Home Top News इमरान खान की सेहत पर सियासी घमासान: इलाज पर गहराया सस्पेंस, कोर्ट के फैसले पर टिकीं नजरें

इमरान खान की सेहत पर सियासी घमासान: इलाज पर गहराया सस्पेंस, कोर्ट के फैसले पर टिकीं नजरें

by Sanjay Kumar Srivastava 19 August 2026, 9:40 PM IST (Updated 19 August 2026, 9:42 PM IST)
19 August 2026, 9:40 PM IST (Updated 19 August 2026, 9:42 PM IST)
इमरान खान की सेहत पर सियासी घमासान: अस्पताल या जेल? इलाज पर गहराया सस्पेंस, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकीं नजरें

PAK IMRAN: जेल में बंद पूर्व पाक पीएम इमरान खान को लेकर नया मोड़ आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने जहां उनका इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराने का आदेश दिया है तो वहीं सरकार ने कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. सरकार निजी अस्पताल में खान का इलाज कराने को इच्छुक नहीं दिख रही है.

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं. शहबाज शरीफ सरकार और सेना ने उन पर तोशाखाना (सरकारी उपहार बेचने), गोपनीय दस्तावेज लीक करने (सिफर मामला) और भ्रष्टाचार जैसे 100 से अधिक मामले दर्ज कर उन्हें सजा सुनाई है. हालांकि, इमरान इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें जेल से प्राइवेट अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है.

पार्टी पर प्रभाव और संचालन

इमरान खान के जेल जाने से उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को भारी नुकसान हुआ है. सरकार ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और चुनाव चिह्न भी छीन लिया था. वर्तमान में इमरान खान की अनुपस्थिति में पार्टी का मुख्य कामकाज उनके द्वारा नियुक्त चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान और महासचिव सलमान अकरम राजा जैसे वरिष्ठ नेता संभाल रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसले जेल से इमरान खान की सहमति के बाद ही होते हैं.

क्या सरकार को है खतरा?

हां, सरकार इमरान खान को अपने लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा मानती है. जेल में होने के बावजूद इमरान खान की लोकप्रियता बेहद मजबूत है. उनके समर्थक लगातार देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार को डर है कि यदि इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो जनसमर्थन के बूते वे मौजूदा गठबंधन सरकार को सत्ता से बेदखल कर सकते हैं.

शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में होगा इलाज

पाकिस्तान सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की. इसमें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने के आदेश की समीक्षा करने और उसे वापस लेने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया था कि 73 साल के खान को अगले दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाए और 16 सितंबर को अगली सुनवाई तक उन्हें वहीं रखा जाए. कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड बनाने का भी आदेश दिया और क्रिकेटर से नेता बने खान को परिवार से हर हफ़्ते मिलने की इजाज़त दी. यह आदेश खान की सेहत को लेकर उनके परिवार और समर्थकों की महीनों की चिंता और उन्हें सही मेडिकल सुविधा न मिलने के बार-बार लगाए गए आरोपों के बाद आया.

2023 से हैं रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) पार्टी के संस्थापक खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर कई मामले चल रहे हैं. बुधवार को समीक्षा याचिका दायर करते हुए केंद्र सरकार ने इस आदेश को भेदभावपूर्ण बताया और तर्क दिया कि इससे सभी दोषियों के लिए सेहत से जुड़ी समस्याओं के मामले में इसी तरह के इलाज की मांग करने की मिसाल कायम हो सकती है. खान की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार के इस कदम की आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करने के बजाय मामले को टालने की चालें चल रही है. सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश खान के मामले में कई एक जैसी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जो इस साल की शुरुआत में नेता की आंखों की बीमारी सामने आने के बाद दायर की गई थी.

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सरकारी इलाज से संतुष्ट नहीं हैं परिजन

याचिकाकर्ताओं ने खान को किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी, क्योंकि वे सरकारी मेडिकल सुविधाओं में मिल रहे इलाज से संतुष्ट नहीं थे. शुरुआत में केंद्र सरकार ने इस आदेश पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी और इसे लागू करने की घोषणा की थी. लेकिन बाद में कानून मंत्री आज़म तरार ने घोषणा की कि सरकार आदेश में बदलाव की मांग करते हुए एक समीक्षा याचिका दायर करेगी. सरकार ने बुधवार को समीक्षा याचिका दायर करते हुए तर्क दिया कि शीर्ष अदालत का अंतरिम आदेश भेदभावपूर्ण था क्योंकि यह केवल खान पर लागू होता था, न कि आम कैदियों पर.

