Lata Mangeshkar Song: कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं. लता मंगेशकर की आवाज में ऐसा ही एक गीत है ‘ऐ दिल ए नादान’, जो 43 साल बाद भी अपने दर्द, तन्हाई और अधूरे प्यार की कहानी से दिल छू लेता है. साल 1983 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ का ये गीत हेमा मालिनी पर फिल्माया गया था. इसकी खास बात ये है कि इसमें शायरी, संगीत और लता मंगेशकर की आवाज तीनों मिलकर अकेलेपन को एक अलग ही अंदाज में सामने रखती हैं.
गाने की जान
‘ऐ दिल-ए-नादान’ में रजिया के मन की उलझन और अकेलेपन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. फिल्म में हेमा मालिनी शहजादी के अंदाज में नजर आती हैं. गाने के जरिए उनके किरदार के अंदर चल रहे इमोशन को सामने लाया गया है. लता मंगेशकर के इस गाने की खूबसूरती ये है कि इसमें प्यार पाने की इच्छा के साथ-साथ खुद से सवाल करने वाली बेचैनी भी महसूस होती है. यही वजह है कि इतने साल बाद भी ये गाने उन लोगों को अपना-सा लगता है, जिन्होंने कभी प्यार, इंतजार या तन्हाई को करीब से महसूस किया है.
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उर्दू शायरी का जादू
इस गाने के बोल मशहूर उर्दू शायर जां निसार अख्तर ने लिखे थे. उनकी शायरी में उर्दू की मिठास और डीप इमोशन का खूबसूरत कॉम्बिनेशन दिखाई देता है. जां निसार अख्तर के निधन के बाद फिल्म के कुछ गानों पर दूसरे गीतकारों ने भी काम किया था. फेमस संगीतकार खय्याम ने भी इस गाने को बड़ी खूबसूरती से सजाया. इसमें भारी भरकम संगीत के बजाय आवाज और शब्दों पर फोकस किया गया.
रेगिस्तान में हुआ शूट
इस गीत की विजुअल खूबसूरती भी इसकी खास पहचान है. कमाल अमरोही ने इसे रेगिस्तान में फिल्माया, जहां चारों तरफ फैली खामोशी और रेत का सीन रजिया के अंदर चल रही बेचैनी से जुड़ता हुआ नजर आता है. हेमा मालिनी के एक्सप्रेशन और लता मंगेशकर की आवाज मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जो आज भी दर्शकों को पुराने दौर में ले जाते हैं. ‘रजिया सुल्तान’ भले ही 1983 की फिल्म है, लेकिन लता मंगेशकर की आवाज में सजा ये गाना 43 साल बाद भी अच्छा लगता है.
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