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सिनेमाई बदलाव: हिंसा पर भारी पड़ रही संजीदा कहानियां, ‘बॉर्डर 2’-‘धुरंधर’ के राष्ट्रवाद के पीछे का असली राज क्या है?

by Sanjay Kumar Srivastava 3 July 2026, 8:13 PM IST (Updated 3 July 2026, 8:14 PM IST)
3 July 2026, 8:13 PM IST (Updated 3 July 2026, 8:14 PM IST)
सिनेमाई बदलाव: हिंसा पर भारी पड़ रही संजीदा कहानियां, 'बॉर्डर 2' और 'धुरंधर' के राष्ट्रवाद के पीछे का असली राज क्या है?

Box Office: भारतीय सिनेमा में दर्शकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है. एक्शन और भारी हिंसा वाली फिल्मों का दौर अब ढलान पर है, क्योंकि दर्शक अत्यधिक मारधाड़ से मानसिक रूप से थक चुके हैं. इसके विपरीत देशभक्ति, शांत और संजीदा कहानियों की तरफ दर्शकों का रुझान बढ़ा है. इसका मुख्य कारण यह है कि लोग अब पर्दे पर उन किरदारों को देखना चाहते हैं जिनसे वे भावनात्मक रूप से खुद को जोड़ सकें.

फिल्म इंडस्ट्री पर प्रभाव

इस बदलाव से फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है. अब मेकर्स केवल महंगे वीएफएक्स (VFX) या बड़े बजट के भरोसे रहने के बजाय मजबूत स्क्रिप्ट और कहानी पर निवेश कर रहे हैं. बिना स्टार-पावर वाली छोटी और मध्यम बजट की फिल्में भी केवल अपनी बेहतरीन कहानी के दम पर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं, जिससे इंडस्ट्री में रचनात्मकता को बढ़ावा मिला है.

एक्टिंग में आया बदलाव

कहानियों के बदलने से कलाकारों की एक्टिंग शैली में भी बड़ा बदलाव आया है. अब लाउड और मेलोड्रामैटिक एक्टिंग का समय खत्म हो चुका है. कलाकार अब अधिक ‘नेचुरल’ और संजीदा एक्टिंग अपना रहे हैं. वे बॉडी लैंग्वेज और आंखों के जरिए भावनाओं को व्यक्त करने पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि किरदार वास्तविक और आम जनता के करीब लगे.

शांत-संजीदा फिल्मों की सफलता और OTT प्लेटफॉर्म्स की भूमिका

ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है. पहले दर्शक केवल बड़े बजट की मसाला और एक्शन फिल्मों के लिए सिनेमाघर जाते थे. लेकिन ओटीटी (जैसे Netflix, Prime Video) के आने से दर्शकों को घर बैठे वैश्विक और बारीक कहानियों को देखने की आदत हो गई है. इस डिजिटल क्रांति ने ‘स्टार पावर’ के घमंड को तोड़कर ‘कंटेंट’ को असली राजा बना दिया है.

‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने दुनियाभर में मचाई धूम

‘धुरंधर: द रिवेंज’, ‘बॉर्डर 2’ और फिर ‘मैं वापस आऊंगा’. बॉर्डर पॉलिटिक्स और उससे जुड़े जज़्बातों के अलग-अलग पहलुओं को दिखाते हुए 2026 के शुरुआती छह महीनों ने यह साबित कर दिया है कि दर्शक न सिर्फ़ बड़े पैमाने पर बनी फिल्मों और जबरदस्त देशभक्ति वाली कहानियों की ओर खिंचे चले आते हैं, बल्कि उन्हें शांत और संजीदा कहानियां भी पसंद आती हैं. साल की पहली छमाही में दो दर्जन से ज़्यादा फ़िल्में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुईं. लेकिन तीन फ़िल्में सबसे अलग रहीं. आदित्य धर की जासूसी कहानी वाली फ़िल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने दुनिया भर में 1,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की.

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‘बॉर्डर 2’ 450 करोड़ रुपये की कमाई के साथ दूसरे नंबर पर रही और फिर ‘भूत बंगला’ आई जिसने 270 करोड़ रुपये कमाए. इनके अलावा सिर्फ़ शाहिद कपूर की फ़िल्म ‘ओ’रोमियो’ और ‘कॉकटेल 2’ ही 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर पाईं. जून में इम्तियाज़ अली की बंटवारे पर आधारित फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ आई. इसका अंदाज ‘धुरंधर: द रिवेंज’ से बिल्कुल अलग था, जिसने दिसंबर 2025 में आई पहली फ़िल्म से जुड़ी बड़ी उम्मीदों को पूरा किया और साथ ही ‘बॉर्डर 2’ भी आई, जो 1997 की हिट फ़िल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल थी. इन सभी फ़िल्मों में पाकिस्तान एक अहम विषय रहा है, लेकिन कहानियां और उन्हें पेश करने का तरीका एक-दूसरे से काफ़ी अलग है.

