Gujarat Foreign Travel: गुजरात सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की निजी विदेश यात्राओं को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारी निजी यात्रा के लिए विदेश जाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी प्राप्त करेंगे. सरकार ने आवेदन, जांच और अनुमति की पूरी प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. नई व्यवस्था के तहत विदेश यात्रा की प्रस्तावित तारीख से कम से कम 45 दिन पहले कर्मचारी को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन में यात्रा से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां देनी होंगी. वर्ग-1 और वर्ग-2 के अधिकारियों के आवेदन संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव के माध्यम से आगे भेजे जाएंगे, जबकि वर्ग-3 के कर्मचारियों के आवेदन संबंधित कार्यालय प्रमुख के जरिए प्रस्तुत होंगे.
यात्रा का उद्देश्य बताना अनिवार्य
सरकार ने विदेश यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य किया है. आवेदन में यह बताना होगा कि यात्रा पर्यटन, मनोरंजन, तीर्थयात्रा, पारिवारिक या घरेलू कारण, शैक्षणिक उद्देश्य, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम अथवा किसी अन्य कारण से की जा रही है. इसके अलावा यह भी बताना होगा कि आवेदक के खिलाफ कोई विभागीय जांच, कानूनी कार्रवाई या न्यायालय से संबंधित मामला तो लंबित नहीं है. यदि ऐसा कोई मामला है तो उसकी जानकारी आवेदन में देनी होगी. गाइडलाइन में कहा गया है कि निजी विदेश यात्रा के लिए मंजूरी मिलने के बाद संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को तय अवधि में ही यात्रा करनी होगी. विदेश यात्रा के लिए मंजूर अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी पर वापस उपस्थित होना होगा.
यात्रा का खर्च और फंडिंग स्रोत बताना होगा
विदेश यात्रा के दौरान होने वाले खर्च का अनुमान भी आवेदन में देना होगा. इसमें यात्रा, रहने, भोजन, वीजा और अन्य संभावित खर्च शामिल होंगे. यदि यात्रा के लिए किसी व्यक्ति, संस्था या अन्य स्रोत से स्पॉन्सरशिप मिल रही है तो उसका विवरण भी देना होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत परिस्थितियों के अलावा किसी अधिकारी या कर्मचारी को विदेशी आतिथ्य यानी Foreign Hospitality स्वीकार करने की अनुमति नहीं होगी. साथ ही विदेश यात्रा के दौरान सरकारी अधिकारी या कर्मचारी वहां कोई व्यवसाय या पेशेवर गतिविधि नहीं कर सकेंगे.
पिछले चार साल की विदेश यात्राओं का भी हिसाब
नई आवेदन प्रक्रिया में कर्मचारी को पिछले चार वर्षों में की गई निजी विदेश यात्राओं की जानकारी भी देनी होगी. इसमें यात्रा की अवधि, किन देशों की यात्रा की गई और यात्रा का उद्देश्य क्या था, इसकी जानकारी शामिल होगी. आवेदन में विदेश में जिस व्यक्ति या संस्था से मिलने जाना है, उसका नाम, आवेदक के साथ संबंध, पूरा पता और संपर्क नंबर सहित ई-मेल जैसी जानकारी भी मांगी गई है. यदि सरकारी कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार के सदस्य विदेश यात्रा कर रहे हैं तो उनके बारे में भी जानकारी देना अनिवार्य होगा. आवेदन में परिवार के सदस्य का नाम, उम्र, पासपोर्ट नंबर और कर्मचारी के साथ संबंध दर्ज करना होगा. इसके अलावा यात्रा के दौरान किसी तरह की हॉस्पिटैलिटी या स्पॉन्सरशिप मिलने वाली है तो उससे जुड़े दस्तावेज भी आवेदन के साथ लगाने होंगे.
जांच या गंभीर आरोप वाले कर्मचारियों पर विशेष नजर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आरोपों से जुड़ी जांच, विभागीय कार्रवाई, आपराधिक मामला या न्यायालय का ऐसा आदेश लंबित है, जिसमें देश छोड़ने पर रोक लगाई गई है, तो विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी. यदि किसी अधिकारी के खिलाफ वित्तीय जांच या फौजदारी मामला चल रहा है तो उसकी जानकारी भी आवेदन के साथ संबंधित विभाग को देनी होगी. नई व्यवस्था के तहत सक्षम प्राधिकारी को आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर संबंधित सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को अपने निर्णय की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है. हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में अलग निर्णय लिया जा सकता है. सरकार ने चेतावनी दी है कि पूर्व मंजूरी के बिना निजी विदेश यात्रा करना गंभीर कदाचार माना जाएगा. ऐसे मामले में गुजरात सिविल सेवा (वर्तणूक) नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
आवेदन में देनी होगी कई अहम जानकारियां
सरकार के निर्धारित फॉर्म में कर्मचारी का नाम, पद, पे मैट्रिक्स लेवल, कार्यालय एवं विभाग और पासपोर्ट नंबर जैसी जानकारी मांगी गई है. इसके साथ प्रस्तावित विदेश यात्रा की अवधि, जाने वाले देशों के नाम, यात्रा का उद्देश्य, अनुमानित खर्च और खर्च के स्रोत का विवरण देना होगा. आवेदन के दूसरे हिस्से में प्रशासन को यह बताना होगा कि संबंधित सरकारी कर्मचारी गोपनीय या अति गोपनीय मामलों से जुड़ा है या नहीं. साथ ही उसके खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच, निलंबन, विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मामला लंबित है या नहीं, इसकी भी जानकारी दर्ज करनी होगी. यानी गुजरात सरकार की नई व्यवस्था के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए निजी विदेश यात्रा अब सिर्फ छुट्टी लेने तक सीमित नहीं रहेगी. यात्रा का उद्देश्य, खर्च, फंडिंग, पिछले विदेश दौरे, साथ जाने वाले परिवार के सदस्य और कर्मचारी के खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी देने के बाद ही मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
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