Islamabad Talks : मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में ईरानी प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर पहुंचा है. साथ ही अमेरिकी विशेष राजदूत भी वहां पहुंच रहे हैं. अब देखना होगा कि जंग आगे बढ़ेगी या शांत होगी.
Islamabad Talks : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव की वजह से विश्व इकोनॉमिक को भारी झटका लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आ रही है. इसका असर अब सीधा अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में 2 हफ्ते का सीजफायर खत्म होने के बाद दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचा है. बताया जा रहा है कि ईरान से अमेरिकी डेलीगेशन बातचीत करेगा. वहीं, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी.
क्या बोला ईरानी विदेश मंत्रालय?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने एक्स पर कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी बैठक की कोई योजना नहीं है. बाकाई ने आगे कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करेंगे. बाकाई ने पाकिस्तानी सरकार को अमेरिका द्वारा थोपे गए हमले को खत्म करने के लिए चल रही मध्यस्थता और अच्छे कामों के लिए धन्यवाद दिया. बता दें कि व्हाइट हाउस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुक्रवार को कह दिया था कि उसके राजदूत विदेश मंत्री अराघची से मुलाकात करेंगे.
बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद में बातचीत के बाद अराघची मस्कट और मास्को के लिए भी रवाना होंगे. यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब इस्लामाबाद में अमेरिका ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजा है.
पाकिस्तान ने कही ये बात
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट की, जिसमें उन्होंने बताया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में एक प्रतनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है. इस दौरान उस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत विदेश मंत्री इशाक डार, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया.
यूरोपीय सहयोगियों पर US का हमला
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने यूरोपीय सहयोगियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लड़ाई हमारे मुकाबले कई गुना अधिक यूरोप की है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे से आवाजाही सामान्य करने और ईरान की पाबंदियों को हटाने के लिए नाटो और अन्य यूरोपीय देशों से शामिल होने के लिए आग्रह किया था. लेकिन नाटो के अन्य सदस्यों ने इस लड़ाई में साथ खड़े होने से साफ मना कर दिया.
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News Source: PTI