बॉक्स ऑफिस पर कमाई संतोषजनक

ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े ने PTI को बताया कि हमारे पास तीन बड़ी हिट फ़िल्में हैं: ‘धुरंधर 2’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘भूत बंगला’. कुल कमाई 3,000 करोड़ रुपये रही है, लेकिन यह कमाई सिर्फ़ तीन-चार फ़िल्मों से आई है, जबकि यह संख्या छह से आठ फ़िल्में भी हो सकती थी. सफल फ़िल्में तो कम हैं, लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर कमाई संतोषजनक रही है.

उन्होंने कहा कि यह समय संतोषजनक था, लेकिन बहुत खास नहीं, और अच्छी बात यह रही कि सफल फिल्मों ने अच्छा बिज़नेस किया. वांखेड़े के अनुसार, कई बहुप्रतीक्षित फिल्में, जिनमें श्रीराम राघवन की ‘इक्कीस’, वरुण धवन की ‘है जवानी तो इश्क होना है’, आयुष्मान खुराना की ‘पति पत्नी और वो दो’ और करण जौहर के प्रोडक्शन की ‘चांद मेरा दिल’ शामिल हैं, उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं. उन्होंने कहा कि इन बहुप्रतीक्षित फिल्मों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

बड़ी और छोटी दोनों तरह की फिल्में आईं पसंद

PVR INOX लिमिटेड के चीफ बिज़नेस प्लानिंग और स्ट्रैटेजी, कमल ज्ञानचंदानी ने कहा कि बड़ी और छोटी दोनों तरह की फिल्मों को लोगों का प्यार मिला. उन्होंने ‘मैं वापस आऊंगा’ का उदाहरण दिया, जिसे 12 जून को अच्छे रिव्यू मिले, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी शुरुआत धीमी रही. हालांकि, लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया के कारण दूसरे हफ़्ते में इसने रफ़्तार पकड़ी, जिससे एग्ज़िबिटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को देश भर में शो की संख्या बढ़ानी पड़ी. ज्ञानचंदानी ने PTI को बताया कि कंटेंट ही सबसे अहम है और ‘मैं वापस आऊंगा’ को मिला रिस्पॉन्स इसका उदाहरण है. अगर सिर्फ़ बड़े पैमाने (स्केल) पर फिल्म बनी हो और कंटेंट न हो, तो शायद लोग पहले वीकेंड पर आ जाएं, लेकिन उसके बाद उत्साह कम हो जाएगा.

लोग अच्छा कंटेंट देखना चाहते हैं

ज्ञानचंदानी ने कहा कि अगर फिल्म में कंटेंट और स्केल दोनों हों, तो यह सबसे अच्छी बात है. ‘धुरंधर’ जैसी फिल्म की शुरुआत ज़बरदस्त रही और यह और भी बड़ी होती गई. लेकिन अगर कंटेंट अच्छा हो और स्केल छोटा हो, तब भी लोग थिएटर में आते हैं क्योंकि वे मनोरंजन चाहते हैं, वे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से कुछ समय के लिए अलग होना चाहते हैं. ज्ञानचंदानी के अनुसार, 2026 के शुरुआती छह महीनों में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एडमिशन में 10 से 12 प्रतिशत और कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में 16 से 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई.

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बिहार के एग्ज़िबिटर और डिस्ट्रीब्यूटर विशेष चौहान ने कहा कि कुल मिलाकर रुझान दर्शकों की मज़बूत दिलचस्पी को दिखाता है, बशर्ते कंटेंट उन्हें पसंद आए. चौहान ने PTI से कहा कि शुरुआती छह महीने काफी अच्छे रहे हैं. अच्छी बात यह है कि दर्शक बड़ी संख्या में आ रहे हैं, लोग साफ़ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि वे थिएटर में फिल्में देखना चाहते हैं. अगर उन्हें अच्छा कंटेंट मिले, तो वे अभी उसका आनंद लेने के मूड में हैं.

IPL और चुनाव का पड़ा असर

उन्होंने यह भी कहा कि IPL सीज़न और चुनाव के दौरान आई अस्थायी सुस्ती का असर थिएटर में फिल्मों के प्रदर्शन पर पड़ा. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण भी कई फिल्मों की रिलीज़ टालनी पड़ी. चौहान ने कहा कि IPL और देश भर में हो रहे चुनावों के कारण अप्रैल और मई के बीच का समय थोड़ा सुस्त रहा. साथ ही, फिल्म निर्माताओं ने ‘टॉक्सिक’ और सलमान खान की ‘मातृभूमि’ जैसी फिल्मों की रिलीज़ रद्द कर दी, जिससे रिलीज़ का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया.

