Yemen War: लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अब जंग तेज होती जा रही है. सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. मंगलवार सुबह तक यमनी सरकार की सेना ने दावा किया कि उसने तेजी से आगे बढ़ते हुए हूती विद्रोहियों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास स्थित उनके कई ठिकानों से खदेड़ दिया है. यमन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सऊदी समर्थित सरकारी सेना ने मोखा पर कब्जा कर लिया है और वहां से हूती लड़ाकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है. इसके जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज करने का दावा किया है. हूतियों के मुताबिक, उन्होंने राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, अरामको की रिफाइनरी और सऊदी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी यमन के एक शहर के आसपास भी अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं, जो करीब 12 साल से जारी गृहयुद्ध के दौरान संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है. बता दें कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी संघर्ष बेहद महत्वपूर्ण है. यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए तेल और अन्य सामानों का बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है.

ट्रंप प्रशासन की बड़ी चेतावनी
यमन में कई सालों बाद इतनी भीषण लड़ाई ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. ईरान द्वारा महीनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट पैदा करने के बावजूद अमेरिका और खाड़ी देशों ने काफी हद तक तेल निर्यात बहाल कर लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस चुनावों के बाद वे बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू कर सकते हैं. दूसरी ओर, हो सकता है कि ईरान प्रॉक्सी हमलों की योजना बना रहा हो. इसी बीच मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100 डॉलर के पास पहुंच गई, जबकि ईरान युद्ध से पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी. साथ ही मध्य पूर्व से लेकर अन्य जगहों पर भी बुनियादी चीज़ों की कीमतें काफी उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. यमन के संघर्ष का असर अरब दुनिया के सबसे गरीब देश पर पड़ा है. हूती विद्रोहियों ने 2014 में अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़कर राजधानी सना पर कब्जा कर लिया.

‘लड़ाकू विमानों की आवाज और फिर जोरदार धमाके…’ हूती के कब्जे वाली सना में सऊदी हमले का दावा
2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की तरफ से दखल दिया. सालों की लड़ाई सऊदी अरब और ईरान के बीच एक ऐसे प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) में बदल गई जिसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है. इस युद्ध का असर अब यह है कि यमन में बड़े पैमाने पर भुखमरी और बदहाली फैल गई है. इस युद्ध में लड़ाकों और आम नागरिकों समेत 1,50,000 से ज़्यादा लोग मारे गए. साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय आपदाओं में से एक पैदा हो गई.
ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने दिया इस्तीफा, हामिद बोवार्ड बने कार्यवाहक मंत्री
लाल सागर के तट पर आगे बढ़े
2022 में हुए संघर्ष-विराम का पालन काफी हद तक इस गर्मी तक किया गया. पिछले महीने हूती विद्रोही तेजी से लाल सागर के तट पर आगे बढ़े और मोखा के अहम बंदरगाह शहर और बाब अल-मंदेब के द्वीपों पर कब्जा कर लिया. इससे उन्हें सऊदी जहाजों की नाकेबंदी को और मजबूत करने में मदद मिली. अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर मौजूद यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार यही से होकर गुजरता है. यह रास्ता मिस्र की स्वेज नहर के ज़रिए यूरोप और एशिया के बीच व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है. आपको बताते चलें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू किया और इसके बाद ईरान ने शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. यह सऊदी तेल निर्यात के लिए एक अहम वैकल्पिक रास्ता बन गया. लाल सागर के तट को वापस पाने के लिए सऊदी-समर्थित हमला तब शुरू हुआ जब हूती लड़ाकों ने पश्चिमी शहर ताइज के पास स्थित कस्बे ‘तुरबाह’ पर कब्जा कर लिया. यह कस्बा सरकारी सेनाओं के लिए एक अहम बेस के तौर पर काम कर रहा था. ताइज में इस युद्ध की सबसे भीषण लड़ाइयां हुई हैं और हूती लड़ाकों के लिए इस पर कब्जा करना एक बड़ी जीत होगी. इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के अनुसार, अगस्त की शुरुआत से यमन में जारी लड़ाई के कारण 1,84,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. संस्था ने बताया कि 27 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच लगभग 22,000 लोग विस्थापित हुए, जो पिछले हफ्ते की तुलना में 26 प्रतिशत ज़्यादा है.

बाब अल-मंदेब के आसपास के इलाकों पर कब्जा किया
यमन के अधिकारियों ने बताया कि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बाब अल-मंदेब के आस-पास के कई अहम इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया है. कुछ हफ्ते पहले ही हूतियों ने इस पर कब्जा किया था. इनमें धुबाब का अहम शहर भी शामिल है. अधिकारियों ने बताया कि गठबंधन ने बाब और हदीद शहरों पर भी कब्जा कर लिया है. इन अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. अधिकारियों ने यह बताया कि सऊदी अरब का मानना है कि विद्रोही बिना सैन्य दबाव के बातचीत की मेज पर वापस नहीं आएंगे. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप थिंक टैंक के वरिष्ठ यमन विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि सऊदी समर्थित हमले का मकसद हूती विद्रोहियों को कमजोर करना और यह साफ संदेश देना है कि उसके पास यमन के अंदर नियंत्रण करने की क्षमता है. उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब अब तंग आ चुका है. साथ ही हूती बातचीत के लिए वापस आने से इनकार कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि वे लगातार अपना दायरा बढ़ा रहे हैं. वह लोग मांगों को लेकर और ज्यादा अड़ियल हो गए हैं और सऊदी अरब पर लगातार हमले कर रहे हैं.

यमन में बढ़ा तनाव, हूतियों के बढ़ते कब्जे के बीच सरकारी सेना ने खोला मोर्चा; लाल सागर पर बड़ा हमला
अमेरिका ने सऊदी अरब को मदद दी
एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका ने इस अभियान में सऊदी अरब को मदद दी है. अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस मदद में खुफिया जानकारी साझा करना, टारगेट की पहचान करना और हमले की योजना बनाना शामिल था. लेकिन ट्रंप ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की भागीदारी बढ़ाने में हिचकिचाहट दिखाई है और कम से कम अभी के लिए वे अमेरिकी सेना को विद्रोहियों के खिलाफ अपने हमले फिर से शुरू करने का निर्देश नहीं दे रहे हैं. परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान और NATO सदस्य तुर्की का कहना है कि वे एक नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में सैन्य बल तैनात कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने सैनिकों की संख्या या अन्य विवरण नहीं दिए हैं. जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान का अपने देश के उग्रवादियों से लड़ने का अनुभव और साथ ही पाकिस्तान और तुर्की की तकनीकी क्षमताएं, सऊदी अरब की सुरक्षा को ड्रोन जैसे खतरों के खिलाफ मजबूत कर सकती हैं.
बलूचिस्तान में गुमशुदगी का नया दौर? खरान, केच और मस्तुंग से 3 लोग लापता, एक व्यक्ति की घर वापसी
