Home मनोरंजन Vande Mataram पर फिर छिड़ी बहस, Kangana Ranaut ने सैफ अली खान की मम्मी को दिया करारा जवाब

Vande Mataram पर फिर छिड़ी बहस, Kangana Ranaut ने सैफ अली खान की मम्मी को दिया करारा जवाब

by Preeti Pal 21 August 2026, 12:02 PM IST (Updated 21 August 2026, 12:29 PM IST)
21 August 2026, 12:02 PM IST (Updated 21 August 2026, 12:29 PM IST)
Vande Mataram पर फिर छिड़ी बहस, Kangana Ranaut ने सैफ अली खान की मम्मी को दिया करारा जवाब

Vande Mataram: ‘वंदे मातरम्’ एक बार फिर चर्चा में है. इस बार बहस में बॉलीवुड के दो फेमस एक्ट्रेसेस के नाम सामने हैं. पहली हैं शर्मिला टैगोर और दूसरी कंगना रनौत. दरअसल, सैफ अली खान की मम्मी शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रीय गीत के कुछ हिस्सों को लेकर अपनी राय रखी. इसके बाद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए उनके विचारों पर सवाल उठाए. देखते ही देखते ये मुद्दा सिनेमा से निकलकर देश, धर्म और कला से जुड़ी बड़ी बहस में बदल गया.

शर्मिला टैगोर ने क्या कहा?

81 साल की शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कहा कि गीत की शुरुआती दो पंक्तियां या अंतरे ज्यादा लोगों को सहजता से स्वीकार्य हो सकते हैं. उनका तर्क था कि गीत के आगे के हिस्सों में हिंदू देवी- देवताओं के बारे में हैं, जो एक धर्म को मानने वाले लोगों के लिए असहज हो सकते हैं. शर्मिला ने ये भी कहा कि उनके लिए देशभक्ति और लोगों की धार्मिक मान्यताओं के बीच बैलेंस जरूरी है. यानी उनका फोकस इस बात पर था कि राष्ट्रीय प्रतीक ऐसा हो जिसे अलग-अलग आस्था रखने वाले लोग आसानी से अपना सकें.

कंगना ने फिर पकड़ा मुद्दा

शर्मिला टैगोर की बात सामने आते ही कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया दे दी. कंगना ने कहा कि एक कलाकार के तौर पर शर्मिला की सोच को इतना सीमित देखकर उन्हें हैरानी हुई. कंगना का कहना था कि ‘वंदे मातरम्’ को सिर्फ धार्मिक नजरिए से देखने के बजाय इसे कला, इतिहास और देशभक्ति के लिए समझना चाहिए. उन्होंने शर्मिला से हिंदू-मुस्लिम मानसिकता से आगे निकलकर इस गीत को देखने की अपील की. कंगना का तर्क ये है कि किसी कविता में मौजूद प्रतीकों को सीधे धार्मिक आस्था के चश्मे से देखना उसकी सोच को सीमित कर सकता है.

Netflix पर छाई Operation Safed Sagar, ग्लोबल टॉप 10 में नंबर 2 पर पहुंची सीरीज; अब MiG-21 पर आएगी डॉक्यूमेंट्री

क्यों खास है ‘वंदे मातरम्’?

‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ नाम है. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ‘आनंदमठ’ में शामिल ये गीत आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों के बीच जोश और देशभक्ति जगाने का ज़रिया बना था. गीत के शुरुआती हिस्से में मातृभूमि की खूबसूरती और उसकी समृद्धि का वर्णन है. वहीं, बाद के हिस्सों में दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसे हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र भी मिलता है. यही हिस्सा लंबे समय से बहस का मुद्दा बना हुआ है.

पुराना सवाल, नया विवाद

‘वंदे मातरम्’ को लेकर ये चर्चा कोई नई नहीं है. इसके धार्मिक संदर्भों को लेकर पहले भी अलग-अलग समुदायों और नेताओं ने नाराज़गी जाहिर की हैं. इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल के संदर्भ में शुरुआती दो अंतरों को खास महत्व दिया गया. यानी आज की बहस अचानक पैदा हुई कोई नई कहानी नहीं है. फर्क बस इतना है कि इस बार सोशल मीडिया और बॉलीवुड के चेहरों ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है.

मामला सिर्फ गीत का नहीं

कंगना और शर्मिला की राय में अंतर ने एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया है. क्या राष्ट्रीय गीत और कला को सिर्फ धार्मिक पहचान के आधार पर समझना चाहिए? या उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए? शर्मिला टैगोर जहां अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखने की बात कर रही हैं. वहीं, कंगना रनौत इसे देशभक्ति और कला के संदर्भ में देखने पर जोर दे रही हैं. फिलहाल दोनों की बहस ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है.

इस शुक्रवार OTT पर लगेगा मनोरंजन का तड़का, अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आ रही हैं 5 नई फिल्में और सीरीज

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?