Waqar Younis : पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने एक समय क्रिकेट जगत में एक से बढ़कर एक गेंदबाज दे चुकी है. इन्हीं में से एक तेज गेंदबाज वकार युनूस का नाम भी उसी लिस्ट में शामिल है, जिन्होंने दुनिया के अच्छे से अच्छे बल्लेबाज को आउट करके दिखाया था. पाकिस्तान की तरफ से वकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले दूसरे गेंदबाज हैं. उन्होंने अपने करियर में 789 विकेट चटकाए हैं. आपको बताते चलें कि अपने करियर में यॉर्कर्स से बल्लेबाजों की सुकून छीनने वाले वकार अब अपनी निजी जिंदगी के शानदार पलों को सुकून से जी रहे हैं. वकार की जिंदगी के पल ज्यादातर सिडनी और लाहौर में बीत रहे हैं.
मैं फुटबॉल प्रेमी हूं : वकार
अपने निजी जीवन को लेकर वकार युनूस कहते हैं कि जब फुटबॉल विश्व कप चल रहा हो तो फिर आप खुद नहीं सोच सकते हैं कि कोई दूसरी व्यस्तता क्या है? मैं इस फुटबॉल फीवर में अपने बेटे अजान के साथ रात भर बैठकर फुटबॉल का मैच देखता रहता हूं. उन्होंने कहा कि मुझे फुटबॉल मैच देखने का बहुत शौक हैं लेकिन मेरे बेटे का जुनून मुझसे भी कई गुना ज्यादा है. फुटबॉल का कोई मैच आ रहा हो तो वह टीवी की स्क्रीन पर चिपक जाता है. साथ ही वह मेरा बेटा पुर्तगाल और क्रिस्टियानो रोनाल्डो का दीवाना है. युनूस बताते हैं कि जब किसी मैच में रोनाल्डो गोल नहीं कर पाता है तो वह काफी परेशान हो जाता है. लेकिन जब रोनाल्डो ने उज़्बेकिस्तान के खिलाफ गोल दिया था तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

वकार बिताते हैं परिवार के साथ ज्यादा समय
वकार ने अपने बेटे के बारे में आगे कहा कि अजान ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली है. अब वह लाहौर में इंटर्नशिप कर रहा है. साथ ही मेरी बड़ी बेटी भी लाहौर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है और वह भी डॉक्टर बनने की राह पर निकल पड़ी है. इसके अलावा मेरी छोटी बेटी सिडनी में कानून की पढ़ाई कर रही है और उसे भविष्य में खुद को वकील के पेशे में देखना बहुत पसंद है. वकार आगे कहते हैं कि हर एक माता-पिता का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने और उनका भविष्य बनाने की दिल में इच्छा रखता है. यही वजह है कि मैं अपने बच्चों की उच्च शिक्षा को देखकर काफी खुश होता हूं और मेरा भी यही सपना था कि बच्चे अच्छी दिशा में आगे जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट खेलने के दौरान मैं अपने बच्चों पर उस तरह से ध्यान नहीं दे पाया था, जिस तरह एक माता-पिता अपने बच्चों के साथ अपने सुख-दुख बांटकर करते हैं.
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उन्होंने आगे कहा कि अब मैंने क्रिकेट की दुनिया से संन्यास ले लिया है और अब ज्यादा वक्त मैं अपने बच्चों के बीच ही बिताता हूं. क्रिकेट खेलने के बाद मुझे सबसे ज्यादा खुशी इन्हीं बच्चों के बीच रहने के दौरान होती है. साथ ही अगर दुनिया भर में क्रिकेट की बात हैं तो मुझे जहां भी काम मिलता है, वह उसे करने के लिए चला जाता हूं.
दुनिया से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला
अपने करियर को लेकर वकार कहते हैं कि क्रिकेट खेलने के दौरान मैं पूरी दुनिया घूमा और इस दौरान मुझे कई महत्वपूर्ण लोगों से मिलने का भी मौका मिला. साथ ही जिस व्यक्ति से मिलने का मुझे सौभाग्य मिला, वह नेल्सन मंडेला हैं. वह बताते हैं कि साल 1994 में पाकिस्तानी टीम दक्षिणी अफ्रीका के दौरे पर पहुंची थी और उस दौरान मेरी मुलाकात महान नेता नेल्सन मंडेला से हुई थी. साथ ही बहुत लंबा संघर्ष करने के बाद वह सामने आए तो वह उस वक्त भी काफी विनम्र थे. वह दुनिया में एक महान व्यक्ति और नेता थे. मैं बस यही कहूंगा कि उनसे हुई मुलाकात के यादगार पलों की हमेशा याद रखूंगा.