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चेन्नई के ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला के अनुसार, दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी कुछ बड़ी सफलताओं के साथ-साथ कई फिल्मों के खराब प्रदर्शन का पैटर्न देखने को मिला, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत रिलीज़ कोई खास असर नहीं डाल पाईं. तेलुगु फ़िल्में जैसे चिरंजीवी की ‘माना शंकर वर प्रसाद गारू’ और राम चरण की ‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफ़िस पर 300 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की. तमिल सिनेमा में, सूर्या की फ़िल्म ‘करुप्पु’ ने 300 करोड़ रुपये से ज़्यादा कमाए.

‘वाझा 2’ ने 240 करोड़ से ज्यादा कमाए

उन्होंने कहा कि मलयालम में कमिंग-ऑफ़-एज कॉमेडी ‘वाझा 2’ और मोहनलाल की ‘दृश्यम 3’ ने 240 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार किया. आमतौर पर, पहले छह महीनों में यहां लगभग 100 फ़िल्में रिलीज़ होती थीं, जिनमें से दो या तीन ब्लॉकबस्टर होती थीं, पांच से छह हिट फ़िल्में होती थीं और बाकी औसत या औसत से कम प्रदर्शन करती थीं. लेकिन दक्षिण की चारों भाषाओं में सफल न होने वाली फ़िल्मों का आंकड़ा लगभग 70 प्रतिशत रहा है. बाला ने PTI को बताया कि इसके अलावा, तेलुगु में ‘मा इंटी बंगारम’ और तमिल में महिलाओं पर आधारित एक्शन फ़िल्म ‘ब्लास्ट’ ने अच्छा प्रदर्शन किया है. चेन्नई में GK सिनेमाज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर रुबन मथिवानन ने कहा कि दक्षिण में थिएटर मालिकों के लिए यह दौर मिला-जुला रहा, क्योंकि कई बड़ी फ़िल्में बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करने में नाकाम रहीं.

‘पराशक्ति’ का रहा अच्छा प्रदर्शन

पोंगल पर रिलीज़ हुई फ़िल्में जैसे शिवकार्तिकेयन की ‘पराशक्ति’ और कार्थी की ‘वा वाथियार’ ने अच्छा प्रदर्शन किया. ‘पेद्दी’ का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. पैन-इंडिया विषयों पर फ़िल्में बनाने के बजाय उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ी फ़िल्में बनानी चाहिए जो बड़ी हिट साबित हों. उदाहरण के लिए राम चरण की ‘रंगस्थलम’ पूरी तरह से तेलुगु परिवेश पर आधारित कमर्शियल फ़िल्म थी और वह ब्लॉकबस्टर रही.

मथिवानन ने PTI से कहा कि अगर आप देखें, तो सभी तेलुगु हीरो एक बड़ी हिट देने के बाद पैन-इंडिया फ़िल्म करना चाहते हैं. अगर प्रभास पैन-इंडिया (के दबाव) की चिंता किए बिना सिर्फ़ एक अच्छी तेलुगु फ़िल्म भी करें, तो भी उन्हें बॉक्स ऑफ़िस पर बड़ी ओपनिंग मिल सकती है. आगे की बात करें तो, इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स 2026 के दूसरे हिस्से को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं, क्योंकि उस समय YRF की ‘अल्फा’, अजय देवगन की ‘धमाल 4’, सलमान खान की ‘मातृभूमि’, नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी ‘रामायण’ और शाहरुख खान की ‘किंग’ जैसी बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होने वाली हैं.

‘छावा’ का रहा दबदबा

हॉलीवुड फ़िल्मों से भी बड़ी उम्मीदें हैं, जैसे क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’, टॉम हॉलैंड की ‘स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे’ और मार्वल की अगली बड़ी फ़िल्म ‘एवेंजर्स: डूम्सडे’. चौहान ने कहा कि फिल्मों की लिस्ट काफ़ी रोमांचक है. जब अच्छी फ़िल्में आती हैं, तो दर्शक उन्हें देखने आते हैं. इसलिए, प्रोडक्शन और क्रिएटिव टीम की ज़िम्मेदारी है कि वे ऐसी दिलचस्प फ़िल्में बनाएं जिन्हें देखने के लिए दर्शक अपने नज़दीकी थिएटर में आएं. 2025 के पहले हिस्से में विक्की कौशल की ऐतिहासिक ड्रामा फ़िल्म ‘छावा’ का दबदबा रहा, जिसने 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की. पिछले साल इसी समय के दौरान कुल कलेक्शन लगभग 1,900 करोड़ रुपये था.

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