ी अहमदाबाद में सामने आई एक ड्रग डील से जुड़ी है. ATS को 10 सितंबर को जानकारी मिली थी कि एक नाइजीरियाई नागरिक और गुजरात के एक वांटेड आरोपी के बीच ड्रग्स की डील को लेकर मुलाकात हुई थी. इस कथित मुलाकात के दौरान 500 किलो से ज्यादा मेथाम्फेटामाइन और हेरोइन की खेप को लेकर बातचीत और ऑर्डर दिए जाने की जानकारी जांच में सामने आई. ATS के अनुसार, ड्रग्स की यह खेप ईरान से समुद्र के रास्ते भारत लाने की योजना थी. इनपुट मिलने के बाद गुजरात ATS ने मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी और भारतीय तटरक्षक बल तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ इसे साझा किया. यहीं से अहमदाबाद में मिली एक लीड की जांच अरब सागर तक पहुंची.

हवाला के जरिए आया था रकम
जांच में यह भी बात सामने आई कि ड्रग्स डील के लिए एडवांस रकम हवाला चैनल के जरिए भेजी गई थी. बाकी रकम ड्रग्स की डिलीवरी के बाद हवाला के माध्यम से दिए जाने की कथित योजना थी. ATS के अनुसार, ड्रग्स को सीधे एक स्थान पर पहुंचाने के बजाय पहले समुद्र के रास्ते भारत लाने और फिर उसे छोटे हिस्सों में अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, खेप को तमिलनाडु के समुद्री तट के आसपास उतारने और इसके बाद अलग-अलग वाहनों के जरिए आगे भेजने की योजना थी.
तटरक्षक बल के साथ मिलकर चलाया ऑपरेशन
इंटेलिजेंस इनपुट मिलने के बाद गुजरात ATS ने भारतीय तटरक्षक बल के साथ समन्वय शुरू किया. ATS अधिकारियों की एक टीम कोच्चि भेजी गई, जहां वरिष्ठ कोस्ट गार्ड अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाई गई. इसके बाद समुद्र में संदिग्ध नाव की तलाश शुरू हुई. ATS के मुताबिक, ऑपरेशन कई दिनों तक चला और समुद्र के बड़े हिस्से में निगरानी की गई.
संदिग्ध नाव की पहचान और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए समुद्री और हवाई निगरानी की गई. आखिरकार 25 सितंबर की शाम संदिग्ध ईरानी नाव को लक्षद्वीप के पश्चिम में भारतीय समुद्री क्षेत्र में ट्रैक किया गया. कोस्ट गार्ड ने नाव का पीछा किया और उसे रोककर उस पर सवार लोगों की तलाशी ली. नाव की तलाशी के दौरान करीब 526 किलो मादक पदार्थ बरामद हुए. ATS की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बरामद खेप में करीब 400 किलो मेथाम्फेटामाइन और 126 किलो हेरोइन शामिल थी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3,000 करोड़ से ज्यादा
कोस्ट गार्ड और अन्य सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरी खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है. बरामदगी के बाद नाव, उसके चालक दल और जब्त ड्रग्स को सुरक्षा के बीच मुंबई लाया गया, जहां संयुक्त पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई. ऑपरेशन के दौरान नाव पर पांच पाकिस्तानी नागरिक मिले. ATS के अनुसार, सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पूछताछ के बाद ATS ने मोहम्मद याकूब बलूची, शकीरुल्लाह, फरीदुल्लाह, अहमद खान और वहीदुल्लाह खान को गिरफ्तार कर लिया. सभी पेशावर पाकिस्तान के रहने वाले हैं.