नहीं थी वकार की छोटी अंगुली
वहीं, दुनिया के इस तेज गेंदबाज की एक अंगुली नहीं है. उनकी बाएं हाथ की छोटी अंगुली नहीं है. इसके बाद भी उन्हें गेंदबाजी का लोहा मनवाया और अच्छे से अच्छे गेंदबाज को पवेलियन का रास्ता दिखाया. हालांकि, वकार दाएं हाथ से गेंदबाजी करते थे. यही वजह है कि छोटी अंगुली ने वकार के करियर को ज्यादा प्रभावित नहीं किया. बता दें कि वकार युनूस के यह हादसा नहर में कूदने की वजह से हुआ था. मामला यह है कि एक बार वकार ने एक नहर में छलांग लगा दी और इस दौरान उनकी छोटी अंगुली बुरी तरह घायल हो गई. ये चोट इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टर को इस अंगुली को शरीर से अलग करनी पड़ी. वकार ने इस हादसे से उभरने के बाद मैदान पर शानदार वापसी की थी.
मैदान पर भी बना मजाक
वकार एक टीवी शो में बैठे थे और उस दौरान एक हास्यपूर्ण वाक्य के दौरान वकार युनूस की चार अंगुली वाले मुद्दे ने सभी का ध्यान खींचा. ऐसे ही कुछ हंसी छूटने वाला मामला तब हुआ था जब यूनुस के साथ वसीम अकरम, मिस्बाह-उल-हक और वहाब रियाज़ एक-दूसरे को गेंद फेंक रहे थे. इसी बीच वकार वसीम अकरम की एक कैच नहीं पकड़ पाए. तो उस दौरान वकार ने कहा कि मैं चार अंगुलियों से क्या कर सकता हूं. इस पर वसीम और मिस्बाह ने कहा कि आप यह भी नहीं कह सकते हैं कि मैं पांच मिनट में आया था. इस पर तत्काल वकार ने जवाब दिया कि मैं यह भी नहीं सकता कि वह दस मिनट में आया.
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इस खास मौके पर मिस्बाह-उल-हक ने कहा कि एक बार टीम की बैठक हुई और उस टीम के कोच वकार युनूस थे. उन्होंने सईद अजमल को संबोधित करते हुए कहा कि अगर तुम मैदान पर जा रहे हो तो तुम्हें 10 विकेट लेने होंगे. ऐसा कहते हुए उन्होंने दोनों हाथों की अंगुलियां दिखाई, जिस पर सईद अजमल ने कहा कि यह तो सिर्फ 9 ही हैं. वहीं, वकार को इस बात का अफसोस है कि 1987 में वह ऑस्ट्रेलिया में आयोजित यूथ विश्व कप में नहीं खेल पाए थे. उन्होंने बताया कि जब मैं विकेट ले रहा था और इंजमाम-उल-हक शतक बना रहे थे. इसके कारण हम दोनों को साहीवाल में युवा टीम में बुलाया गया. उस वक्त जब टीम का चयन हो रहा था तो मुझे यकीन था कि हम दोनों का सेलेक्शन हो जाएगा. लेकिन इंजमाम का चयन हो गया और मेरा नहीं हुआ.
सचिन और वकार ने किया एक साथ डेब्यू
16 नवंबर, 1989 को भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन मैदान पर जो नजारा था, उसे उस वक्त देखने वाला कभी नहीं भूलेगा. एक तरफ 18 वर्षीय गेंदबाज वकार युनूस और दूसरी तरफ 16 साल का भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर खड़ा था. यह संयोग ही था कि दोनों प्लेयर एक-दूसरे के सामने खड़े थे. इस दौरान खास बात यह थी कि दोनों खिलाड़ियों की टैलेंट दुनिया के सामने आया. उस दिन भारतीय टीम के छह विकेट गिरे थे और उसमें से वकार ने चार विकेट चटकाए थे. इनमें संजय मांजरेकर, मनोज प्रभाकर, सचिन तेंदुलकर और कपिल देव शामिल थे. इस शानदार प्रदर्शन के बीच उन्होंने अपना 18वां जन्मदिन मनाया था. दूसरी ओर सचिन ने उस वक्त संकेत दिया था कि आने वाले समय का महान बल्लेबाज तैयार हो रहा है.

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नहीं है हेलमेट की जरूरत
क्रिकेटर साइमन ह्यूजेस ने एक बार कहा था कि वकार युनूस की गेंदबाजी खेलने के लिए हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं है. सिर्फ पैर की अंगुली बचाने के लिए स्टील की कैप जरूरी है. उन्होंने ऐसी बात वकार की यॉर्कर को लेकर कही थी. यॉर्कर के लिए अपनी पहचान बनाने वाले इस गेंदबाज ने दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज को आउट करके चौंका दिया था. इनमें वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा भी शामिल थे. वह उस घटना को कभी नहीं भूल सकते हैं जब लारा ने दो चौके लगाने के बाद वकार की यॉर्कर के आगे संतुलन खो बैठे और बोल्ड हो गए.
यही वह दौर था जब वकार अपनी गेंदबाजी से हर एक बल्लेबाज में अपना खौफ बना रहे थे और गेंद फेंकते हुए आग उगलने का काम कर रहे थे. उनकी खतरनाक यॉर्कर का किसी भी बल्लेबाज का जवाब नहीं था. वकार की यॉर्कर का मतलब था कि बल्लेबाज पवेलियन चला जाए या फिर अपने पैर की अंगुली तुड़वा लें. अगर कोई गेंदबाज चोट से बच भी जाता तो वह एलबीडब्लू आउट हो जाता था. इसके अलावा कई बल्लेबाज को अपनी पैर की चोट से कराहते हुए ड्रैसिंग रूम की तरफ बढ़ते हुए भी देखे गए. इसी कारण वकार यूनुस को दुनिया भर में पैर की उंगलियां कुचलने वाला गेंदबाज भी कहा जाने लगा था.

UAE में की पढ़ाई
आपको मालूम हो कि पाकिस्तान में जन्मे वकार युनूस ने अपनी पढ़ाई UAE में पूरी की है. हालांकि, उन्होंने अपने प्राथमिक शिक्षा तो पाकिस्तान में ही हासिल की थी. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए UAE चले गए. UAE के शारजाह के पाकिस्तान कॉलेज में उन्होंने एडमिशन लिया था. बता दें कि वकार ने पाकिस्तान की तरफ से 87 टेस्ट और 262 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. टेस्ट मैच में उन्होंने 23.56 की औसत से 373 विकेट और वनडे में 23.84 की औसत से 416 विकेट चटकाए हैं.
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