इलाज में रुकावट डाल रही सरकार

कानून मंत्री तरार ने कहा कि माना जा रहा है कि खान को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने से सभी दोषियों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं के मामले में इसी तरह के इलाज की मांग करने की एक मिसाल कायम होगी. समीक्षा याचिका में आदेश को “अधिकार क्षेत्र से बाहर” और इसलिए “समीक्षा के योग्य” बताया गया. आगे यह भी तर्क दिया गया कि आदेश में “कानूनी गलतियां हैं जो रिकॉर्ड में साफ तौर पर दिख रही हैं”. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जेल के नियमों पर ध्यान नहीं दिया. सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए खान की राजनीतिक पार्टी के सीनियर नेता मूनिस इलाही ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने में “रुकावट” डाल रही है। सुप्रीम कोर्ट को खुद संज्ञान लेना चाहिए और अपने आदेश को लागू करवाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को किया जाए लागू

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान ने कहा कि हम पुरज़ोर मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को तुरंत लागू किया जाए जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में तुरंत इलाज के लिए भेजें. उन्होंने सरकार से अपील की कि राजनीतिक तनाव कम करने के लिए अदालती आदेश को तुरंत लागू किया जाए. खान को 2023 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और हिंसा हुई और पुलिस ने सख्त कार्रवाई की.

आंखों की समस्या को लेकर समर्थक चिंतित

खान के समर्थक उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके रिश्तेदारों और पार्टी के साथियों ने बार-बार मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है और अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे उन्हें सही इलाज, परिवार से मिलने और कानूनी सलाह लेने से रोक रहे हैं. खान के मामले में एक मुख्य चिंता उनकी आंखों की समस्या थी. जनवरी के आखिर में उनकी बीमारी ‘राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ का पता चलने के बाद पिछले कुछ महीनों में उन्हें कई बार आंखों के इलाज के लिए इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ ले जाया गया था. तब से उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग तेज़ हो गई थी.

खान की पार्टी ने किया खारिज

मंगलवार को आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच के प्रमुख जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए हम कैदी की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश जारी कर रहे हैं. यह आदेश जेल अधिकारियों द्वारा शीर्ष अदालत को यह बताए जाने के एक दिन बाद आया कि खान की आंखों की हालत में काफ़ी सुधार हुआ है और उनकी नज़र लगभग सामान्य हो गई है.

Imran Khan को जेल से प्राइवेट अस्पताल ले जाने का आदेश, पाक SC ने बनाया मेडिकल बोर्ड

एक रिपोर्ट में, जेल अधिकारियों ने खान का ब्लड प्रेशर 140/80 और पल्स रेट 54 बीट्स प्रति मिनट दर्ज किया. रिपोर्ट में कहा गया कि उनका ECG सामान्य था और छाती साफ़ थी. जेल अधिकारियों की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मेडिकल इलाज और नज़र में सुधार से पता चलता है कि जेल प्रशासन ने खान को बेहतरीन हेल्थ केयर सुविधाएं देने की पूरी कोशिश की है . एक ऐसा दावा जिसे खान की पार्टी के साथियों ने खारिज कर दिया है.

सरकार ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज का किया विरोध

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के सीनियर नेताओं ने बुधवार को संघीय सरकार की आलोचना की. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके उस आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की थी, जिसमें जेल में बंद नेता को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने को कहा गया था. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह शीर्ष अदालत के आदेश को मानने के बजाय मामले को टालने की चालें चल रही है. इस आदेश से 73 साल के पूर्व क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान को राहत मिल सकती थी. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया था कि खान को अगले दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए और वे 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक वहीं रहें.

शीर्ष अदालत ने जेल के नियमों पर नहीं दिया ध्यान

अदालत ने पूर्व क्रिकेटर से नेता बने खान की सेहत की जांच और इलाज के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाने का भी आदेश दिया. साथ ही, अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें हफ्ते में एक बार अपने परिवार से मिलने की इजाज़त भी दी. सरकार की समीक्षा याचिका में कोर्ट के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया और कहा गया कि इसकी समीक्षा की जानी चाहिए. इसमें यह भी तर्क दिया गया कि आदेश में कानूनी गलतियां हैं जो रिकॉर्ड पर साफ दिख रही हैं और शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में जेल के नियमों पर ध्यान नहीं दिया.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला काबिले तारीफ

सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए खान की राजनीतिक पार्टी के सीनियर नेता मूनिस इलाही ने X पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने में रुकावट डाल रही है. सुप्रीम कोर्ट को खुद से संज्ञान लेना चाहिए और अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करना चाहिए. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के चेयरमैन बैरिस्टर गोहर अली खान ने कहा कि हम पुरज़ोर मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को तुरंत लागू किया जाए जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तुरंत इलाज के लिए अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में ट्रांसफर करें. उन्होंने सरकार से अपील की कि राजनीतिक तनाव कम करने के लिए अदालती आदेश को तुरंत लागू किया जाए. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, जिस प्रांत में खान की पार्टी सत्ता में है, ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को काबिले-तारीफ़ बताया और उम्मीद जताई कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाएगा.

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