पाकिस्तान से पहुंचाई गई थी ड्रग्स की खेप
ATS की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, ‘आजाद’ नाम की संदिग्ध नाव ईरान के कोनारक से रवाना हुई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स की खेप पाकिस्तान के ग्वादर से आई. इसके बाद दूसरी नाव के जरिए ‘आजाद’ तक पहुंचाई गई यानी जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी ईरान से पाकिस्तान और फिर भारतीय समुद्री क्षेत्र तक पहुंचती है. हालांकि, इस ट्रांसफर की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है. पांचों आरोपियों से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों को ड्रग्स की आगे की सप्लाई को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात कही गई है.
पाक ड्रग पेडलर हाजी सलीम का भी नाम आया सामने
ATS के इनपुट के मुताबिक, ड्रग्स को पहले तमिलनाडु के समुद्री तट पर उतारने और फिर अलग-अलग हिस्सों में आगे भेजने की कथित योजना थी. जांच में तेलंगाना और पंजाब तक ड्रग्स पहुंचाने की योजना की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है. आखिर में पंजाब में एक नाइजीरियाई नागरिक तक ड्रग्स की डिलीवरी किए जाने की योजना थी. इस कड़ी में गुजरात के एक वांटेड आरोपी और कथित पाकिस्तानी ड्रग पेडलर हाजी सलीम का नाम भी जांच के दौरान सामने आने की बात ATS ने कही है.
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इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए Starlink का इस्तेमाल
जांच में नाव पर समुद्र के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए Starlink डिवाइस इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. समुद्र में लंबी दूरी तय करने वाली नाव के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल संचार और लोकेशन संबंधी गतिविधियों के लिए किया गया या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है. गुजरात ATS के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की तैयारी और समुद्री निगरानी कई दिनों तक चली. ATS के मुताबिक, करीब 18 दिनों तक समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध नाव की तलाश और निगरानी की गई. भारतीय तटरक्षक बल ने भी बताया कि कार्रवाई से पहले संदिग्ध नाव की समुद्र और हवा से निगरानी की गई, जिसके बाद उसे ट्रैक करते हुए 25 सितंबर को बोर्डिंग की गई.
इन सवालों का जवाब ढूंढ रही ATS
नाव को रोकने के बाद उसे मुंबई लाया गया. जब्त मादक पदार्थों के साथ नाव और चालक दल को आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई पहुंचाया गया. अब गुजरात ATS के साथ कोस्ट गार्ड और केंद्रीय एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं. जांच का मुख्य फोकस ड्रग्स की सप्लाई चेन और उसके अंतिम रिसीवर तक पहुंचना है. जांच एजेंसियां अब कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही हैं. 526 किलो ड्रग्स का असली स्रोत क्या था?ईरान से इसकी सप्लाई किसने कराई? पाकिस्तान के ग्वादर से खेप को किसने ट्रांसफर किया? कथित हवाला भुगतान किसने किया? भारत में इस नेटवर्क से जुड़े और कौन-कौन लोग हैं? गुजरात के वांटेड आरोपी की भूमिका क्या थी? हाजी सलीम का कथित नेटवर्क कितना बड़ा है? तमिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब में किन लोगों तक ड्रग्स पहुंचाई जानी थी? पंजाब में कथित अंतिम रिसीवर कौन था?
ATS की ‘टॉप-टू-बॉटम’ जांच
गुजरात ATS के अधिकारियों के मुताबिक, नारकोटिक्स के मामलों में जांच केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहती. एजेंसी नेटवर्क की दोनों दिशाओं में जांच करती है- ड्रग्स के स्रोत और सप्लायर से लेकर ट्रांसपोर्टर और अंतिम रिसीवर तक. इस मामले में भी एजेंसियां इसी मॉडल के तहत पूरे नेटवर्क को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. अरब सागर में हुई यह कार्रवाई समुद्री रास्ते से भारत में ड्रग्स पहुंचाने के प्रयास के खिलाफ एक बड़ा संयुक्त ऑपरेशन है.
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी
भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य समुद्री मार्ग से होने वाली अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी को रोकना और समुद्री क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना है. गुजरात ATS के लिए भी यह कार्रवाई अहम है, क्योंकि इसकी शुरुआत गुजरात में मिले एक इंटेलिजेंस इनपुट से हुई और जांच समुद्र में मौजूद कथित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई लाइन तक पहुंची. फिलहाल गुजरात ATS ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. पांचों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां इस कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और कड़ियों की तलाश कर रही हैं.

तस्करों के लिए अभेद्य दीवार बना भारतीय सुरक्षा बल
यह पहली बार नहीं है जब सीमा पार से समुद्री रास्ते के जरिए भारत में नशीले पदार्थों को धकेलने की कोशिश की गई है. सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों का भंडाफोड़ करती रही हैं.
- हालिया बड़ी कार्रवाइयां (2026): इससे पहले सितंबर 2026 में ही पोरबंदर तट के पास एक पाकिस्तानी नाव से 600 करोड़ रुपये की 86 किलो ड्रग्स पकड़ी गई थी और 14 लोग गिरफ्तार हुए थे. मई 2026 में मुंद्रा तट के पास एक यूरोपियन जहाज से 1,150 करोड़ रुपये मूल्य की 115 किलो कोकीन बरामद की गई थी.
- वर्ष 2024 और 2025 के बड़े ऑपरेशन: अप्रैल 2025 में पोरबंदर से दूर समुद्र में 1,800 करोड़ रुपये की 300 किलो ड्रग्स जब्त की गई थी. वहीं फरवरी 2024 में एक ईरानी नाव से रिकॉर्ड 3,300 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स बरामद हुई थी, जिस पर ‘Produce of Pakistan’ लिखा था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से अरब सागर लगातार तस्करों के लिए एक अभेद्य दीवार साबित हो रहा है.
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